उसकी रेशमी साड़ी का पल्लू जब हल्के से मेरे हाथ से छूआ, तो एक बिजली सी दौड़ गई मेरे पूरे वजूद में। नेहा की झुकी पलकें और अधखुले होंठ किसी निमंत्रण से कम नहीं थे, जो बरसों की प्यास बुझाने का वादा कर रहे थे। हमारे घर में आज सगाई की रस्म थी, और पूरा परिवार मेहमानों से भरा था, लेकिन मेरी और नेहा की आँखें सिर्फ एक-दूसरे को तलाश रही थीं। एक-दूसरे में छिपी बेताब चाहत, जो अब किसी भी सीमा को लांघने को तैयार थी।
मेहमानों की चहल-पहल से दूर, मैंने मौका पाकर उसका हाथ धीरे से थाम लिया। उसकी उँगलियों का स्पर्श मेरे भीतर एक आग लगा गया। बिना कुछ कहे, सिर्फ आँखों के इशारे से, मैं उसे घर के सबसे एकांत कोने में ले गया – पिछला कमरा, जहाँ पुरानी किताबें और बेतरतीब सामान रखा रहता था। दरवाजा बंद होते ही, कमरे में हल्की सी घुटन और हवा में एक अजीब सी उत्तेजना घुल गई।
मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया। हमारे होंठ एक-दूसरे से मिले, एक ऐसी भूख के साथ जो महीनों से दबी हुई थी, एक-दूसरे के जिस्मों को महसूस करने की चाहत। उसकी साँसें मेरी गर्दन पर गरम हवा छोड़ रही थीं और मेरे हाथों ने उसकी कमर को कसकर पकड़ लिया। उसका गुलाबी लहंगा मेरे स्पर्श से हल्का सा सरका, और उसकी गोरी, चिकनी कमर मेरे हाथों में आ गई। उसने भी मेरे कुर्ते के बटन खोल दिए, मेरे सीने पर उसके नाखूनों का हल्का सा निशान बना, जैसे वह अपनी उत्तेजना को रोकना चाह रही हो।
“संदीप…” उसकी धीमी, मदहोश आवाज़ मेरे कानों में गूँजी।
मैंने उसके होठों को छोड़ते हुए कहा, “कुछ मत कहो नेहा, बस मुझे महसूस होने दो।”
मेरे हाथों ने उसके वक्षों को अपनी हथेली में भर लिया, जैसे कोमल पंखुड़ियाँ हों। मैं उनके उभारों को सहलाता रहा, उसकी साँसें तेज़ होती गईं, और वह अपने सिर को पीछे की ओर लुढ़काकर हल्की आहें भरने लगी। उसकी पैंटी का नरम कपड़ा मैंने एक झटके में हटा दिया, और उसकी जाँघों के बीच की गरमाहट महसूस की। उसकी आँखें बंद थीं, चेहरा लाल और पसीने से भीगा हुआ, और उसके शरीर में एक अजीब सी सिहरन दौड़ रही थी। यह था हमारा पहला कदम, *शादी से पहले का गरमा गरम रोमांस*, जिसकी कल्पना हम दोनों ने न जाने कितनी बार की थी।
मेरी उँगलियाँ उसकी नाभि से नीचे फिसलती गईं, उस जगह पर जहाँ उसकी चाहत का सागर उमड़ रहा था। उसने अपने पैर फैला दिए, एक मौन सहमति के साथ। मैंने देर न करते हुए अपने अंग को उसके भीतर अपनी जगह बनाने दी। एक गहरी आह उसके मुँह से निकली, और उसने अपनी बाँहें कसकर मेरी गर्दन के चारों ओर लपेट लीं। हम दोनों एक ही ताल पर झूलने लगे, हर धक्के के साथ हमारी आत्माएँ एक हो रही थीं। पसीने की बूँदें उसके माथे से टपककर मेरे कंधों पर गिर रही थीं। उसके कूल्हे मेरी हर गति के साथ उठते और गिरते, एक अद्भुत लय में, जो मुझे और अधिक बेताब कर रही थी।
“और तेज़…” वह फुसफुसाई, उसकी आवाज़ में दर्द और आनंद का अनोखा मिश्रण था। मैंने उसकी बात मानी, और हमारी गति और बढ़ गई। उसके गीले बालों की खुश्बू, उसके शरीर की गरमाहट, उसकी हर आह मेरी प्यास बढ़ा रही थी। हमारी साँसें एक हो गईं, और पलक झपकते ही, वह चरम सुख की अनुभूति हुई जिसका स्वाद हम बरसों से चखना चाहते थे। यह था सचमुच *शादी से पहले का गरमा गरम रोमांस*।
हम दोनों एक दूसरे की बाहों में ढीले पड़ गए, पसीने से लथपथ। सन्नाटे में सिर्फ हमारी तेज़ साँसों की आवाज़ें थीं, जो हमारी दिल की धड़कनों की ताल पर बज रही थीं। कुछ देर बाद, उसने मेरे सीने पर सिर रख दिया, एक गहरी साँस ली और फुसफुसाई, “यह रात मैं कभी नहीं भूलूँगी, संदीप।” मैंने उसके बालों को सहलाते हुए कहा, “यह तो बस शुरुआत है, मेरी जान।” शादी की रात का इंतज़ार अब और मुश्किल लगने लगा था, पर इस रात की यादें और उसके शरीर की वो गरम खुश्बू हमारे भीतर एक नया जोश भर चुकी थी। यह था हमारा अनमोल, चोरी-छिपे का *शादी से पहले का गरमा गरम रोमांस*, जो अब हमारी नसों में दौड़ रहा था, और हमने जाना कि हमारी दुनिया हमेशा के लिए बदल चुकी थी।
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