दोपहर की वो चिलचिलाती गर्मी, और मेरी आँखों के सामने पड़ोसी प्रिया भाभी का सुडौल बदन… आज तो कुछ होकर रहेगा। घर में कोई नहीं था, और मैं बस छत के पंखे के नीचे लेटा, प्रिया भाभी के ही ख्यालों में खोया हुआ था। उनकी भरी हुई कमर, उनके साड़ी से झाँकते गोरे पेट, और वो रसीले होंठ… मेरी नसों में आग लगा रहे थे।
तभी दरवाजे पर एक हल्की सी दस्तक हुई। मैंने उठकर दरवाजा खोला तो सामने प्रिया भाभी खड़ी थीं, पसीने से भीगी हुई। उनके माथे पर हल्की बूँदें थीं जो उनके भरे हुए सीने से होती हुई नीचे जा रही थीं। उनका पल्लू थोड़ा खिसका हुआ था, और मुझे उनके गहरे क्लीवेज की एक झलक मिल रही थी। “राजू, ज़रा चीनी मिलेगी? मेरी खत्म हो गई है और चाय बनाने वाली हूँ,” उन्होंने शरमाते हुए कहा। उनकी आवाज़ में भी एक मीठी सी भीगी हुई सी गर्माहट थी।
“हाँ भाभी, क्यों नहीं,” मैंने जानबूझकर धीमी आवाज़ में कहा, अपनी आँखें उनके बदन पर टिकाए हुए। “अंदर आ जाओ ना, बाहर बहुत गर्मी है।” प्रिया भाभी थोड़ा हिचकिचाईं, फिर मुस्कुरा कर अंदर आ गईं। उनके शरीर से आ रही पसीने और हल्की खुशबू ने मेरी साँसें तेज़ कर दीं। मैं किचन में डिब्बा निकालने के लिए ऊपर अलमारी की तरफ बढ़ा, और जानबूझकर थोड़ा झुक गया ताकि उनकी नज़र मेरी तरफ जाए। जब मैं चीनी का डिब्बा निकालने लगा, तो मैंने महसूस किया कि वह मेरे ठीक पीछे खड़ी थीं। मेरा हाथ अलमारी में एक पल के लिए अटक गया।
मैंने मुड़कर देखा। उनकी आँखें मेरी आँखों में मिल गईं। वो हल्की सी कांप गईं। “क्या हुआ राजू?” उन्होंने फुसफुसाते हुए पूछा। मैंने कुछ नहीं कहा, बस धीरे से अपना हाथ उनकी कमर पर रखा। उनकी साँसें तेज़ हो गईं। उनका पेट मेरे हाथ के नीचे धड़क रहा था। मैंने उन्हें अपनी तरफ खींचा, और एक पल के भी इंतज़ार किए बिना उनके गुलाबी होंठों को अपने होंठों में भर लिया।
यह एक ऐसी चिंगारी थी जो सालों से सुलग रही थी। प्रिया भाभी पहले तो थोड़ा हिचकिचाईं, फिर पूरी तरह से मेरा साथ देने लगीं। उनकी जीभ मेरी जीभ से टकराई, और हमारे होंठों के बीच एक अजीब सी भूख जाग उठी। मैंने उनके कमर पर अपने हाथ कस दिए, और वे मेरे गले में अपनी बाहें डालती चली गईं। मैंने उन्हें गोद में उठाया और बिना एक पल भी रुके बेडरूम की तरफ ले चला।
बेड पर पटकते ही मैंने उनका पल्लू हटाया और उनकी साड़ी खोल दी। उनके भीतर छिपा उनका पुष्ट, सुडौल शरीर मेरे सामने आ गया। गुलाबी ब्लाउज में कसी हुई उनकी छातियाँ साँस लेने को बेताब थीं। मैंने जल्दी से उनके ब्लाउज के बटन खोले और उनकी ब्रा को भी एक झटके में उतार फेंका। उनके बड़े-बड़े, भूरे निप्पल मेरी आँखों के सामने थे, जैसे मुझे निमंत्रण दे रहे हों। मैंने झुककर उनके एक निप्पल को अपने मुँह में भर लिया और उसे चूसने लगा, जबकि दूसरे को अपनी उँगलियों से मसला। प्रिया भाभी की आहें पूरे कमरे में गूँजने लगीं। “राजू… आंह… और तेज़…”
मैंने उनकी पैंटी नीचे सरका दी। उनके घने जंगल के बीच, एक गुलाबी कली मेरे इंतज़ार में थी। मैंने अपनी जीभ से उसे सहलाया, और प्रिया भाभी ने अपनी कमर उठा दी। वे तड़प रही थीं। मैं बिना किसी देरी के उनके ऊपर आ गया, और अपने पैंट को उतार फेंका। मेरा औजार उनकी गरमाहट महसूस कर रहा था। मैंने धीरे से उसे उनकी योनि के द्वार पर रखा, और एक धक्का दिया। “आहह्ह्हह!” उनकी चीख निकली, पर यह दर्द से ज़्यादा सुख की थी। मेरा लंड उनके भीतर पूरा समा चुका था।
मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए। प्रिया भाभी ने अपनी टाँगें मेरे कमर पर कस लीं और अपनी कमर उठाकर मेरा साथ देने लगीं। कमरे में सिवाय हमारे शरीर के टकराने की आवाज़ों और प्रिया भाभी की सिसकियों के और कुछ नहीं था। गर्मी और पसीने से हम दोनों तरबतर थे, पर यह आग हमें ठंडा नहीं, और ज़्यादा गरमा रही थी। “राजू… और… और तेज़… हाँ… ऐसे ही… आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह!” मैं अपनी पूरी ताक़त से उन पर वार कर रहा था, और प्रिया भाभी हर धक्के पर और ज़ोर से आहें भर रही थीं। यही तो थी, मेरी देसी भाभी की गरमा गरम कहानी, जिसे मैं कब से जीने का सपना देख रहा था।
कुछ ही देर में, हम दोनों एक साथ चरम पर पहुँच गए। प्रिया भाभी ने अपनी बाँहों में मुझे कस लिया और उनकी गर्म साँसें मेरे कान में सुनाई दे रही थीं। मेरा सारा वीर्य उनके भीतर समा गया था। हम दोनों कुछ देर तक यूँ ही एक-दूसरे से लिपटे रहे, पूरी तरह से थके हुए पर बेहद संतुष्ट। उनकी नज़रों में अब शर्म नहीं, बल्कि एक गहरी चाहत थी। “आज तुमने मेरी प्यास बुझा दी राजू,” उन्होंने फुसफुसाते हुए कहा, “और अब तो ये सिर्फ एक शुरुआत है, हमारी देसी भाभी की गरमा गरम कहानी की।” मैंने मुस्कुरा कर उन्हें और कसकर अपनी बाँहों में भर लिया, यह जानते हुए कि यह पहली मुलाकात आखिरी नहीं होगी।
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