रात के सन्नाटे में, जब पूरा घर सो रहा था, सीमा की अधखुली आँखें छत पर टिकी थीं, पर उसका मन कहीं और, किसी और के इंतज़ार में बेचैन था। उसकी शादी को कई साल हो चुके थे, पर उसकी प्यास बुझने का नाम नहीं ले रही थी। उसके मन में **शादी के बाद भी जारी इश्क** की एक धीमी आग सुलग रही थी, जिसे कोई और हवा दे रहा था। उसके पति, सुरेश, अपने काम में इतने व्यस्त रहते थे कि सीमा के मन और तन की अनदेखी करने लगे थे। पर घर में एक और मर्दाना उपस्थिति थी, जो उसकी आँखों से कभी नहीं चूकती थी – उसका देवर, रवि।
रवि, अपनी युवावस्था की चमक और आकर्षक देह के साथ, सीमा के सपनों में अक्सर आता था। उसकी हँसी, उसकी शरारती आँखें, और उसके गठीले शरीर ने सीमा के अंदर एक दबी हुई इच्छा को फिर से जगा दिया था। आज रात भी, जब घड़ी ने दो का आँकड़ा छुआ, सीमा ने दरवाजे पर एक हल्की सी खटखटाहट सुनी। उसकी साँसें तेज़ हो गईं। उसने धीरे से दरवाजा खोला और अंधेरे में खड़े रवि को देखा। उसकी आँखों में वही बेकरारी थी जो सीमा महसूस कर रही थी।
रवि बिना कुछ कहे अंदर आया और दरवाजा बंद कर दिया। कमरे में पसरा घना अंधेरा उनकी बढ़ती धड़कनों का गवाह बन रहा था। सीमा ने अपनी साड़ी का पल्लू सरका दिया। रवि ने आगे बढ़कर उसे अपनी मजबूत बाँहों में कस लिया। उनके जिस्मों का पहला स्पर्श ही बिजली के झटके जैसा था, जिसने सीमा के पूरे शरीर में सनसनी दौड़ा दी। रवि के गर्म होंठ सीमा की गर्दन पर उतर आए, और उसने एक गहरी आह भरी। उसकी उंगलियाँ रवि के बालों में उलझ गईं, और वह अपनी आँखें बंद कर इस पल में डूब गई।
रवि ने उसे धीरे से बिस्तर पर धकेला। साड़ी और पेटीकोट एक पल में उसके जिस्म से अलग हो गए, और सीमा पूरी तरह से उसके सामने नग्न थी। कमरे की मंद रोशनी में, उसका गोरा बदन दूधिया लग रहा था। रवि की आँखें उसकी भरी हुई छाती पर टिक गईं। उसने अपने होंठ सीमा के गुलाबी निप्पल्स पर रखे और उन्हें चूसने लगा, जैसे कोई भूखा बच्चा दूध पी रहा हो। सीमा की साँसें उखड़ गईं, और उसकी देह ऐंठने लगी। उसके मुँह से मादक आहें निकल रही थीं, जो कमरे के सन्नाटे को तोड़ रही थीं।
उनके इस गुप्त रिश्ते में एक अजीब सा रोमांच था, जो उन्हें हर बार अपनी तरफ खींचता था। यह सिर्फ एक शारीरिक आकर्षण नहीं, बल्कि **शादी के बाद भी जारी इश्क** का एक अनकहा, गहरा अहसास था। रवि के हाथ उसकी कमर पर टिके और फिर धीरे-धीरे नीचे उसकी जांघों के बीच सरकने लगे। सीमा की टाँगें खुद-ब-खुद फैल गईं, जैसे उसे पहले से पता था कि अब क्या होने वाला है। रवि की उंगलियाँ उसकी प्यासी योनि पर पहुँचीं, और एक गहरी सिसकी सीमा के होंठों से निकल पड़ी। उसकी योनि भीगी हुई थी, गरम और इंतज़ार में तड़पती हुई।
रवि ने अब अपने कपड़े उतार दिए, और उसका मजबूत, उत्तेजित लिंग सीमा के सामने खड़ा था। उसने सीमा की आँखों में देखा, और उन आँखों में उसने अपनी ही हवस की आग देखी। सीमा ने रवि को खुद पर खींच लिया। रवि ने धीरे-धीरे अपने लिंग को सीमा की गरमाहट में धकेलना शुरू किया। सीमा ने अपनी कमर ऊपर उठाई, उसे पूरी तरह से अपने अंदर समाने के लिए। जब रवि का पूरा लिंग सीमा के अंदर उतर गया, तो सीमा को लगा जैसे उसके अंदर का हर खालीपन भर गया हो।
रवि ने अपनी कमर हिलाना शुरू किया, धीरे-धीरे, फिर और तेज़। हर धक्के के साथ, सीमा की देह में एक नई आग भड़क उठती थी। उसकी साँसें और आहें एक-दूसरे में घुलमिल गईं। बिस्तर की चादरें उनकी हलचल से कुचल रही थीं, और उनके पसीने की गंध कमरे में फैल गई थी। सीमा ने अपने नाखूनों से रवि की पीठ को खरोंच दिया, उसकी खुशी और दर्द का मिश्रण। रवि ने उसे और कसकर पकड़ा, अपनी गति और तेज़ करते हुए, जब तक कि दोनों चरम सुख की सीमा तक नहीं पहुँच गए।
एक जोरदार चीख के साथ, सीमा का शरीर कांप उठा और वह रवि के ऊपर पूरी तरह से ढीली पड़ गई। रवि भी कुछ ही पलों में, सीमा की गहराई में अपना सारा रस उगलते हुए, हाँफता हुआ उसके ऊपर लेट गया। वे एक-दूसरे से चिपके रहे, उनकी धड़कनें एक ताल में धड़क रही थीं। आधी रात की वह गर्माहट, वह अनकहा रिश्ता, सीमा और रवि के बीच **शादी के बाद भी जारी इश्क** का सबूत था, जो उनके जीवन को एक नई, रोमांचक दिशा दे रहा था। सुबह होने से पहले, रवि चुपचाप अपने कमरे में लौट गया, और सीमा ने अपनी साड़ी ठीक की, पर उसकी आत्मा अब भी उस रात के अनमोल पलों की खुशबू से महक रही थी, और उसे पता था कि अगली रात का इंतज़ार कितना मुश्किल होने वाला है।
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