दरवाजे की हल्की सी आहट के साथ प्रिया के भीतर एक तूफ़ान सा उमड़ पड़ा। उसकी धड़कनें बेकाबू होकर ढोलक की तरह बज रही थीं, जैसे इस गुप्त मुलाकात की धुन छेड़ रही हों। रोहन का छोटा सा अपार्टमेंट, शहर के शोर से दूर, उनके प्रेम का एक निजी स्वर्ग था। आज फिर वह अपने पति की आँखों में धूल झोंककर यहाँ आई थी, उस वासना की आग को शांत करने जो शादी के बाद भी जारी इश्क के रूप में उसके भीतर सुलग रही थी।
रोहन पहले से ही इंतज़ार कर रहा था, उसकी निगाहों में वही गहरा इंतज़ार, वही मदहोश करने वाला जुनून। प्रिया को देखते ही उसके चेहरे पर एक मादक मुस्कान फैल गई। प्रिया ने अंदर कदम रखा और दरवाजा धीरे से बंद कर दिया। हवा में एक अजीब सी उत्तेजना घुली हुई थी, उनके अनकहे वादों और दबी हुई चाहतों की गंध। रोहन ने एक पल की भी देर न करते हुए उसे अपनी बाहों में खींच लिया। उनके होंठ एक-दूसरे से मिले, एक ऐसी प्यास को बुझाने के लिए जो सिर्फ़ यहीं तृप्त हो सकती थी। प्रिया ने उसकी गर्दन में अपनी बाहें कस लीं, अपनी सारी इच्छाओं को उस एक पल में उड़ेलते हुए।
उनकी साँसें एक-दूसरे में घुलमिल गईं, शरीर एक-दूसरे से चिपक गए जैसे सदियों से बिछड़े हुए हों। रोहन के हाथ उसकी कमर पर फिरे, फिर धीरे-धीरे उसकी साड़ी को सरकाते हुए उसकी नंगी पीठ पर उतर आए। प्रिया की आँखें बंद हो गईं, उसके पूरे शरीर में सिहरन दौड़ गई। उसे पता था कि यह गलत है, पर **शादी के बाद भी जारी इश्क** की यह आग इतनी तेज़ थी कि वह सब कुछ जला देती थी। उसके भीतर की औरत आज़ादी की साँस ले रही थी, उन बंदिशों से दूर जो उसे रोज़मर्रा की ज़िंदगी में जकड़ कर रखती थीं।
रोहन ने उसे गोद में उठा लिया और बेडरूम की तरफ़ ले गया। प्रिया ने अपने पैर उसकी कमर के इर्द-गिर्द कस लिए, उसकी देह की गरमाहट को महसूस करते हुए। बिस्तर पर पहुँचते ही वे एक-दूसरे पर गिर पड़े, कपड़े एक-एक करके हटते गए। प्रिया का बदन अब पूरी तरह नग्न था, रोहन की नज़रें उसे जी भर के निहार रही थीं। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, जैसे वह उसे अपनी आँखों से पी लेना चाहता हो। प्रिया के स्तन अब उसके हाथों में थे, उनकी कोमलता उसे और भी मदहोश कर रही थी। रोहन के होंठ उसके गले से होते हुए उसकी छाती तक पहुँचे, हर चुम्बन एक नई आग लगाता जा रहा था। प्रिया के मुँह से सिसकियाँ निकल रही थीं, वह पूरी तरह उसके हवाले हो चुकी थी।
उन्होंने एक-दूसरे की वासना को गहराइयों तक छुआ। रोहन ने अपने नग्न शरीर को प्रिया के ऊपर झुका दिया, उनके निजी अंग एक-दूसरे से टकराने लगे। प्रिया ने अपनी टांगें खोलीं, उसके भीतर की बेचैनी अब अपने चरम पर थी। “और नहीं, रोहन,” उसने फुसफुसाया, “अब और इंतज़ार नहीं।” रोहन ने एक गहरी साँस ली और धीरे-धीरे उसके भीतर उतर गया। प्रिया की एक तीखी आह निकल गई, उसका शरीर जैसे एक झटके में सुन्न हो गया। फिर दर्द की जगह एक मीठे सुख ने ले ली, एक ऐसा सुख जो उसे पहले कभी नहीं मिला था।
उनकी हरकतें तेज़ होती गईं, बिस्तर की चरमराहट उनके जुनून की गवाह बन रही थी। प्रिया ने अपनी कमर उठाई, हर झटके में रोहन को और गहराई तक खुद में समाने का निमंत्रण दे रही थी। उसके बाल बिखरे हुए थे, पसीना उसके माथे से टपक रहा था, पर उसकी आँखों में सिर्फ़ आनंद और वासना थी। “तुम मेरी हो, प्रिया,” रोहन ने उसके कान में फुसफुसाया, “यह **शादी के बाद भी जारी इश्क**, हमारी अपनी दुनिया है।” प्रिया ने उसे और कसकर जकड़ लिया, अपने मुँह से निकलती आहों को दबाने की कोशिश करते हुए। कुछ ही देर में, वे दोनों चरम सुख की गहराइयों में डूब गए, एक साथ, एक ही पल में। उनकी देह शांत हो गईं, पर आत्माएं अब भी एक-दूसरे से लिपी हुई थीं।
शांत पलों के बाद, रोहन ने प्रिया को अपनी बाहों में जकड़ रखा था। प्रिया का सिर उसके सीने पर था, उसकी धड़कनें अब भी तेज़ थीं, पर संतोष की एक गहरी शांति छाई हुई थी। यह सिर्फ़ एक मुलाकात नहीं थी; यह उनकी साझा दुनिया थी, जहाँ कोई नियम नहीं थे, सिर्फ़ चाहत और जुनून था। प्रिया जानती थी कि उसे जल्द ही अपने पति के पास वापस लौटना होगा, जहाँ उसे एक अलग भूमिका निभानी थी, पर यहाँ, इस पल में, वह सिर्फ़ रोहन की थी। हर मुलाकात बस एक और मोहर थी इस बात पर कि **शादी के बाद भी जारी इश्क** की यह दास्तान कभी खत्म नहीं होगी, बल्कि हर बार और भी गहराती चली जाएगी। वह उठ खड़ी हुई, अपने बिखरे कपड़ों को समेटते हुए, पर उसकी आत्मा रोहन के पास ही रह गई, अगली मुलाकात के इंतज़ार में, एक अनबुझी प्यास के साथ।
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