आज की उमस भरी रात में राधा भाभी का पसीना सिर्फ गर्मी से नहीं, कुछ और ही आग से निकल रहा था। पंखे की धीमी हवा भी बेअसर लग रही थी, और उनका लाल सुर्ख चेहरा उस गर्मी का गवाह था जो सिर्फ बाहर नहीं, भीतर भी सुलग रही थी। रोहन, जो बरामदे में बैठा अपनी किताबें पलट रहा था, चोरी-छिपे उनकी एक-एक हरकत पर नजर रखे हुए था। राधा भाभी की ढीली सूती साड़ी में भी उनका भरा-पूरा बदन साफ झलक रहा था। उनके आँचल से झाँकता पेट, जिस पर पसीने की बूंदें मोतियों सी चमक रही थीं, रोहन के मन में हलचल मचा रहा था।
सुनील भैया, रोहन के बड़े भाई, एक हफ्ते के लिए गाँव से बाहर गए थे। इस घर में अब रोहन और राधा ही बचे थे। पिछले कुछ दिनों से रोहन ने महसूस किया था कि राधा भाभी में एक अजीब सी बेचैनी है। कभी वो बिना वजह खिड़की से बाहर देखती रहतीं, कभी आधी रात को छत पर जाकर टहलतीं। उनकी आँखों में एक अजीब सी प्यास थी, जिसे रोहन पहचानता था। वो जानता था, यह किसी और चीज़ की नहीं, बल्कि भाभी की कामुक इच्छाएं हिंदी कहानी की सच्चाई थी, जो अब उनकी आँखों में साफ नज़र आ रही थी।
रात गहरा रही थी। खाने के बाद राधा भाभी अपने कमरे में चली गईं। रोहन को नींद नहीं आ रही थी। वह अपनी पढ़ाई छोड़कर धीरे से उनके कमरे की ओर बढ़ा। दरवाज़ा हल्का सा खुला था। भीतर से आती धीमी कराह सुनकर रोहन थम गया। उसने हल्के से दरवाज़े को और खोला। राधा भाभी बिस्तर पर पेट के बल लेटी थीं, उनकी साड़ी कमर से ऊपर खिसकी हुई थी और ब्लाउज भी थोड़ा खुला था। वह तकिए में मुँह दबाए कुछ बुदबुदा रही थीं। रोहन का दिल ज़ोरों से धड़क उठा। उसने देखा, उनकी कमर और नितंबों पर पसीने की हल्की परत थी, जो चंद्रमा की रोशनी में चमक रही थी।
“भाभी…” रोहन की आवाज़ जैसे उसके गले में ही फँस गई। राधा चौंककर पलटीं। उनकी आँखें कुछ नम थीं, होंठ खुले हुए और साँसें तेज़। रोहन ने देखा कि उनके चेहरे पर शर्म और एक अजीब सी चाहत का मिश्रण था। राधा तुरंत उठीं और साड़ी ठीक करने लगीं, पर रोहन ने उनका हाथ पकड़ लिया। उनके शरीर का स्पर्श पाते ही राधा कांप गईं।
“रोहन… तुम यहाँ?” उनकी आवाज़ में थरथराहट थी।
“आप ठीक नहीं हैं, भाभी?” रोहन ने उनका हाथ नहीं छोड़ा। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, जो राधा की प्यासी निगाहों से मिल रही थी। राधा ने अपनी नज़रें झुका लीं, पर उनके शरीर कांपना बंद नहीं हुआ। रोहन धीरे से उनके और करीब आया, उनकी सांसों की गरमाहट महसूस कर रहा था। उसकी एक उँगली ने राधा के गाल से पसीने की एक बूंद पोंछी। उस स्पर्श से राधा की आँखें बंद हो गईं, और उन्होंने एक लंबी साँस छोड़ी।
रोहन ने बिना कुछ कहे राधा को अपनी बाँहों में भर लिया। राधा ने पहले तो हल्का सा विरोध किया, पर फिर ढीली पड़ गईं। उनकी बाँहें भी रोहन की गर्दन के इर्द-गिर्द लिपट गईं। रोहन ने उनके होंठों को अपने होंठों में कैद कर लिया। एक लंबी, गहरी, प्यासी चूम, जिसमें वर्षों की दबी इच्छाएं घुल रही थीं। राधा पूरी तरह से पिघल गईं। उनके भीतर की सारी भाभी की कामुक इच्छाएं एक-एक करके बाहर आ रही थीं। रोहन ने उन्हें बिस्तर पर धकेला। राधा ने खुद को समर्पण कर दिया।
कपड़े कब उनके जिस्म से अलग हुए, उन्हें पता ही नहीं चला। रोहन का मजबूत जिस्म राधा के कोमल बदन पर था। उनके बदन एक-दूसरे से रगड़ खा रहे थे, पसीने में सराबोर, एक आग की तरह दहकते हुए। राधा की मदहोश कराहें और रोहन की गहरी साँसें पूरे कमरे में गूँज रही थीं। रोहन ने अपनी उँगलियाँ राधा के बालों में फँसाईं और उनके होठों पर दोबारा हमला बोल दिया। राधा ने अपनी जाँघें खोलीं और उसे अपने भीतर समाने के लिए आमंत्रित किया। रोहन ने बिना देरी किए, एक झटके में राधा के भीतर प्रवेश कर गया।
एक चीख, फिर एक गहरी आह राधा के होंठों से निकली। वह दर्द और आनंद के मिश्रण से सिहर उठीं। रोहन का हर धक्का राधा को एक नई दुनिया में ले जा रहा था। राधा अपनी सारी दबी हुई कामनाओं को मुक्त कर रही थीं, उनकी कामुक इच्छाएं अब पूरी तरह से बेकाबू हो चुकी थीं। वे रोहन को कसकर जकड़े हुए थीं, उसके कंधों को अपने नाखूनों से खरोंच रही थीं। उनकी तेज़ साँसें और मदहोश कराहें चरम सीमा तक पहुँच रही थीं। कुछ ही देर में, दोनों एक साथ उस आनंद के सागर में डूब गए, जहाँ सिर्फ़ तृप्ति और शांति थी।
रात भर उनके शरीर एक-दूसरे में सिमटे रहे। अगली सुबह, जब सूरज की किरणें कमरे में झाँकीं, तो राधा और रोहन एक-दूसरे की बाँहों में सुकून से सोए हुए थे। उनकी रात की प्यास बुझ चुकी थी, और इस रात ने उनकी ज़िंदगी में एक नया अध्याय खोल दिया था, जो भाभी की कामुक इच्छाएं हिंदी कहानी का एक अनकहा, गहरा और अविस्मरणीय हिस्सा बन गया था।
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