कमरे में फैली घुटन भरी गर्मी ने प्रिया के बदन में अजीब सी बेचैनी पैदा कर दी थी। वह करवटें बदल रही थी, पसीने से भीगी उसकी पतली मैक्सी उसके उभारों से चिपक गई थी, हर साँस के साथ उसका सीना ऊपर-नीचे हो रहा था। बाहर कूलर की धीमी आवाज भी इस उमस से राहत नहीं दे पा रही थी। रोहन बगल में लेटा, उसकी इस बेचैनी को खामोशी से देख रहा था। उसे अपनी प्रिया का यह बेबस रूप भी कितना मोहक लग रहा था। उसकी गर्दन से टपकता पसीना उसके वक्षों के बीच तक उतर रहा था, एक गहरी खाई सी बना रहा था।
रोहन ने धीमे से हाथ बढ़ाया और प्रिया की नंगी बाँह को सहलाया। प्रिया चौंक कर मुड़ी, उसकी आँखें रात के अंधेरे में भी चमक रही थीं।
“बहुत गर्मी है, है ना?” रोहन की आवाज़ हल्की, पर उसमें एक गहरापन था।
प्रिया ने सिर्फ ‘हम्म’ कहा, उसकी साँसें अभी भी तेज़ थीं। रोहन ने उसके माथे से पसीने की बूँद पोंछी और धीरे से उसके बालों को हटाया जो उसके गालों से चिपक गए थे। इस छोटे से स्पर्श में एक आग थी, जो इस गर्मी रात की कहानी हिंदी में एक नई लपट भर रही थी।
“कपड़े उतार दो, थोड़ी राहत मिलेगी,” रोहन ने फुसफुसाते हुए कहा।
प्रिया ने बिना कुछ कहे, धीमी गति से अपनी मैक्सी ऊपर उठाई और सिर के ऊपर से उतार दी। उसका नग्न, पसीने से तर बदन कमरे की धीमी रोशनी में किसी मूर्ति सा चमक उठा। उसके भरे हुए स्तन, उनके ऊपर कसे हुए निप्पल, और पतली कमर के नीचे उभरते नितंब… रोहन की आँखों में भूख साफ झलक रही थी। प्रिया को यह एहसास हुआ, और एक शरारती मुस्कान उसके होंठों पर तैर गई। उसने भी रोहन के टी-शर्ट की किनारी पकड़ी और उसे ऊपर खींच लिया।
अब दोनों नग्न, पसीने से लथपथ एक दूसरे के सामने थे। रोहन ने प्रिया को अपनी तरफ खींचा और उसके होंठों पर टूट पड़ा। यह कोई साधारण चुंबन नहीं था; यह प्यास थी, बेचैनी थी, इस गर्मी से मुक्ति और खुद में समा जाने की ललक थी। उनके होंठ एक दूसरे को मसल रहे थे, जीभें आपस में उलझ रही थीं, एक दूसरे के मुँह का स्वाद चख रही थीं। प्रिया की उंगलियाँ रोहन की पीठ पर फिसल रही थीं, कभी सहलातीं, कभी नाखूनों से खरोंचतीं।
रोहन नीचे उतरा, प्रिया की गर्दन, कंधों और फिर उसके वक्षस्थल पर अपने होंठों से आग लगाता गया। प्रिया की आहें कमरे में गूंज रही थीं। उसने रोहन का सिर अपने हाथों में भरा और उसे अपने स्तनों के बीच दबा लिया, “चूसो मुझे, रोहन… चूसो।” रोहन ने उसकी बात मानी। उसके एक निप्पल को अपने मुँह में भर कर चूसा, जैसे कोई प्यासा बच्चा अपनी माँ का दूध पी रहा हो। प्रिया का शरीर झनझना उठा, उसने अपने पैर रोहन की कमर पर कस दिए।
रोहन धीरे-धीरे नीचे उतरता गया, उसके पेट पर, कमर पर, अपनी जीभ से पसीने को चाटता गया। प्रिया मचल उठी, उसकी टाँगें काँप रही थीं। रोहन उसके भीतर की प्यास को जानता था। उसने प्रिया की टाँगों को फैलाया, और उसकी भीगी हुई योनि को सहलाने लगा। “आह… रोहन…” प्रिया की आवाज़ एक सिसकी में बदल गई। उसकी उँगलियाँ उसके गीले प्रवेश द्वार पर जादू कर रही थीं। प्रिया का बदन आग सा दहक रहा था, और रोहन का स्पर्श उस आग में घी का काम कर रहा था।
फिर, रोहन अपने लिंग को प्रिया की योनि के द्वार पर ले आया। प्रिया की साँसें रुक गईं। उसने अपनी कमर को ऊपर उठाया, जैसे निमंत्रण दे रही हो। रोहन ने एक गहरा धक्का दिया और उसका कठोर, फड़कता लिंग प्रिया के भीतर समा गया। प्रिया की एक तीखी चीख निकली, जो तुरंत रोहन के होंठों में दब गई। अब सिर्फ धक्कों की आवाज़ थी, जिस्मों के टकराने की, पसीने की और दो प्यासे शरीरों की गहरी आहों की।
रोहन ने कमर कसकर धक्के लगाने शुरू किए। प्रिया भी अपनी कमर को ऊपर-नीचे कर उसका साथ दे रही थी। वे दोनों इस गर्मी रात की कहानी हिंदी में पूरी तरह से खो चुके थे। हर धक्का उन्हें और गहरा जोड़ रहा था, हर रगड़ एक नई लहर पैदा कर रही थी। प्रिया ने अपने नाखूनों से रोहन की पीठ को खरोंच दिया, उसकी आहें अब मदहोशी भरी कराहों में बदल गई थीं। दोनों का शरीर पसीने में नहाया था, बिस्तर की चादर भी गीली हो चुकी थी।
“मैं… मैं आ रही हूँ… रोहन… आ-आह!” प्रिया चीखी।
रोहन ने अपनी गति और तेज़ कर दी, आखिरी कुछ धक्के इतने ज़ोरदार थे कि प्रिया का पूरा बदन काँप उठा। एक तीव्र सुख की लहर उसके पूरे शरीर में फैल गई, उसने अपनी आँखें बंद कर लीं और रोहन को कसकर पकड़ लिया। रोहन भी उसके भीतर ही अपने चरम पर पहुँच गया, उसका सारा प्रेम और वासना प्रिया के भीतर उड़ेल दी।
दोनों कुछ देर तक ऐसे ही एक दूसरे से चिपके रहे, उनकी साँसें तेज़ थीं, धड़कनें बेकाबू। पसीने में सराबोर, थके हुए, पर असीम तृप्ति से भरे हुए। इस गर्मी रात की कहानी हिंदी में आज उनकी देह की आग ने मिलकर एक ऐसी ज्वाला जगाई थी, जिसकी तपिश उनकी रूह तक महसूस कर रही थी। रोहन ने प्रिया के माथे पर एक चुंबन किया। प्रिया मुस्कुराई, एक गहरी संतुष्टि उसके चेहरे पर साफ झलक रही थी। आज इस उमस भरी रात ने उन्हें एक-दूसरे के और भी करीब ला दिया था।
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