राहुल के कमरे का दरवाज़ा भीतर से बंद होते ही, प्रिया की साँसें तेज़ हो गईं। उसकी आँखें सीधे राहुल की मदहोश आँखों से मिलीं, और उस पल दोनों की धड़कनें एक ताल में धड़कने लगीं। शादी को बस कुछ ही दिन बाकी थे, और यह उनके **शादी से पहले का गरमा गरम रोमांस** का पहला ऐसा एकांत पल था, जहाँ कोई रोक-टोक नहीं थी।
राहुल ने धीरे से दरवाज़ा बंद कर कुंडी लगाई, और फिर धीमी चाल से प्रिया की ओर बढ़ा। प्रिया अपनी पलकों को झुकाए खड़ी थी, लेकिन उसके पूरे बदन में एक मीठी-सी सिहरन दौड़ रही थी। राहुल ने उसके करीब आकर, उसकी कमर पर धीरे से हाथ रखा। प्रिया का बदन बिजली के झटके सा सिहर उठा। उसने अपनी आँखें उठाईं, और इस बार राहुल की आँखों में इंतज़ार और अदम्य वासना साफ झलक रही थी। “प्रिया…” राहुल की आवाज़ भारी और धीमी थी।
“राहुल…” प्रिया के होंठों से बस एक फुसफुसाहट निकली।
राहुल ने बिना एक पल गंवाए, प्रिया को अपनी बाहों में भर लिया। उनके होंठ एक-दूसरे पर टूट पड़े, जैसे सदियों की प्यास बुझाने को बेताब हों। यह कोई कोमल चुंबन नहीं था; यह एक जुनून भरा, गहराई तक उतरने वाला चुंबन था, जिसमें ज़बानें आपस में उलझ रही थीं, एक-दूसरे का स्वाद चख रही थीं। प्रिया के हाथों ने राहुल की पीठ को कसकर पकड़ लिया, और वह अपनी एड़ियों पर उठकर उसके और करीब आने लगी। राहुल के हाथ उसकी कमर से होते हुए, उसकी साड़ी के पल्लू के नीचे से उसकी नंगी पीठ पर सरकने लगे। उसके नर्म स्पर्श से प्रिया के बदन में आग सी लगने लगी।
राहुल ने उसे धीरे से उठाकर अपनी बाहों में लिया और पलंग की ओर बढ़ा। प्रिया उसकी छाती से चिपकी हुई थी, उसके साँसों की गरमी उसे मदहोश कर रही थी। पलंग पर लिटाते ही राहुल उसके ऊपर झुक गया। उसके भारी बदन का वज़न प्रिया को और भी उत्तेजित कर रहा था। राहुल के होंठ प्रिया की गर्दन पर उतर गए, और वह हल्के-हल्के चुंबन से उसे सहलाने लगा। प्रिया के मुँह से दर्द भरी आहें निकलने लगीं। उसकी साँसें अनियंत्रित हो गईं, और उसके वक्ष तेज़ी से ऊपर-नीचे होने लगे।
राहुल ने धीरे से उसकी साड़ी खोली, और फिर उसके ब्लाउज़ के हुक खोल दिए। उसके गर्म हाथ जैसे ही प्रिया के मुलायम वक्ष से टकराए, प्रिया की आँखों से एक तीव्र सुख की लहर गुज़र गई। “उफ्फ…” उसके मुँह से बस इतना ही निकला। राहुल ने उसके वक्ष को अपने हाथों में भर लिया, उन्हें सहलाते हुए, उनके गुलाबी निप्पलों को अपने अंगूठों से रगड़ते हुए। प्रिया ने अपनी कमर उठाई, राहुल को और गहरा स्पर्श देने को बेताब। राहुल ने एक निप्पल को अपने मुँह में लिया और चूसने लगा, जैसे कोई प्यासा बच्चा अपनी माँ का दूध पी रहा हो। प्रिया के बदन में एक अजीब सी ललक दौड़ गई, और वह जोर-जोर से राहुल का नाम पुकारने लगी।
उसके बाद, एक-एक करके कपड़े ज़मीन पर गिरने लगे। दोनों अब एक-दूसरे के सामने नग्न थे, उनके बदन की आग एक-दूसरे को खींच रही थी। राहुल ने प्रिया की जाँघों के बीच हाथ फेरा। प्रिया पहले थोड़ी झिझकी, लेकिन फिर खुद ही अपनी टांगें फैला दीं। राहुल की उँगलियाँ उसके भीतर के गहरे गीलेपन को महसूस करने लगीं। प्रिया दर्द और सुख के मिश्रण से काँप उठी। राहुल ने उसे अपनी ओर खींचा, और फिर धीरे-धीरे अपने बदन को प्रिया के भीतर उतारा।
प्रिया के मुँह से एक तीव्र चीख निकली, जो तुरंत राहुल के होंठों में दब गई। वे दोनों एक-दूसरे में समा गए थे, उनके बदन एक ही लय में गति कर रहे थे। राहुल की हर धकेल, प्रिया को गहरा सुख दे रही थी। वह अपनी कमर उठाकर राहुल की गति का साथ दे रही थी। कमरा उनकी आहों, फुसफुसाहटों और बदन के टकराने की आवाज़ों से गूँज रहा था। यह **शादी से पहले का गरमा गरम रोमांस** था, जो अब चरम पर पहुँच चुका था। दोनों पसीने से भीगे हुए थे, लेकिन उनकी हवस शांत होने का नाम नहीं ले रही थी।
कई देर तक उनका यह बेकाबू मिलन चलता रहा, जब तक कि दोनों एक साथ चरम सुख की गहरी खाई में नहीं गिर गए। प्रिया ने अपनी बाँहों से राहुल को कसकर जकड़ लिया, और उसकी साँसें अभी भी तेज़ी से चल रही थीं। राहुल उसके ऊपर ही निढाल पड़ा था, उसके दिल की धड़कन प्रिया के कान में साफ सुनाई दे रही थी। उनके बदन शांत थे, लेकिन उनके भीतर अभी भी उस तीव्र वासना की तपिश महसूस हो रही थी। एक गहरी तृप्ति, एक मीठी थकान उनके पूरे वजूद में समा गई थी। शादी से पहले की इस चोरी-छुपे मुलाकात ने उन्हें हमेशा के लिए एक-दूसरे के करीब ला दिया था, और वे जानते थे कि उनकी आने वाली ज़िंदगी इसी जुनून की आग से दहकती रहेगी। वह रात बस एक शुरुआत थी, उनके अनंत प्रेम और वासना की यात्रा की।
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