कमरे में क़दम रखते ही प्रिया की साँसें तेज़ हो गईं, सामने रोहन उसकी इंतज़ार में पलकें बिछाए बैठा था। फूलों की मादक सुगंध और मंद रोशनी ने माहौल को और भी रूमानी बना दिया था। भारी लहँगे और ज़ेवर के बोझ तले भी प्रिया का शरीर एक अजीब सी सिहरन महसूस कर रहा था। रोहन ने धीरे से उठकर दरवाज़ा बंद किया और फिर अपनी नवविवाहित दुल्हन की ओर बढ़ा, उसकी आँखों में एक गहरी, प्यासी चमक थी।
“आओ, प्रिया,” उसने धीमे, कामुक स्वर में कहा, और प्रिया का दिल एक बार फिर ज़ोर से धड़क उठा। उसने घूँघट की आड़ से रोहन को देखा – उसका गठीला बदन, आँखों में प्यार और अधरों पर हल्की मुस्कान। रोहन ने धीरे से प्रिया के पास आकर उसका हाथ थामा। उसकी उंगलियों का स्पर्श प्रिया के पूरे शरीर में बिजली-सा दौड़ गया। उसने प्यार से प्रिया का घूँघट उठाया, और प्रिया की गुलाबी गालों पर शर्म की लाली फ़ैल गई। रोहन की नज़रें प्रिया के चेहरे पर टिकी थीं, फिर धीरे-धीरे उसके सुर्ख़ होंठों पर, उसकी गहरी आँखों में और फिर नीचे उसके भरे-भरे वक्ष पर। प्रिया ने पलकें झुका लीं, अपने हृदय की धड़कनों को सुना, यह रात थी ‘सुहागरात की अनकही बातें हिंदी’ को जानने की, महसूस करने की।
“तुम बहुत ख़ूबसूरत लग रही हो,” रोहन ने फुसफुसाते हुए कहा, और प्रिया के माथे को चूमा। फिर उसने धीरे-धीरे प्रिया के गहने उतारने शुरू किए – कान के झुमके, गले का हार, हाथों की चूड़ियाँ। हर एक चीज़ के उतरने के साथ प्रिया का शरीर और भी हल्का और कामुक महसूस कर रहा था। जब लहँगे की डोरी खोलने की बारी आई, प्रिया ने अनजाने में अपना हाथ रोक लिया, पर रोहन की उंगलियों ने धीरे से उसे हटाकर डोरी खोली। लहँगा ज़मीन पर गिरा और प्रिया अब सिर्फ़ एक पतले ब्लाउज़ और पेटीकोट में थी, उसकी साँसें तेज़ हो गईं।
रोहन ने बिना देर किए प्रिया को अपनी बाहों में भर लिया, उसके रेशमी बालों में अपनी उंगलियाँ फेरते हुए उसके नर्म होंठों पर अपने होंठ रख दिए। यह पहला स्पर्श था, पहला चुम्बन, जो सदियों की प्यास बुझाने को बेताब था। प्रिया ने पहले तो हिचकिचाई, फिर धीरे-धीरे अपनी आँखें बंद कर लीं और रोहन का साथ देने लगी। उसकी जीभ रोहन की जीभ से मिली, एक मीठी जंग छिड़ गई। रोहन के हाथ अब प्रिया की कमर पर थे, उसे कसकर अपनी ओर खींचते हुए, उसके वक्ष रोहन की चौड़ी छाती से दब रहे थे।
रोहन ने प्रिया को गोद में उठाया और मखमली बिस्तर पर लिटा दिया। उसने प्रिया के ब्लाउज़ के हुक खोले और उसे भी उतार दिया। अब प्रिया की नग्न छाती, उसके उभरे हुए, गुलाबी निप्पल रोहन की आँखों के सामने थे। रोहन ने एक निप्पल को अपने मुँह में लेकर चूसा, और प्रिया के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली आह निकली। “आह्ह्ह… रोहन!” वह अपनी कमर ऊपर उठाती हुई बोली। रोहन ने दोनों स्तनों को बारी-बारी से चूमा, चाटा और दबाया, प्रिया का शरीर अब आग की तरह जल रहा था। वह जानता था कि आज की रात सिर्फ रस्मों की नहीं, बल्कि ‘सुहागरात की अनकही बातें हिंदी’ को एक-दूसरे की आँखों में पढ़ने की थी।
धीरे-धीरे रोहन नीचे की ओर बढ़ा, प्रिया के पेटीकोट को भी उतार दिया। अब प्रिया पूरी तरह नग्न थी, उसकी जंघाओं के बीच का वह गुप्त स्थान, गुलाबी और फूला हुआ, रोहन की नज़रों में था। रोहन ने अपनी उंगलियों से उस कोमल पंखुड़ी को सहलाया, प्रिया अपने होंठ भींचती हुई तड़प उठी। “बस… और नहीं!” वह फुसफुसाई, पर उसकी आँखों में गहरी प्यास थी। रोहन ने उसे ऊपर देखा, उसकी आँखों में प्यार और आज्ञा का मिश्रण था।
“बस अब तो शुरुआत है मेरी जान,” कहते हुए रोहन ने अपनी पैंट उतारी, उसका कठोर, सीधा लिंग अब प्रिया के सामने था, नसें फड़क रही थीं। प्रिया ने शरम से आँखें बंद कर लीं, पर उसका शरीर उत्तेजना से काँप रहा था। रोहन ने धीरे से प्रिया की टाँगों को फैलाया और अपने पुरुषत्व को उसकी योनि के द्वार पर रखा। एक गहरी साँस लेकर, उसने धीरे-धीरे भीतर धकेलना शुरू किया। प्रिया के मुँह से एक तीखी चीख़ निकली, यह दर्द और सुख का मिलाजुला एहसास था। रोहन ने उसे कसकर गले लगाया, उसके माथे को चूमा और धीमे-धीमे अंदर-बाहर होने लगा।
शुरुआत में थोड़ा दर्द हुआ, पर जल्द ही वह एक मीठे, गहरे सुख में बदल गया। प्रिया अब अपनी कमर उठाकर रोहन का साथ दे रही थी, उसकी आँखें खुली थीं और वह रोहन की आँखों में देख रही थी। उनकी साँसें एक हुईं, शरीर एक हुए, और ‘सुहागरात की अनकही बातें हिंदी’ अब सिर्फ कहने-सुनने की नहीं, बल्कि जीने की सच्चाई बन चुकी थीं। कमरे में सिर्फ उनके शरीर के टकराने की आवाज़ें, प्रिया की मदहोश कर देने वाली आहें और रोहन की गहरी साँसों का संगीत गूँज रहा था। हर धक्के के साथ वे एक-दूसरे में और गहरे समा रहे थे।
कई मिनटों के इस मदहोश कर देने वाले नृत्य के बाद, प्रिया का शरीर कंपकंपाया, उसके तलवे ऐंठने लगे, और वह अपने चरम पर पहुँच गई। “आह्ह्ह्ह्ह… रोहन!” वह चिल्लाई, रोहन ने भी अपनी सारी शक्ति लगाकर एक अंतिम गहरा धक्का दिया और प्रिया के भीतर ही अपने प्रेम का अमृत उड़ेल दिया। दोनों हाँफते हुए एक-दूसरे से लिपट गए, पसीने से भीगे, पर अंदर से पूरी तरह तृप्त। उनकी धड़कनें धीरे-धीरे सामान्य हो रही थीं। रोहन ने प्रिया के माथे को चूमा और कहा, “आज की रात सिर्फ़ हमारी है, और हर रात ऐसी ही होगी।” प्रिया ने उसकी छाती पर सिर रखा और एक गहरी, संतुष्टि भरी साँस ली। यह सुहागरात थी, उनकी बेबाक, अनकही प्रेम कहानी की पहली रात।
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