दोपहर की जलती धूप में, श्वेता भाभी का तन और मन दोनों प्यासा था। पति का बाहर जाना, घर की नीरसता और भीतर उठती एक अनकही बेचैनी, सब मिलकर उन्हें और भी असहज कर रहे थे। उन्होंने ढीली सी सूती साड़ी पहन रखी थी, जो उनके भरे-भरे बदन पर और भी कामुक लग रही थी। तभी घर का दरवाज़ा खुला और देवर रवि अंदर आया। कॉलेज से जल्दी लौट आया था। रवि को देखते ही श्वेता के मन में एक अजीब सी हलचल हुई। रवि की आँखें भी कुछ देर के लिए श्वेता पर ठिठक गईं, उनकी साड़ी से झाँकती गोरी कमर और उभारों को उन्होंने एक पल के लिए घूरा, फिर नज़रें झुका लीं।
“अरे रवि, इतनी जल्दी?” श्वेता ने आवाज़ में सहजता लाने की कोशिश की।
“हाँ भाभी, क्लास कैंसिल हो गई थी।” रवि ने कहा, फिर नज़र उठाकर उनकी आँखों में देखा। उन आँखों में एक अजीब सी चमक थी, एक ऐसा आमंत्रण जो सालों से अनकहा था।
श्वेता किचन में पानी लेने गईं। रवि उनके पीछे-पीछे आया। जब उन्होंने गिलास बढ़ाया, तो रवि ने जानबूझकर उनके हाथ को छुआ। श्वेता को करंट सा लगा। उनकी साँसें तेज़ हो गईं। रवि ने पानी पिया, गिलास मेज़ पर रखा और सीधा श्वेता के सामने आ खड़ा हुआ। उनके बीच अब केवल कुछ इंच का फासला था। श्वेता का दिल ज़ोरों से धड़क रहा था, उन्हें रवि की गरम साँसों का अहसास हो रहा था।
रवि ने धीरे से अपना हाथ बढ़ाया और श्वेता के गालों को सहलाया। श्वेता ने आँखें मूंद लीं। यह वो पल था जिसका इंतज़ार उन्होंने बरसों किया था। “भाभी…” रवि की आवाज़ में एक अजीब सी कशिश थी। श्वेता ने धीरे से आँखें खोलीं और रवि की आँखों में खो गईं। रवि ने अपनी बाँहें उनके कमर पर कस दीं और उन्हें अपने और करीब खींच लिया। श्वेता ने भी अपनी बाँहें रवि की गर्दन में डाल दीं।
अगले ही पल रवि के होंठ श्वेता के रसीले होंठों पर थे। पहले एक सहमा हुआ, फिर एक भूखा, प्यासा चुंबन। श्वेता ने भी पूरी तीव्रता से उसका जवाब दिया, अपने होंठों को खोलकर उसे और गहरा होने दिया। रवि ने अपनी ज़ुबान श्वेता के मुँह में डाली और श्वेता की ज़ुबान से खेलने लगा। उनकी साँसों की आवाज़ किचन की दीवारों से टकरा रही थी। रवि ने श्वेता की साड़ी का पल्लू सरकाया और उसके कंधे पर ज़ोरदार चुंबन दिया। श्वेता की आह निकल गई।
रवि ने श्वेता को गोद में उठाया और बेडरूम की तरफ चल दिया। श्वेता ने अपनी टाँगें उसकी कमर में कस लीं और उसके चेहरे पर लगातार चुंबन करती रहीं। बेड पर पहुँचकर रवि ने श्वेता को धीरे से लिटाया। एक-एक करके उनकी साड़ी और ब्लाउज़ के टुकड़े ज़मीन पर बिखेर दिए। श्वेता का गोरा, सुडौल शरीर अब उसके सामने था, केवल ब्रा और पेटीकोट में। रवि की आँखें वासना से चमक रही थीं। उसने श्वेता के ब्रेस्ट पर हाथ रखा और उन्हें मसलने लगा। श्वेता सिसक उठी। रवि ने ब्रा भी उतार दी और उनके गुलाबी निप्पल्स को मुँह में भर लिया। श्वेता की चीख निकल गई, “आह्ह्ह… रवि… बस… नहीं… और तेज़…”
रवि ने श्वेता के पेटीकोट को भी उतार दिया। अब श्वेता पूरी नग्न थी, उसके खुले बदन में एक तीव्र आग जल रही थी। रवि ने खुद के कपड़े उतारे और अपने सुडौल, शक्तिशाली शरीर को श्वेता के ऊपर झुका दिया। उनके जिस्मों का मिलन अब बस कुछ ही पलों की दूरी पर था। यह **भाभी देवर का रोमांस हिंदी कहानी** अपने चरम पर पहुँच रही थी। रवि ने अपने मज़बूत हाथों से श्वेता की टाँगों को ऊपर उठाया और धीरे-धीरे उसके भीतर प्रवेश किया।
“आह्ह्हहह!” श्वेता के मुँह से दर्द और आनंद की मिली-जुली आवाज़ निकली। रवि ने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए। हर धक्के के साथ श्वेता का शरीर मचल उठता। वह अपनी कमर उठाकर रवि का साथ दे रही थी। कमरा उनकी कामुक आवाज़ों से गूँज रहा था। पसीना उनके बदन से टपक रहा था, उनकी गंध और भी उत्तेजित कर रही थी। रवि ने अपनी गति बढ़ाई, श्वेता भी पूरी तरह से उसमें लीन हो चुकी थी। उनकी आँखें बंद थीं, होंठ खुले थे और वह सिर्फ रवि का नाम जपे जा रही थी।
कई मिनटों तक उनकी यह प्रेम-क्रीड़ा चलती रही। उनके जिस्मों ने एक-दूसरे में खोकर चरम सुख को प्राप्त किया। एक तीव्र, गर्म झटके के साथ दोनों एक साथ शांत हुए, एक-दूसरे की बाँहों में पस्त। रवि ने श्वेता को कसकर अपनी बाँहों में भर लिया। श्वेता ने अपना सिर रवि की छाती पर रखा और उसकी धड़कनों को महसूस किया। यह सिर्फ एक शारीरिक मिलन नहीं था, बल्कि एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव भी था जो बरसों के दबे अरमानों से उपजा था। इस **भाभी देवर का रोमांस हिंदी कहानी** में दोनों ने एक-दूसरे में अपने सारे सुख और चैन पा लिए थे। अब श्वेता भाभी की प्यास हमेशा के लिए रवि के हाथों बुझने लगी थी।
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