जब आधी रात को प्रिया प्यास बुझाने किचन में आई, तो उसे नहीं पता था कि उसकी प्यास कुछ और ही तरीके से बुझने वाली है। दीदी रीना अपने मायके गई हुई थी, और घर में सिर्फ जीजा राजीव और वो अकेली थी। दिनभर जीजा की कामुक नज़रें उसे महसूस होती रहीं थीं, और प्रिया खुद भी इस अनचाही, अनकही हवस में डूबी थी। उसके गुलाबी नाइट गाउन में ढका सुडौल बदन हर पल राजीव को उकसा रहा था, और प्रिया जानती थी।
किचन की ठंडी हवा में जैसे ही प्रिया ने पानी का गिलास उठाया, पीछे से एक गर्म हथेली उसकी कमर पर आ टिकी। प्रिया सिहर उठी, दिल की धड़कनें बेतहाशा तेज़ हो गईं। उसने मुड़कर देखा, तो राजीव ठीक उसके पीछे खड़े थे, उनकी आँखों में एक गहरी, उत्तेजित चमक थी। “क्या हुआ साली साहिबा? इतनी रात को?” उनकी आवाज़ में नशा था।
“प्यास लगी थी, जीजा जी,” प्रिया ने हिचकिचाते हुए कहा। उसकी आवाज़ लड़खड़ा रही थी।
“अकेले में डर नहीं लगता?” राजीव ने और नज़दीक आते हुए पूछा, उनकी सांसें प्रिया की गर्दन पर महसूस हो रही थीं।
प्रिया ने अपनी आँखें बंद कर लीं। यह वो पल था जिसका वो महीनों से इंतज़ार कर रही थी, इस **साली जीजा का चोरी छिपे प्यार** का आग़ाज़। “आपके होते हुए किस बात का डर?” उसने फुसफुसाते हुए कहा।
यह सुनते ही राजीव की पकड़ और मज़बूत हो गई। उन्होंने प्रिया को अपनी बाहों में भर लिया, उसके होठों पर अपने होंठ रख दिए। यह कोई साधारण चुम्बन नहीं था; यह भूख, हवस और एक लम्बे इंतज़ार का संगम था। प्रिया ने भी खुद को पूरी तरह छोड़ दिया, अपनी बाहें राजीव की गर्दन में डाल दीं और उनके बालों को अपनी उंगलियों से सहलाने लगी। उनके होठों का वो मीठा ज़हर प्रिया के पूरे बदन में आग लगा रहा था।
राजीव ने प्रिया को गोद में उठा लिया और धीरे-धीरे उसे अपने कमरे की ओर ले गए। कमरे में आते ही उन्होंने प्रिया को बिस्तर पर लिटा दिया और उसके ऊपर झुक गए। नाइट गाउन को एक झटके में उतार दिया गया, और प्रिया का सुडौल बदन राजीव के सामने पूरी नग्नता में था। उसके गुलाबी निप्पल कठोर होकर राजीव को बुला रहे थे। राजीव ने धीरे-धीरे उन्हें अपने मुँह में लिया, और प्रिया की सिसकारियाँ कमरे में गूँज उठीं। “आह… जीजा जी… और… और तेज़…”
राजीव ने अपनी उंगलियाँ प्रिया की नाभि से होते हुए उसकी जाँघों के बीच ले गए। प्रिया की योनि नम हो चुकी थी, उनकी उंगलियों का स्पर्श प्रिया को स्वर्ग में पहुंचा रहा था। राजीव ने एक उंगली से प्रिया की कामोत्तेजना के बिंदु को धीरे-धीरे सहलाना शुरू किया, और प्रिया का शरीर बल खाने लगा। उसकी आँखें बंद थीं, होंठ खुले थे, और वो राजीव का नाम फुसफुसा रही थी।
अब और इंतज़ार मुश्किल था। राजीव ने अपने कपड़े उतारे और प्रिया के ऊपर आ गए। उनके लंड को देखकर प्रिया की आँखें फैल गईं। यह उस हर सपने से बड़ा और मज़बूत था जो उसने देखा था। “धीरे से… जीजा जी…” प्रिया ने कहा।
राजीव ने एक गहरी साँस ली और धीरे-धीरे अपने लंड को प्रिया की योनि में उतारा। प्रिया ने दर्द और सुख का एक मिला-जुला अहसास किया। उसकी आँखें आँसुओं से भर आईं, लेकिन होंठों पर मुस्कान थी। जब राजीव का पूरा लंड प्रिया के अंदर समा गया, तो उसने एक गहरी आह भरी। “वाह… जीजा जी… क्या मज़ा है…”
राजीव ने धीरे-धीरे अपनी कमर हिलाई, हर धक्के के साथ प्रिया की योनि में गहराई तक उतरते गए। प्रिया की आवाज़ें, उसकी सिसकारियाँ, उसकी उत्तेजित साँसें राजीव को और पागल बना रही थीं। दोनों एक दूसरे में खो चुके थे, इस **साली जीजा का चोरी छिपे प्यार** की गर्माहट में पिघल रहे थे। बिस्तर की चरमराती आवाज़ और उनके शरीरों का मिलन कमरे में एक अलग ही धुन बजा रहा था। प्रिया अपनी जाँघों को ऊपर उठाकर राजीव को और अंदर खींच रही थी, हर धक्के का पूरा मज़ा ले रही थी।
कुछ ही देर में दोनों अपने चरम पर पहुंच गए। प्रिया ने राजीव को कसकर जकड़ लिया, और उसकी योनि से एक गर्म तरल राजीव के लंड पर बह निकला। राजीव भी प्रिया के अंदर ही झड़ गए, दोनों पसीने से तरबतर एक दूसरे की बाहों में ढीले पड़ गए।
वे थोड़ी देर वहीं लेटे रहे, उनकी साँसें तेज़ थीं, लेकिन दिल को सुकून था। एक अनकही संतुष्टि उनके चेहरों पर तैर रही थी। राजीव ने प्रिया के माथे को चूमा। “ये राज़ हम दोनों के बीच ही रहेगा, साली साहिबा।”
प्रिया ने मुस्कुराते हुए हामी भरी। यह रात सिर्फ एक शुरुआत थी, उनके **साली जीजा का चोरी छिपे प्यार** की एक नई और रोमांचक दास्तान की। आने वाली रातों में और भी बहुत कुछ बाकी था।
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