जब उसने मेरा हाथ पकड़कर गेस्ट हाउस के उस एकांत कमरे की ओर खींचा, तो मेरे पूरे शरीर में एक मीठी-सी सिहरन दौड़ गई। कमरे में घुसते ही रोहन ने दरवाज़ा बंद किया और मुझे अपनी बाँहों में भर लिया। हमारी आँखों में एक-दूसरे के लिए वर्षों की दबी प्यास साफ झलक रही थी। आज की रात, गेस्ट हाउस में बिताई रोमांटिक रात, हमारी ज़िंदगी का सबसे यादगार पल बनने वाली थी।
मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए, जैसे कोई प्यासा बरसों बाद पानी पी रहा हो। उसकी साँसों की गरमाहट और मेरी बढ़ती धड़कनें पूरे कमरे में गूँज रही थीं। रोहन ने मुझे कसकर अपनी बाहों में भींच लिया, उसकी उंगलियाँ मेरी पीठ पर धीरे-धीरे सरकती हुई मेरी साड़ी के पल्लू को ढीला करने लगीं। साड़ी कब मेरे जिस्म से उतरकर ज़मीन पर गिरी, मुझे पता ही नहीं चला। मैं सिर्फ उसके स्पर्श में, उसके जुनून में खोई जा रही थी।
उसकी आँखें मेरी नंगी देह पर ठहर गईं, एक पल को उसकी साँस थम सी गई। “तुम कितनी ख़ूबसूरत हो, प्रिया,” उसकी आवाज़ में एक गहरी कामुकता थी। मैंने शर्माते हुए अपनी पलकें झुका लीं, लेकिन मेरे अंदर की आग और तेज़ हो गई थी। उसने धीरे से मेरे ब्लाउज के बटन खोलने शुरू किए। एक-एक बटन खुलता गया और मेरे वक्ष उसके सामने आते गए। मेरे स्तनों की उभार को देखकर उसकी आँखों में लालसा और बढ़ गई। उसने मुझे बिस्तर पर धकेल दिया और मेरे ऊपर झुक गया। उसके भारी जिस्म का स्पर्श मेरे लिए स्वर्ग था।
वह मेरे होंठों से नीचे उतरकर मेरी गर्दन, फिर मेरे कंधों को चूमता हुआ, मेरे स्तनों तक आ पहुँचा। उसके गर्म होंठ और जीभ जब मेरे निप्पल्स को सहलाने लगे, तो मेरे मुँह से एक मदहोश कर देने वाली आह निकल गई। मैं बिस्तर पर छटपटा उठी, मेरे शरीर का हर रोम उसे और क़रीब खींच रहा था। “और… और तेज़, रोहन,” मैं फुसफुसाई। उसने मेरी इच्छा को समझा और पूरी तेज़ी से मेरे स्तनों को अपने मुँह में भर लिया, कभी चूसता, कभी हल्के से काटता। मेरा पूरा शरीर अब एक जलती हुई आग बन चुका था।
उसका हाथ मेरी नाभि से नीचे खिसकता हुआ मेरी जाँघों के बीच पहुँच गया। मेरे अंदर की प्यास अब बर्दाश्त से बाहर थी। जब उसकी उंगलियों ने मेरे अंतरंग भाग को छुआ, तो मेरे शरीर में एक तीव्र सिहरन दौड़ गई। मैं अपनी कमर उठा-उठाकर उसे और गहराई में खींच रही थी। वह धीरे-धीरे मेरे शरीर की हर परत को खोज रहा था, हर हिस्से को प्यार कर रहा था। उस गेस्ट हाउस में बिताई रोमांटिक रात की हर साँस में, मैं पूरी तरह खो चुकी थी।
अब और इंतज़ार मुश्किल था। मैंने उसके पैंट की ज़िपर खोली और उसके कठोर पुरुषत्व को आज़ाद किया। उसे देखते ही मेरी आँखें चमक उठीं। मैंने उसे अपनी मुट्ठी में लिया और हल्के से सहलाया। रोहन की आँखों में भी अब वही पागलपन था, जो मेरी आँखों में था। उसने धीरे-धीरे मुझे फैलाया और फिर एक झटके में मेरे अंदर प्रवेश कर गया। मेरे मुँह से एक चीख निकल गई, जो तुरंत उसके होंठों ने दबा दी।
हमारी देह एक साथ लय में हिलने लगी। हर धक्के के साथ एक मीठी पीड़ा और चरम सुख की लहर मेरे पूरे शरीर में दौड़ रही थी। उसकी तेज़ गति और मेरा गहरा प्रवेश, सब कुछ ऐसा था मानो हम दोनों एक दूसरे में विलीन हो रहे हों। हमारी साँसें तेज़ होती गईं, पसीना टपकने लगा, और हमारे मिलन की आवाज़ें उस एकांत कमरे में गूँजने लगीं। मैं उसकी पीठ को अपने नाखूनों से खुरच रही थी, और वह मेरी गर्दन पर अपने होंठों से निशान छोड़ रहा था। “हाँ… रोहन… और…” मैं सिसकती रही, अपनी चरम सीमा की ओर बढ़ती रही। कुछ ही पलों में, एक ज़ोरदार कंपकंपी के साथ, मेरा शरीर अकड़ गया और मैं एक तीव्र आनंद में डूब गई। उसके तुरंत बाद, रोहन ने भी एक गहरी आह भरकर अपना सारा जुनून मेरे अंदर उड़ेल दिया।
हम दोनों निढाल होकर एक-दूसरे की बाँहों में लेटे रहे। हमारी साँसें अभी भी तेज़ थीं, और हमारे जिस्म की गरमाहट एक-दूसरे में समाई हुई थी। मैंने अपनी आँखें खोलीं और उसे देखा। उसकी आँखों में प्यार, संतुष्टि और गहरा सुकून था। यह सिर्फ एक रात नहीं थी, बल्कि हमारे प्रेम की एक अविस्मरणीय गाथा थी। जब सुबह हुई, तो गेस्ट हाउस में बिताई रोमांटिक रात की हर स्मृति मेरे रोम-रोम में बस चुकी थी। हम दोनों जानते थे कि यह अनुभव हमारे दिलों में हमेशा के लिए एक सुनहरी याद बनकर रहेगा।
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