दोपहर की तपती धूप में राकेश के दिल में जो आग सुलग रही थी, वह किसी भी लू से कहीं ज़्यादा जानलेवा थी। उसकी पत्नी अपनी माँ से मिलने मायके गई हुई थी, और घर में अकेली जवान साली, नेहा, उसकी बेचैनी का सबब बनी हुई थी। नेहा, जिसकी जवानी अब पूरी तरह से खिली हुई थी, अपनी चंचल आँखों और भरे-भरे जिस्म से राकेश के दिल में तूफान मचा रही थी। नेहा भी राकेश की मर्दाना काया और उसकी गहरी आँखों की छिपी हुई चाहत से अनभिज्ञ नहीं थी। आज राकेश और नेहा के बीच जो चिंगारी भड़क उठी थी, वह किसी भी ‘जीजा साली का बेडरूम रोमांस हिंदी’ कहानी से कम नहीं थी।
घर में सन्नाटा पसरा हुआ था, बस कूलर की हल्की-हल्की आवाज़ आ रही थी। नेहा एक पतली कॉटन की कुर्ती और सलवार पहने, किचन से पानी का गिलास लेकर राकेश के कमरे की ओर बढ़ी। दरवाज़ा खुला था। राकेश बिस्तर पर लेटा कुछ सोच रहा था। “जीजा जी, क्या हुआ? परेशान लग रहे हो?” नेहा की आवाज़ में एक अजीब सी खनक थी। उसकी गर्दन से पसीने की एक पतली लकीर उसके वक्षस्थल की खाई में गुम हो रही थी, जो राकेश को साफ दिखाई दे रही थी।
राकेश ने उसे पास बुलाया। “नेहा, पास आओ। पता नहीं क्यों, आज कुछ ठीक नहीं लग रहा।” नेहा थोड़ा झिझकी, पर फिर बिस्तर के किनारे आकर बैठ गई। राकेश ने धीरे से उसका हाथ पकड़ लिया। उसकी उँगलियों का स्पर्श पाते ही नेहा के पूरे शरीर में सिहरन दौड़ गई। राकेश ने नेहा की आँखों में झाँका। उन आँखों में न सिर्फ शरारत थी, बल्कि एक छुपी हुई चाहत भी थी। कमरे की गरमी और उनके दिलों की आग मिलकर एक ऐसे ‘जीजा साली का बेडरूम रोमांस हिंदी’ को जन्म दे रही थी, जिसकी कल्पना भी रोमांचित कर देती थी।
राकेश ने नेहा का हाथ खींचकर उसे अपनी ओर झुका लिया। नेहा की साँसें तेज़ हो गईं, उसके होंठ राकेश के होंठों के बेहद करीब थे। राकेश ने बिना देर किए अपने होंठ उसके गुलाब की पंखुड़ियों से होठों पर रख दिए। यह एक लंबा, गहरा और नम चुम्बन था, जिसमें बरसों की दबी हुई चाहत पिघल कर बह निकली थी। नेहा ने भी पूरी शिद्दत से राकेश का साथ दिया, उसकी हथेलियाँ राकेश के बालों में उलझ गईं। राकेश ने उसे अपनी बाहों में कस लिया, उसके नरम शरीर को अपने मज़बूत जिस्म से दबा लिया।
राकेश के हाथ नेहा की पीठ पर फैले, फिर धीरे-धीरे उसकी कुर्ती के किनारों से होते हुए उसके उभरे हुए वक्षस्थल तक पहुँच गए। नेहा के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली आह निकली। राकेश ने अपनी उंगलियों से उसकी कुर्ती के बटन खोलने शुरू किए। एक-एक करके बटन खुले और नेहा के ब्लाउज का ऊपरी हिस्सा दिखाई देने लगा। राकेश ने उसे पूरी तरह से खोल दिया और उसके ब्लाउज को एक झटके में उतार फेंका। नेहा का गुलाबी रंग का ब्रा उसके वक्षस्थल को बड़ी मुश्किल से ढँक पा रहा था।
राकेश ने ब्रा के हुक खोले, और नेहा के सुडौल, आकर्षक स्तन राकेश की आँखों के सामने आ गए। नेहा ने शरम से आँखें मूँद लीं, पर उसका शरीर छटपटा रहा था। राकेश ने एक स्तन को अपने मुँह में भर लिया और उसे ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा, जैसे कोई बच्चा माँ का दूध पीता है। नेहा के शरीर में बिजली सी दौड़ गई। वह बिस्तर पर ढीली पड़ गई, उसकी कमर मटकने लगी। राकेश ने दूसरे स्तन को अपने हाथ से मसलना शुरू किया, उसके निप्पल को अपनी उंगलियों के बीच घुमाते हुए। नेहा का पूरा शरीर अब कामुकता में भीग चुका था।
नेहा ने भी हिम्मत जुटाई और राकेश की कमीज़ के बटन खोल दिए, उसके मज़बूत सीने पर अपने नाख़ून फिराए। राकेश ने नेहा की सलवार और फिर पैंटी भी उतार दी। नेहा की योनि अब पूरी तरह से रसीली हो चुकी थी, उसकी जंघाओं के बीच कामरस की कुछ बूँदें साफ दिख रही थीं। राकेश ने उसे प्यार से सहलाया, अपनी उँगलियों से उसकी भीगी योनि के द्वार को टटोला। “अब और इंतज़ार मत करवाओ, जीजा जी,” नेहा फुसफुसाई, उसकी आवाज़ में एक मीठी-सी तड़प थी।
राकेश ने अपने पैंट उतारे, उसका कठोर लिंग नेहा को और भी ज़्यादा उत्तेजित कर रहा था। वह नेहा के ऊपर आया, अपने लिंग को उसकी योनि के मुहाने पर रखा। एक गहरी साँस ली और धीरे-धीरे प्रवेश किया। नेहा के मुँह से एक तीव्र चीख निकली, पर फिर वह राकेश को अपनी बाँहों में कसकर जकड़ ली। उनके जिस्म एक लय में हिलने लगे, धक्के पर धक्का, गहरा, तेज़। कमरे में सिर्फ उनके जिस्मों के टकराने की आवाज़ें, उनकी कामुक आहें और सिसकियाँ गूँज रही थीं। राकेश ने नेहा के बालों को सहलाया, उसके कान में फुसफुसाया, “कैसा लग रहा है मेरी साली, मेरी जान?” नेहा ने सिर्फ अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए, उसकी आँखों में अब कोई शर्म नहीं, सिर्फ अदम्य वासना दिख रही थी।
जब दोनों अपनी चरम सीमा पर पहुँचे, तो उनके जिस्मों से एक ज़ोरदार सिहरन दौड़ी। राकेश ने नेहा के अंदर ही अपना सारा प्रेम उड़ेल दिया। नेहा राकेश को जकड़े हुए थी, उसकी साँसें तेज़ थीं, शरीर ढीला पड़ चुका था, पर उसके चेहरे पर एक गहरी संतुष्टि की मुस्कान थी।
वे कुछ देर ऐसे ही एक दूसरे से चिपके रहे, पसीने से भीगे हुए, दुनिया से बेखबर। बाहर धूप अभी भी तप रही थी, पर कमरे के अंदर दो जिस्मों की आग ने सब कुछ जलाकर राख कर दिया था। यह सिर्फ एक बेडरूम रोमांस नहीं था, यह एक गहरा, अनकहा ‘जीजा साली का बेडरूम रोमांस हिंदी’ था, जो उनकी रूह में बस गया था। नेहा ने राकेश की छाती पर अपना सिर रखा और एक गहरी साँस ली, आज उसने अपनी जीजा की बाहों में वो सब पा लिया था जिसकी उसे गुप्त रूप से चाहत थी, और राकेश ने भी महसूस किया कि यह चाहत सिर्फ उसकी ही नहीं थी।
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