आज भी अमन को याद है, उस दिन की वह पहली नज़र, जब सीमा की साड़ी का पल्लू सरका था और उसकी कमर की गोलाई ने अमन के दिल में आग लगा दी थी। वे दोनों एक ही अपार्टमेंट बिल्डिंग में रहते थे। अमन अपनी पत्नी प्रिया के साथ, और सीमा अपने पति रवि के साथ। लेकिन इन दोनों के बीच एक अनकहा रिश्ता पनप रहा था, एक ऐसी चिंगारी जो बुझने का नाम नहीं ले रही थी। हर बार जब उनकी आँखें मिलतीं, तो एक गहरा, मूक निमंत्रण महसूस होता था, एक ऐसी प्यास जो उनके विवाहित जीवन में अधूरी थी।
आज शाम छत पर कपड़े सुखाने आई सीमा, अमन को देखते ही हल्की मुस्कान बिखेर गई। उसकी खुली जुल्फें हवा में लहरा रही थीं और उसके पसीने से भीगे तन से एक मदहोश कर देने वाली खुशबू आ रही थी। अमन ने देखा, सीमा की साड़ी उसके वक्षों पर कसकर लिपटी हुई थी, उसकी हर साँस के साथ उठती-गिरती हुई। अमन का दिल ज़ोरों से धड़कने लगा। उसने बहाने से कुछ सूखने वाले कपड़े लेने का नाटक किया और धीरे से उसके पास गया। “कपड़े सूख गए, सीमा?” उसने फुसफुसाते हुए पूछा, उसकी आवाज़ में एक अजीब-सी सिहरन थी। सीमा ने सिर उठाया, उसकी आँखें वासना से भरी थीं। “अभी नहीं, अमन… लगता है आज रात यहीं रुकना पड़ेगा,” उसकी आवाज़ में एक अजीब-सी गर्मी और निमंत्रण था।
अमन ने बिना सोचे-समझे उसका हाथ पकड़ लिया। सीमा ने विरोध नहीं किया, बल्कि उसकी उंगलियों ने अमन की हथेली को हल्के से सहलाया। बिजली का एक झटका अमन के पूरे शरीर में दौड़ गया। उसने सीमा को अपनी ओर खींचा और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। एक गहरा, गीला चुंबन शुरू हो गया, जो सारी मर्यादाओं को तोड़ रहा था। सीमा की साँसें तेज़ हो गईं, उसकी कमर अमन की ओर झुक गई। वह अपनी जीभ से अमन के मुँह का स्वाद चख रही थी, जैसे वर्षों से भूखी हो, जैसे यही वह स्वाद था जिसकी उसे हमेशा से तलाश थी।
अमन ने सीमा को अपनी बांहों में उठाया और उसे छत के कोने में बनी पानी की टंकी के पीछे ले गया, जहाँ किसी की नज़र नहीं पड़ सकती थी। उसने सीमा की साड़ी का पल्लू एक झटके में हटा दिया, उसके ब्लाउज के बटन खोलने लगा। सीमा की भारी छातियाँ आज़ाद होने को बेताब थीं। जैसे ही ब्लाउज़ हटा, उसकी गहरी घाटी और पसीने से तर बदन अमन के सामने था। अमन ने उसके वक्षों को अपने मुँह में भर लिया, उसके निप्पल को अपनी जीभ से सहलाया, कभी चूसता, कभी काटता। सीमा के मुँह से दर्द और आनंद का मिश्रण निकला। “हाँ, अमन… और कसकर… मुझे पागल कर दो…” सीमा फुसफुसाई, उसकी आवाज़ में बेबसी और उत्कटता दोनों थीं। “यह शादी के बाद भी जारी इश्क… मुझे मार डालेगा।”
अमन ने उसकी साड़ी पूरी तरह से उतार दी और उसे सिर्फ़ पेटीकोट और ब्रा में छोड़ दिया। फिर उसने धीरे-धीरे उसके पेटीकोट का नाड़ा खोला। सीमा की साँसें रुक-सी गईं, जैसे ही उसके पेटीकोट सरका और उसकी चिकनी जाँघें और गोल नितम्ब खुले। अमन ने उसे झुका दिया, उसके नितम्बों पर अपने हाथ फेरे, उन्हें सहलाया, मसलने लगा। सीमा की पैंटी पहले ही पसीने से नम हो चुकी थी, उसके अंदर से एक मीठी गंध आ रही थी। अमन ने उसे एक तरफ़ किया और सीमा की गीली, रसीली योनि को अपनी उंगलियों से टटोला। सीमा की चीख़ निकल गई, उसकी आँखें ऊपर की ओर चढ़ गईं।
वह अमन के लिंग को महसूस कर रही थी जो अब पूरी तरह से उठ चुका था और उसकी योनि के प्रवेश द्वार पर रगड़ रहा था। अमन ने एक झटके में प्रवेश किया। सीमा ने अपनी पीठ ऊपर की और एक तेज़ आह भरी। ‘आहहह… अमन… धीरे… हाँ… ऐसे ही…’। अमन ने अपनी कमर की गति बढ़ाई, सीमा की योनि की दीवारों से टकराते हुए, एक लयबद्ध ठुकाई शुरू की। दोनों वासना की गहराइयों में डूब चुके थे, हर झटका एक नया आयाम खोल रहा था। सीमा अपनी कमर ऊपर उठा रही थी, अमन के हर झटके का साथ दे रही थी। उसके स्तन अमन की छाती से टकरा रहे थे, और उसके होंठ अमन की गर्दन पर प्यार की निशानियाँ छोड़ रहे थे। ‘अमन… मैं नहीं जानती थी… कि शादी के बाद भी जारी इश्क… इतना मीठा हो सकता है,’ सीमा ने हाँफते हुए कहा। अमन ने उसकी बात सुनी नहीं, वह पूरी तरह से सीमा के शरीर में खोया हुआ था, उसे अपने चरम सुख की ओर ले जा रहा था। कुछ ही पलों में, दोनों के शरीर ऐंठने लगे, और एक साथ उन्होंने अपने चरम सुख का अनुभव किया, जिससे छत पर एक गर्म आह गूंज उठी।
दोनों एक-दूसरे की बांहों में ढीले पड़ गए, उनकी साँसें तेज़ थीं और उनके शरीर पसीने से तर। सूरज ढल चुका था और छत पर अँधेरा छा रहा था, लेकिन उनके अंदर एक नई रौशनी जल उठी थी। सीमा ने अमन के चेहरे को अपने हाथों में लिया और उसे एक और गहरा चुंबन दिया। ‘यह हमारा राज़ है, अमन,’ उसने फुसफुसाया, उसकी आँखों में चमक थी। अमन ने मुस्कुराते हुए उसके सिर को चूम लिया। ‘एक ऐसा राज़… जिसे मैं बार-बार जीना चाहता हूँ।’ यह सिर्फ़ एक शुरुआत थी, उनके शादी के बाद भी जारी इश्क की, जो अब उनकी ज़िंदगियों का एक अहम हिस्सा बन चुका था, एक ऐसा रिश्ता जो कभी खत्म नहीं होगा, बस और गहरा होता जाएगा।
Leave a Reply