उस दोपहर की तपिश में, जब सूरज आग उगल रहा था और घर के बाकी सब सदस्य दोपहर की नींद में डूबे थे, मेरी आँखें बस प्रिया भाभी को तलाश रही थीं। उनकी नारंगी सूती साड़ी, जो उनके सुडौल वक्षों और पतली कमर से चिपकी थी, मुझे हर पल पागल कर रही थी। भाभी की नाभि का गहरा कुआँ, जब भी वे झुकती थीं, मेरी रगों में आग लगा देता था। मैं कब से इस पल का इंतज़ार कर रहा था, जब मैं उन्हें अपनी वासना की गिरफ्त में ले सकूँ और उन्हें पूरी तरह अपनी “भाभी की दीवानी कर देने वाली कहानी” का हिस्सा बना सकूँ।
आज मौका था। भैया शहर से बाहर थे, और घर में सिर्फ मैं और प्रिया भाभी थे। वे रसोई से पानी लेकर निकलीं और मुझे सोफे पर बैठे देखा। “रोहन, तुम अभी तक जागे हो? दोपहर में थोड़ी देर सो लिया करो,” उन्होंने अपने मीठे स्वर में कहा, और उनकी आवाज़ में हमेशा की तरह ममता और एक अनदेखा नशा था। मैं उठा, उनके करीब गया, और जानबूझकर उनके बगल से गुज़रा। मेरी कमीज़ का हल्का सा स्पर्श उनकी बांह से हुआ। उन्होंने एक पल के लिए पलटकर देखा, उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, जिसे मैं पहचान गया।
“भाभी, मुझे गर्मी लग रही है। क्या मैं आपके कमरे के AC में थोड़ी देर बैठ सकता हूँ?” मैंने जानबूझकर भोलापन दिखाते हुए पूछा। उनका कमरा ज़्यादा ठंडा था, और मुझे पता था कि वे इनकार नहीं करेंगी। “हाँ, हाँ, बैठो ना। मैं अभी आती हूँ, बस कपड़े बदल लूँ,” उन्होंने कहा और अपने कमरे में चली गईं। मैं उनके पीछे-पीछे ही आ गया, और जैसे ही वे अलमारी खोलने मुड़ीं, मैंने दरवाज़ा बंद कर दिया।
“अरे रोहन, ये क्या? दरवाज़ा क्यों बंद कर दिया?” उन्होंने चौंककर पूछा। मैंने एक कदम आगे बढ़ाया और उन्हें अपनी बाहों में भर लिया। “भाभी, मैं अब और इंतज़ार नहीं कर सकता।” मेरी साँसें तेज़ हो चुकी थीं। उन्होंने पहले तो विरोध किया, उनके हाथ मेरे सीने पर थे, लेकिन उनकी आँखों में एक अलग सी प्यास थी। मैंने उनके अधरों पर अपने होंठ रख दिए, एक लंबा, गहरा चुंबन। उनके नरम होंठ मेरे होंठों में पिघलने लगे। उनका शरीर पहले तना, फिर मेरे आलिंगन में ढीला पड़ गया। यह मेरी “भाभी की दीवानी कर देने वाली कहानी” की शुरुआत थी।
मैंने उन्हें उठाते हुए बिस्तर पर लिटा दिया। उनकी साड़ी का पल्लू पहले ही ज़मीन पर गिर चुका था। मैंने धीरे-धीरे उनकी नारंगी साड़ी खोली, उनके ब्लाउज के हुक खोले। उनके भरे हुए, गोरे स्तन मेरी आँखों के सामने थे। मैंने अपने होंठ उनके वक्षों पर रखे, एक-एक कर चूमता हुआ, सहलाता हुआ नीचे उतरता गया। “अह्ह्ह्ह… रोहन…” उनके मुँह से सिसकियाँ निकल रही थीं। मैं उनकी नाभि में अपनी ज़ुबान फिराता, उन्हें और उत्तेजित करता गया। उनके पैर थरथरा रहे थे।
मैंने उनके पेट पर हाथों से सहलाते हुए उनकी सलवार का नाड़ा खोल दिया। अब वे पूरी तरह मेरे सामने नग्न थीं। उनकी गोरी जंघाओं के बीच का वह गुप्त स्थान मुझे बुला रहा था। मैं नीचे झुका और उनके गुप्तांग को अपने होंठों से स्पर्श किया। “नही… रोहन… कोई आ जाएगा…” वे कहने की कोशिश कर रही थीं, पर उनकी आवाज़ में अब सिर्फ वासना थी। मैंने उनकी बात अनसुनी कर दी और अपनी ज़ुबान से उन्हें और पागल करने लगा। वे अपनी कमर उछाल रही थीं, उनकी उँगलियाँ मेरे बालों में फँसी थीं। कुछ ही पलों में, वे अपनी सारी मर्यादाएँ भूलकर मेरे हाथों में पिघल गईं, उनके शरीर में एक तेज़ कंपन हुआ और वे अपनी पहली संतुष्टि तक पहुँच गईं।
मैंने अपने कपड़े उतारे और उनके ऊपर आ गया। उनके पैरों को फैलाकर, मैंने धीरे से खुद को उनके भीतर उतारा। “अह्ह्ह्ह्ह्ह… रोहन… आAhh…” उन्होंने एक गहरी साँस ली। हम दोनों पसीने से भीग चुके थे, और कमरा हमारी साँसों और देह के घर्षण से भर चुका था। मैंने अपनी गति बढ़ाई, और वे भी उतनी ही तेज़ी से मेरी हर धुन पर कमर मटकाने लगीं। उनकी आँखों में अब सिर्फ मैं था, उनकी देह पूरी तरह से मेरी दीवानी हो चुकी थी।
एक और लंबी, थका देने वाली लहर आई। हमारी साँसें एक हो गईं, और मैं उनके भीतर ही झूलता रहा। वे पूरी तरह से मेरी दीवानी हो चुकी थीं, उनकी आँखें बंद थीं और उनके होंठों पर एक संतोष भरी मुस्कान थी। मैंने उनके माथे पर एक चुंबन दिया। यह सिर्फ एक शुरुआत थी, हमारी इस गुप्त प्रेम कहानी की। आज मैंने सच में अपनी भाभी को अपनी दीवानी कर दिया था, और मुझे पता था कि अब से हर रात उन्हें मुझसे इसी तरह की दीवानगी की तलाश रहेगी। यह सचमुच “भाभी की दीवानी कर देने वाली कहानी” थी, जिसकी याद हम दोनों को हमेशा मदहोश करती रहेगी।
Leave a Reply