आज दोपहर की तपती धूप में, सुमन भाभी की पसीने से भीगी साड़ी मेरे दिल की धड़कनों को एक अलग ही ताल दे रही थी। उनका भीगा जिस्म, हल्के कपड़े में लिपटे हुए भी अपनी हर वक्रता दिखा रहा था, जिसे देखकर मेरे अंदर एक पुरानी आग फिर से भड़क उठी थी। मैं रोहन, अपनी भाभी सुमन को पिछले कई सालों से चाहता था, लेकिन कभी हिम्मत नहीं हुई थी। पर आज, जब घर में कोई नहीं था और भाभी अपने कमरे में आराम कर रही थीं, मुझे लगा यही वो मौका है, जिसकी मुझे बरसों से तलाश थी। यह एक ऐसी **भाभी की दीवानी कर देने वाली कहानी** की शुरुआत थी, जिसकी कल्पना मात्र से मेरा जिस्म सिहर उठता था।
सुमन भाभी अपने बिस्तर पर करवट लेकर लेटी हुई थीं, हल्की नींद में। उनके खुले बाल तकिए पर फैले थे और साड़ी का पल्लू छाती से हट चुका था, उनके भरे-पूरे वक्ष की हल्की झलक मेरे मन में तूफान उठा रही थी। मैंने दबे पाँव कमरे में प्रवेश किया। कमरे में हल्की खुश्बू थी, जो उनकी देह से आ रही थी, और इसने मेरी वासना को और हवा दी। मैं धीरे से उनके पास गया और उनके माथे पर गिरी लटों को सहलाया। उनकी आँखों की पलकें फड़कीं, और उन्होंने धीमी आवाज़ में पूछा, “कौन है?”
“मैं हूँ भाभी, रोहन।” मेरी आवाज़ में एक अजीब सी थरथराहट थी।
सुमन भाभी ने आँखें खोलीं, हल्की सी हैरानी थी। “क्या हुआ? तुम यहाँ क्या कर रहे हो?”
“बस… यूँ ही, आपसे बात करने आया था।” मैंने जानबूझकर उनके बगल में बैठते हुए कहा, ताकि मेरा हाथ उनके पैर को छू जाए। उनके जिस्म की गरमाहट ने मुझे और भी मदहोश कर दिया।
“कोई काम था?” उनकी आवाज़ में अब थोड़ी झिझक थी।
“हाँ, एक काम था।” मैंने अपना हाथ उनके पैर से ऊपर सरकाना शुरू किया, उनकी नरम जाँघों को छूता हुआ। वह सिहर उठीं, लेकिन उन्होंने हाथ हटाया नहीं। उनकी साँसें तेज़ हो गईं।
“क्या… क्या कर रहे हो रोहन?” उनकी आवाज़ बहुत धीमी, करीब-करीब फुसफुसाहट में बदल चुकी थी।
“मैं आपको बताना चाहता हूँ कि मैं आपको कितना चाहता हूँ, भाभी।” मैंने उनके होंठों की ओर झुकते हुए कहा। उन्होंने एक पल के लिए अपनी आँखें बंद कर लीं, जैसे आत्मसमर्पण कर रही हों। और मैंने उस पल का फायदा उठाया।
मेरे होंठ उनके नरम होंठों से मिले। शुरू में एक हल्की हिचकिचाहट थी, फिर उन्होंने जवाब देना शुरू कर दिया। उनके होंठ खुल गए और मेरी जीभ अंदर जाकर उनकी मीठी गरमाहट का स्वाद लेने लगी। उनके वक्ष तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रहे थे। मेरे हाथ उनकी कमर से होते हुए उनकी साड़ी के आँचल को हटाते हुए उनके भरे-पूरे वक्ष पर पहुँच गए। उनकी ब्रा के ऊपर से ही उनके उभार मेरे हाथों में कस गए।
“आह… रोहन…” उनके मुँह से एक मदहोश सिसकी निकली।
मैंने एक झटके में उनकी साड़ी और पेटीकोट उतार दिया। अब वह सिर्फ़ एक पतली ब्रा और पैंटी में थीं, उनके सुडौल वक्ष और गोल नितंब मेरी आँखों के सामने थे। मेरी साँसें बेकाबू हो चुकी थीं। मैं उनके बदन पर टूट पड़ा, हर इंच को चूमता, चाटता हुआ। उन्होंने अपनी आँखें बंद कर ली थीं और उनकी उंगलियाँ मेरे बालों में फँसी थीं, मुझे अपने करीब खींच रही थीं। मैंने उनकी ब्रा खोली और उनके कड़े निप्पल्स को मुँह में भर लिया। “आहह्ह्ह… उफ्फ्फ़…” उनकी लंबी चीख पूरे कमरे में गूँज उठी।
मेरे हाथ उनकी पैंटी के अंदर गए और उनकी गीली योनि को सहलाने लगे। वह पूरी तरह से गीली थीं, मेरी हर हरकत का इंतज़ार कर रही थीं। मैंने उनकी पैंटी भी उतार दी और उनके पैरों को फैला दिया। मेरा लिंग पूरी तरह से कठोर हो चुका था और उनकी गुदगुदी करता रहा। “अब और इंतज़ार नहीं होता रोहन, मुझे भर लो।” उन्होंने खुद को ऊपर उठाते हुए कहा।
मैंने बिना देर किए अपना पैंट उतारा और उनके ऊपर आ गया। मैंने धीरे से अपना लिंग उनकी प्यासी योनि के द्वार पर रखा और एक ही झटके में अंदर धकेल दिया। “आह्ह्हहह… माँ…” उनके मुँह से एक दर्द भरी चीख निकली, जो तुरंत ही सुख की आह में बदल गई। मैं अंदर-बाहर होने लगा, धीरे-धीरे, फिर तेज़ी से। हम दोनों एक साथ हिल रहे थे, पसीने से भीग चुके थे, एक-दूसरे की गर्माहट में खोए हुए। उनकी आँखें अब पूरी तरह से मदहोश थीं, और वह मेरे हर धक्के के साथ एक नई दुनिया में खो रही थीं। यह सचमुच **भाभी की दीवानी कर देने वाली कहानी** बन चुकी थी।
कमरा हमारी आहों, सिसकियों और जिस्मों के टकराने की आवाज़ से भर गया था। उन्होंने मुझे कसकर अपनी बाहों में जकड़ लिया था, उनके नाखून मेरी पीठ में गड़ रहे थे। जब मैं अपने चरम पर पहुँचा, तो उनके मुँह से एक तेज़ चीख निकली और मेरा सारा वीर्य उनके अंदर समा गया। हम दोनों ऐसे ही एक-दूसरे में सिमटे हुए, एक-दूसरे की साँसों को महसूस करते रहे, जब तक कि हमारी साँसें सामान्य नहीं हो गईं।
आज के बाद, सुमन भाभी सचमुच रोहन की **भाभी की दीवानी कर देने वाली कहानी** की जीवंत पात्र बन चुकी थीं, हर साँस में उसकी चाहत लिए। यह सिर्फ़ एक दोपहर की प्यास नहीं थी, यह उनके बीच एक नए रिश्ते की शुरुआत थी, जो अब हमेशा के लिए उनकी रातों का साथी बन गया था।
Leave a Reply