आज जब दीदी गाँव गई थीं, संगीता को पता था कि यह रात कितनी अलग होने वाली है। राकेश जीजा की नज़रें, जो हमेशा से उस पर कुछ ज़्यादा ही ठहरती थीं, आज खुली छूट पाकर और भी बेताब थीं। संगीता जानती थी कि उसके जीजा की आँखों में सिर्फ़ हवस नहीं, एक गहरी, अनकही चाहत भी है, जिसके लिए वह खुद भी कम प्यासी नहीं थी। किचन में पानी का गिलास लेने आई संगीता की साड़ी का पल्लू सरक गया और उसकी गोरी पीठ पर राकेश की नज़रें जैसे जम सी गईं। “पानी चाहिए, संगीता?” राकेश की आवाज़ में एक अजीब सा ठहराव था, जो सीधा संगीता के दिल में उतर गया। उसकी पीठ पर जीजा की उँगलियों का हल्का सा स्पर्श, एक बिजली की लहर दौड़ा गया।
शाम होते-होते घर में अजीब सा सन्नाटा छा गया। राकेश टीवी देख रहे थे, पर उनकी आँखें बार-बार संगीता की ओर उठ रही थीं, जो अपने कमरे में किताब पढ़ने का बहाना कर रही थी। दिल की धड़कनें बेतहाशा तेज़ थीं। आधी रात को जब घर में पूरी तरह से शांति छा गई, तो संगीता ने धीरे से अपने कमरे का दरवाज़ा खोला और राकेश के कमरे की तरफ़ बढ़ी। दरवाज़ा हल्का सा खुला था। भीतर से एक आहट भी नहीं आ रही थी। उसने हिम्मत कर दरवाज़े को और खोला और देखा राकेश पलंग पर लेटे हुए थे, उनकी नज़रें छत पर थीं, जैसे किसी गहरी सोच में डूबे हों। संगीता ने दबे पाँव अंदर क़दम रखा।
“जीजा जी…” संगीता की फुसफुसाहट ने राकेश को चौंका दिया। वह उठे और संगीता को अपने सामने देखकर उनकी आँखें चमक उठीं। बिना एक पल गंवाए, राकेश ने संगीता को अपनी बाहों में खींच लिया। उनके होंठ एक-दूसरे पर ऐसे टूट पड़े, जैसे सदियों से प्यासे हों। यह सिर्फ़ एक चुंबन नहीं था, यह **साली जीजा का चोरी छिपे प्यार** की पहली ज्वाला थी जो अब धधक उठी थी। संगीता ने अपनी बाँहें राकेश के गले में कस लीं और जवाब में और भी ज़ोर से उनका साथ दिया। राकेश की उंगलियाँ उसकी पीठ पर सरकती हुई, साड़ी के आँचल को हटाते हुए, उसके गर्म, कोमल स्तनों तक पहुँच गईं।
राकेश ने उसकी साड़ी को कंधे से सरकाकर ज़मीन पर गिरा दिया। फिर ब्लाउज़ के हुक खोलते हुए, उन्होंने संगीता के भारी, कसकर बँधे स्तनों को आज़ाद कर दिया। गुलाबी निप्पल उनकी उंगलियों के स्पर्श से और भी कड़े हो गए। “उफ़्फ़…” संगीता के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली आवाज़ निकली जब राकेश ने एक स्तन को अपने मुँह में भर लिया और उसे ज़ोर से चूसने लगे। संगीता का बदन ऐंठने लगा। वह राकेश के बालों में अपनी उंगलियाँ फँसाकर उनके सिर को और कसने लगी, ताकि उनका मुँह उसके स्तन पर और कस जाए। राकेश का दूसरा हाथ उसकी कमर पर सरकते हुए धीरे-धीरे पेट से होता हुआ, सलवार के नाड़े पर पहुँच गया।
सलवार और पेंटी एक पल में ज़मीन पर थी। संगीता की जांघों के बीच की नमी और गर्मी राकेश को साफ़ महसूस हो रही थी। उन्होंने संगीता को उठाया और सीधा पलंग पर लिटा दिया। राकेश ने भी अपनी धोती और बनियान उतार फेंकी। उनका मजबूत, भारी लिंग उत्तेजना से तना हुआ था, जो संगीता की प्यासी आँखों में एक हवस भर गया। “और नहीं रुका जाता, जीजा जी,” संगीता ने हाँफते हुए कहा। राकेश मुस्कुराए और संगीता की गीली योनि पर अपने लिंग का सिरा रखा। एक गहरा धक्का और राकेश का पूरा लिंग संगीता के भीतर समा गया। “आहहहह…” संगीता की चीख एक मीठी सिसकी में बदल गई।
राकेश ने तालबद्ध ढंग से अपनी कमर हिलाई। संगीता ने अपनी टाँगें राकेश की कमर पर कस लीं और हर झटके के साथ और गहरा होने लगी। कमरे में सिर्फ़ उनके जिस्मों के टकराने की आवाज़ और संगीता की मदहोश कर देने वाली सिसकियाँ गूँज रही थीं। पसीना दोनों के बदन से टपक रहा था। हर झटका उन्हें **चोरी छिपे प्यार** की गहराई में ले जा रहा था, जहाँ कोई मर्यादा नहीं थी, बस हवस और चाहत का नंगा नाच था। संगीता की योनि का कसाव राकेश को पागल कर रहा था। कुछ पल बाद, राकेश ने एक आख़िरी गहरा धक्का दिया और संगीता की योनि में गरम वीर्य की धार छोड़ दी। संगीता भी ऐंठी और एक तेज़ कंपकंपी के साथ चरम सुख को प्राप्त हुई।
दोनों थककर एक-दूसरे से लिपट गए, उनकी साँसें तेज़ थीं। राकेश ने संगीता के माथे पर एक नम चुंबन दिया। संगीता ने राकेश के सीने पर सर रख दिया, और उसके दिल की धड़कनें सुनती रही। उन्हें पता था कि यह सिर्फ़ एक रात की बात नहीं थी। यह **साली जीजा का चोरी छिपे प्यार** अब उनके रिश्तों की एक ऐसी अटूट कड़ी बन चुका था, जो हमेशा उन्हें एक-दूसरे की ओर खींचता रहेगा। बाहर चाँदनी रात थी और अंदर दो जिस्म एक गहरी, मीठी संतुष्टि में डूबे हुए थे, अगले मौक़े की तलाश में।
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