उस रात गर्मी अपनी चरम पर थी, और मेरे मन में भाभी सुनीता की देह की तपिश उससे कहीं ज़्यादा जल रही थी। मैं रवि, अपनी भाभी सुनीता को पिछले कई सालों से जानता था, पर आज तक मेरी निगाहों में कभी ऐसी वासना नहीं उमड़ी थी, जैसी उस रात। भैया किसी काम से बाहर गए हुए थे, और घर में सिर्फ़ मैं और भाभी थे। रात के ग्यारह बज रहे थे और बिजली गुल थी। मैं अपने कमरे में पसीने से तरबतर बिस्तर पर लेटा था, तभी मेरे कमरे का दरवाज़ा धीरे से खुला और एक काली परछाई अंदर आई।
“रवि, सो गए क्या?” वह भाभी सुनीता की आवाज़ थी, शहद में डूबी हुई।
मैं तुरंत उठ बैठा। “नहीं भाभी, गर्मी से नींद ही नहीं आ रही। आप?”
भाभी मेरे पास आकर बैठीं, उनकी साड़ी का पल्लू उनकी गर्दन से हटकर कंधे पर गिर गया था। लालटेन की मद्धिम रोशनी में उनका पसीना चमक रहा था, और मैंने देखा कि उनकी पतली मलमल की साड़ी उनके वक्ष से चिपकी हुई थी। उनकी सांसें थोड़ी तेज़ थीं, शायद गर्मी के कारण।
“मुझे भी नहीं आ रही नींद,” उन्होंने धीरे से कहा, “सोचा तुमसे ही बात कर लूँ।”
उनकी साँसों की गर्म हवा मेरे गालों से टकराई और मेरे पूरे बदन में सिहरन दौड़ गई। मैंने कभी भाभी को इतने करीब से नहीं देखा था। उनके अधरों पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं, और मेरी आँखें बिना पलक झपकाए उनके फूले हुए वक्ष पर टिक गईं। मेरा मन अनजाने डर और अनजानी इच्छा से भर गया।
मेरी नज़रें पकड़ी गईं, यह जानते हुए भी मैंने उन्हें हटाना उचित नहीं समझा। भाभी ने हल्की सी मुस्कान दी, जैसे उन्हें यह सब पता था, और फिर अपने माथे से पसीना पोंछने के लिए हाथ उठाया, जिससे उनके ब्लाउज का ऊपरी हिस्सा और अधिक उजागर हो गया। मेरे अंदर की आग और तेज़ हो गई।
“भाभी, बहुत गर्मी है…” मैंने लड़खड़ाती आवाज़ में कहा।
वह मेरे और करीब सरक आईं। “हाँ, आज तो हद ही हो गई है।” उनके हाथ ने मेरे हाथ को छुआ, एक अनजाने में किया गया स्पर्श था शायद, पर उस स्पर्श ने मेरे पूरे शरीर में करंट दौड़ा दिया। मैंने धीरे से उनका हाथ पकड़ लिया। उनका हाथ नर्म और गर्म था।
भाभी ने अपनी नज़रें उठाईं और हमारी आँखें मिलीं। उन आँखों में मैंने पहली बार वो प्यास देखी, जो मेरे अंदर भी जल रही थी। उन्होंने धीरे से अपना हाथ मेरे हाथ से नहीं हटाया, बल्कि अपनी उंगलियों से मेरी हथेली को सहलाने लगीं। यह इशारा मेरे लिए काफ़ी था।
यह वह रात थी जब मैंने सचमुच महसूस किया कि यह **भाभी की दीवानी कर देने वाली कहानी** है। मैंने धीरे से उनके कंधे पर हाथ रखा और उन्हें अपनी ओर खींचा। वह बिना किसी विरोध के मेरे पास आ गईं, उनकी साँसें तेज़ हो चुकी थीं। मैंने उनके रेशमी बालों को अपने हाथों में भरा और धीरे से उनके अधरों पर अपने होंठ रख दिए। एक पल की हिचकिचाहट के बाद, उन्होंने मेरा पूरा साथ दिया। हमारी साँसें एक-दूसरे में घुल-मिल गईं, और हमारे होंठों का मिलन गहरा होता गया।
मेरे हाथ उनकी कमर पर फिसल गए और मैंने उन्हें और कसकर अपनी बाँहों में भर लिया। उनकी साड़ी का पल्लू कब गिरा, मुझे याद नहीं। मैंने उनके चिकने पेट पर अपने होंठों से एक लंबी लकीर खींची, और वे एक धीमी आह भरकर मेरे बालों को सहलाने लगीं। धीरे-धीरे मैंने उनके ब्लाउज के बटन खोलने शुरू किए। उनकी नज़रें बंद थीं, और वे बस मेरी हर हरकत को स्वीकार कर रही थीं। जब ब्लाउज खुला, उनके कसे हुए वक्ष मेरी आँखों के सामने थे। मैंने अपने होठों से उनके वक्ष को सहलाया, और उनके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं।
हमारा बिस्तर अब हमारी वासना का अखाड़ा बन चुका था। एक-एक करके कपड़े उतरने लगे, और हमारे नंगे बदन एक-दूसरे से चिपक गए। उनकी चिकनी त्वचा, मेरे पसीने से तर शरीर के साथ मिलकर एक अजीब सी गरमाहट पैदा कर रही थी। मैं उनकी हर अदा, हर स्पर्श से और दीवाना बनता जा रहा था। यह वाकई एक **भाभी की दीवानी कर देने वाली कहानी** थी। मैंने उनके पूरे शरीर को चूमा, उनके नितंबों को अपनी उंगलियों से टटोला, और अंत में जब मैंने उनके भीतर प्रवेश किया, तो उनके मुँह से निकली एक लंबी, गहरी आह ने मेरे कानो को भर दिया।
हम दोनों पूरी रात एक-दूसरे में खोए रहे, अपनी कामवासना की सारी हदें पार करते हुए। पसीने और वासना की उस रात में, हमारे जिस्मों ने एक-दूसरे को इतना पहचाना, जितना किसी ने नहीं पहचाना था। हर स्पर्श, हर आह, हर गहरा धक्का हमें एक-दूसरे के और करीब ला रहा था। भोर होने से पहले, जब बिजली वापस आई, हम दोनों थककर चूर थे, पर हमारे चेहरे पर एक गहरी संतुष्टि की मुस्कान थी। यह प्रेम नहीं, वासना की एक अनकही **भाभी की दीवानी कर देने वाली कहानी** थी, जो हमारी आत्माओं में हमेशा के लिए अंकित हो गई थी।
जब मैं सुबह उठा, भाभी मेरे कमरे से जा चुकी थीं। पर मेरे शरीर में आज भी उनकी खुश्बू बसी थी, और मेरी आत्मा में उनकी यादों की गरमाहट। मैं जानता था कि यह बस शुरुआत थी। मेरी भाभी की दीवानगी अभी और गहराएगी।
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