आज प्रिया के होंठों पर एक अनजान प्यास थिरक रही थी, एक ऐसी प्यास जिसे उसका पति कभी बुझा न सका था। शाम ढल चुकी थी और शहर की चहल-पहल कम हो रही थी, पर प्रिया के दिल की धड़कनें तेज़ होती जा रही थीं। उसकी आँखों में एक नई चमक थी, और चाल में एक अनजाना आकर्षण। आज वो किसी और की नहीं, सिर्फ़ अपनी इच्छाओं की गुलाम थी।
उसकी शादीशुदा ज़िंदगी एक नीरस किताब की तरह थी, जिसमें प्रेम और वासना के पृष्ठ कब के खाली हो चुके थे। फिर रोहन उसकी ज़िंदगी में एक तूफ़ान की तरह आया। पड़ोस में नया आया रोहन, अपनी मज़बूत काया और गहरी आँखों से प्रिया के दिल में एक हलचल मचा गया था। उनकी मुलाक़ातें पहले तो अजनबी थीं, फिर दोस्ताना हुईं, और अब एक ऐसी अगम्य खाई पर खड़ी थीं जहाँ से वापसी मुमकिन न थी। आज वो रोहन के अपार्टमेंट में जा रही थी, अपनी सारी मर्यादाओं को पीछे छोड़कर। यह सिर्फ़ एक मुलाकात नहीं, एक **शादीशुदा औरत का पराये मर्द से अफेयर** की शुरुआत थी।
दरवाज़ा खुला, और सामने रोहन खड़ा था। उसकी आँखों में वही बेताबी थी जो प्रिया के भीतर थी। उसने धीरे से दरवाज़ा बंद किया, और रोहन ने उसे अपनी बाहों में भर लिया। प्रिया की साँसें तेज़ हो चुकी थीं, उसके तन-बदन में आग लगी हुई थी। रोहन के होंठ उसके होंठों पर आए, एक गहरा, जोशीला चुंबन। उनकी जीभें एक-दूसरे में उलझ गईं, जैसे दो प्यासे प्रेमी बरसों बाद मिले हों। प्रिया का जिस्म ढीला पड़ गया, और वह रोहन के स्पर्श में पूरी तरह खो गई।
रोहन ने प्रिया को गोदी में उठा लिया और बेडरूम की ओर चला। प्रिया ने अपनी टाँगें उसकी कमर पर कस लीं, उसकी सारी शर्म और संकोच अब पिघल चुका था। उसने प्रिया को बिस्तर पर उतारा और उसके गुलाबी होंठों को फिर से चूमने लगा। प्रिया की साड़ी का पल्लू कब सरक गया, उसे पता भी न चला। रोहन की उंगलियाँ उसकी कमर पर साँप-सी फिसल रही थीं, और प्रिया के पूरे शरीर में सनसनी दौड़ रही थी।
उसने प्रिया के ब्लाउज के बटन खोलने शुरू किए, हर एक बटन के खुलने के साथ प्रिया की धड़कनें तेज़ होती गईं। जब ब्लाउज उतर गया, तो उसके सुडौल स्तन रोहन के सामने अनावृत हो गए। रोहन की आँखों में वासना की आग धधक उठी। उसने अपनी हथेली से एक स्तन को सहलाया और दूसरे को अपने मुँह में भर लिया। प्रिया के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली आह निकली। रोहन की जीभ उसकी चूचियों के इर्द-गिर्द घूम रही थी, और प्रिया अपने हाथों से उसके बालों को कसकर पकड़ रही थी।
धीरे-धीरे, उनके सारे कपड़े उतर चुके थे। प्रिया का गोरा बदन रोहन के सामने था, हर वक्र, हर उभार, वासना से धड़कता हुआ। रोहन ने उसके पैरों के बीच अपनी उंगलियों को ले जाकर सहलाया। प्रिया की आँखों से आहें निकलने लगीं। जब रोहन ने अपनी उंगलियों से उसकी सबसे अंतरंग जगह को छुआ, तो प्रिया के शरीर में एक बिजली-सी दौड़ गई। वह अब और इंतज़ार नहीं कर सकती थी।
रोहन ने प्रिया को अपनी ओर खींचा और अपनी पैंट खोली। प्रिया की आँखें रोहन के खड़े हुए सदस्य पर टिक गईं। वह मज़बूत और बेताब दिख रहा था। रोहन ने प्रिया की टाँगों को उठाया और खुद को उसके भीतर उतारा। पहली चुभन के साथ ही एक गहरी राहत मिली। प्रिया ने अपनी आँखें मूँद लीं, और उसके भीतर की हर कोशिका पराये मर्द के इस स्पर्श में डूब गई।
रोहन ने अपनी कमर की गति तेज़ की। हर धक्के के साथ, एक नई लहर प्रिया के पूरे वजूद में दौड़ रही थी। प्रिया की आवाज़ अब चीखों और आहों में बदल चुकी थी, जो रोहन के कानों में संगीत की तरह बज रही थी। वे दोनों एक-दूसरे में खोए हुए थे, दुनिया-जहान से बेखबर। यह पल, यह स्पर्श, यह मिलन, उसकी शादीशुदा ज़िंदगी के सारे खालीपन को भर रहा था। यह सिर्फ़ शारीरिक नहीं, बल्कि आत्मिक मुक्ति भी थी। प्रिया पूरी तरह से अपने आप को रोहन को सौंप चुकी थी, एक **शादीशुदा औरत का पराये मर्द से अफेयर** अपनी चरम सीमा पर था।
कुछ देर बाद, जब दोनों का जिस्म शांत हुआ, तो वे एक-दूसरे की बाहों में लिपटे हुए थे। प्रिया ने रोहन के सीने पर सर रखा और महसूस किया कि आज उसे वो सब मिल गया था जिसकी उसे तलाश थी। उसका शरीर और आत्मा तृप्त थी। उसने ऊपर देखा, रोहन ने मुस्कुराकर उसकी आँखों में देखा। आज की रात बस एक शुरुआत थी, एक ऐसे प्रेम कहानी की, एक ऐसे गुप्त संबंध की जो अब उसकी पहचान बन चुका था। प्रिया को पता था कि यह रास्ता जोखिम भरा था, पर इस वर्जित प्रेम का आकर्षण उसे अब कभी नहीं छोड़ने वाला था। यह एक **शादीशुदा औरत का पराये मर्द से अफेयर** था, और प्रिया ने तय कर लिया था कि वह इसे जीना चाहती थी, हर पल, हर साँस।
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