दरवाज़े की कुंडी लगते ही प्रिया की साँसें तेज़ हो गईं, रोहन की बाँहों में आने को वो तड़प उठी थी। इस आलीशान होटल रूम में उनकी यह रात किसी सपने से कम नहीं थी, एक ऐसी रात जिसका इंतज़ार उन्हें कई दिनों से था। रोहन ने घूमकर मुस्कुराते हुए प्रिया को देखा, उसकी आँखों में वही बेताब ललक थी जो प्रिया के दिल में भी उफान मार रही थी। “तो आ ही गए हम अपनी जन्नत में,” रोहन ने फुसफुसाते हुए कहा, और एक पल भी गँवाए बिना प्रिया को अपनी बाहों में खींच लिया।
प्रिया की कमर पर रोहन की मज़बूत उँगलियाँ कस गईं और उनके अधर एक-दूसरे से मिल गए। यह सिर्फ़ एक चुंबन नहीं था, यह प्यासी आत्माओं का मिलन था, जो एक-दूसरे में खो जाना चाहते थे। प्रिया की कोमल ज़बान रोहन के मुँह में अपनी राह तलाश रही थी और रोहन की ज़बान उस खोज का जवाब दे रही थी। उनके होंठों का ये नृत्य इतना उत्तेजक था कि प्रिया ने रोहन के बालों को अपनी मुट्ठी में भींच लिया। उनकी साँसें तेज़ हो रही थीं, और हवा में सिर्फ़ उनकी धड़कनों का शोर गूँज रहा था।
यह होटल रूम में हॉट कपल की रात बस शुरू हुई थी। रोहन ने धीरे से प्रिया को बिस्तर की ओर धकेला। नरम गद्दों पर गिरते ही प्रिया ने एक मीठी सी चीख़ निकाली। रोहन उसके ऊपर झुक गया, उसकी आँखें प्रिया के गुलाबी होंठों और उभरते स्तनों पर टिकी थीं। उसने प्रिया के सलवार कमीज़ का दुपट्टा हटाया, फिर धीरे से उसके कुर्ते के बटन खोलने लगा। हर बटन के खुलने के साथ प्रिया की त्वचा उजागर होती जा रही थी, और कमरे का तापमान बढ़ता जा रहा था। प्रिया ने भी बिना किसी झिझक के रोहन की शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए। उनके कपड़े एक-एक करके हटते गए और वे दोनों एक-दूसरे की नंगी त्वचा को महसूस करने को बेताब हो उठे।
प्रिया के तन से कपड़े उतरते ही रोहन की आँखें उसके सुडौल वक्षों पर ठहर गईं। उसके स्तन दृढ़ और गोल थे, जिनके गुलाबी निप्पल रोहन के स्पर्श के लिए तरस रहे थे। रोहन ने अपना मुँह झुकाया और एक निप्पल को अपने होंठों में भर लिया, उसे धीरे-धीरे चूसने लगा। प्रिया के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं, उसकी उंगलियाँ रोहन के बालों में उलझ गईं। “आह… रोहन…” वो दर्द और आनंद के मिश्रण में कराह उठी। रोहन ने दूसरे स्तन पर भी वही जादू किया, और प्रिया के पूरे शरीर में बिजली सी दौड़ गई। वह मदहोशी की चरम सीमा पर थी।
रोहन प्रिया के पूरे शरीर पर अपने होंठों से निशान छोड़ता रहा, उसके पेट से होता हुआ वो उसकी नाभि पर आ रुका, जहाँ उसने अपनी ज़बान से एक शरारती खेल खेला। प्रिया का शरीर अँगड़ाई ले रहा था, उसकी कामुकता चरम पर थी। उसने अपनी टाँगें फैलाईं, रोहन को अपने और करीब आने का निमंत्रण दे रही थी। रोहन ने अपनी उँगली प्रिया की योनि की ओर बढ़ाई, जहाँ की नमी उसके पूरे अस्तित्व को झकझोर रही थी। उसने अपनी एक उँगली अंदर डाली, फिर दूसरी, और प्रिया ने अपनी कमर उठानी शुरू कर दी।
“अब और इंतज़ार नहीं कर सकती, रोहन,” प्रिया ने फुसफुसाते हुए कहा, उसकी आवाज़ में एक तीव्र आग्रह था। रोहन ने मुस्कुराते हुए अपनी जीन्स उतारी, उसका मर्दाना अंग पूरी तरह उत्तेजित और प्रिया में समाने को बेताब था। प्रिया ने अपनी आँखें बंद कर लीं और रोहन को अपने ऊपर महसूस किया। रोहन ने धीरे-धीरे अपने लिंग को प्रिया की योनि में धकेला। पहली बार में हल्की सी अड़चन हुई, पर फिर प्रिया के गर्म और गीले आलिंगन ने उसे पूरी तरह से समा लिया।
वे दोनों एक लय में हिलने लगे, शरीर से शरीर टकराने की आवाज़ें और उनके सुखभरे आर्तनाद पूरे कमरे में गूँज रहे थे। रोहन की हर धक्के के साथ प्रिया आसमान छू रही थी, और प्रिया की हर अँगड़ाई रोहन को और भी बेकाबू कर रही थी। उनकी वासना की अग्नि इतनी तीव्र थी कि उन्हें अपने आसपास की कोई सुध नहीं थी। यह सचमुच होटल रूम में हॉट कपल की रात थी, उनकी कामुकता चरम पर थी, और वे दोनों एक-दूसरे में पूरी तरह खो चुके थे। कुछ ही पलों में, दोनों के शरीर एक साथ ऐंठे, और उन्होंने एक तीव्र चरमोत्कर्ष का अनुभव किया, जिससे उनके जिस्मों से एक संतुष्टि भरी आह निकली।
थके हुए, लेकिन पूरी तरह तृप्त, वे एक-दूसरे की बाँहों में सिमट गए। प्रिया ने रोहन के सीने पर अपना सिर रखा, उसकी साँसें अभी भी अनियमित थीं। रोहन ने उसके बालों को सहलाया। आज होटल रूम में हॉट कपल की रात ने उनकी प्यासी आत्माओं को तृप्त कर दिया था, और वे जानते थे कि उनकी यह रात हमेशा के लिए एक यादगार और कामुक अनुभव बन कर रह जाएगी।
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