आज प्रिया भाभी का शरीर आग की तरह दहक रहा था, और इस तपिश को बुझाने वाला पति आज घर पर नहीं था। रात गहरी हो चुकी थी, बाहर घोर अँधेरा था क्योंकि बिजली गुल थी, और प्रिया अपने शयनकक्ष में अकेली, करवटें बदल रही थी। उसके मन में एक अजीब सी बैचेनी थी, एक अतृप्त प्यास जो उसे अंदर ही अंदर खाए जा रही थी। तभी अचानक दरवाज़े पर हल्की सी दस्तक हुई।
“भाभी? आप ठीक हैं? आवाज़ सुनकर लगा कि शायद आप जाग रही हैं।” ये रोहन था, उसका देवर, जिसकी आवाज़ में हमेशा एक अजीब सी कशिश थी जो प्रिया को बेचैन कर देती थी।
“हाँ रोहन, बस गर्मी से नींद नहीं आ रही। तुम क्या कर रहे हो इतनी रात को?” प्रिया ने हल्की आवाज़ में कहा, उसकी धड़कनें कुछ तेज़ हो गईं।
“मैं बस देखने आया था कि कहीं आपको कुछ ज़रूरत तो नहीं। मुझे भी नींद नहीं आ रही थी,” रोहन ने दरवाज़ा खोलकर कहा। मंद चाँदनी की रोशनी में प्रिया ने देखा, रोहन ने सिर्फ़ एक लुंगी पहन रखी थी और उसका ऊपरी शरीर नग्न था। उसकी सुदृढ़ छाती पर पसीने की बूँदें चमक रही थीं। प्रिया की आँखों में एक अजीब सी चमक आ गई।
रोहन कमरे में आया और प्रिया के बिस्तर के किनारे बैठ गया। उनके बीच की दूरी कम होने के साथ ही कमरे का माहौल और भी गरम होने लगा। “भाभी, आपको इतनी गर्मी लग रही है? मैं पंखा चला देता अगर बिजली होती।”
“कोई बात नहीं रोहन,” प्रिया ने धीरे से कहा, उसका हाथ अनजाने में रोहन की जाँघ से छू गया। एक हल्की सी सिहरन दोनों के शरीर में दौड़ गई। रोहन ने प्रिया की आँखों में देखा। उसकी आँखें लाल थीं, उनमें एक अजीब सी चमक थी, जैसे कोई गहरी बात कहना चाहती हों।
रोहन ने धीमे से प्रिया का हाथ अपने हाथ में ले लिया। “भाभी, आप इतनी परेशान क्यों लग रही हैं?” उसकी आवाज़ में हमदर्दी थी, पर आँखों में कुछ और।
प्रिया ने अपनी आँखें झुका लीं, “बस… अच्छा नहीं लग रहा।” उसकी आवाज़ काँप रही थी। रोहन ने धीरे से उसके चेहरे को अपनी उंगलियों से उठाया। उनकी आँखें मिलीं, और उस पल में हर दीवार ढह गई। प्रिया ने देखा रोहन के होंठ उसके पास आ रहे हैं, और वह खुद को रोक नहीं पाई। उनकी साँसें एक दूसरे में घुल-मिल गईं, और फिर रोहन ने उसके अधरों को अपने अधरों में भर लिया। यह एक जंगली, कामुक चुंबन था जिसने प्रिया की सारी मर्यादा तोड़ दी।
उनके शरीर एक दूसरे से लिपट गए। रोहन ने प्रिया को बिस्तर पर धकेला और उसके ऊपर आ गया, उसके होंठ प्रिया के गले पर उतर आए। प्रिया ने आहें भरनी शुरू कर दीं, उसके हाथ रोहन के बालों में उलझ गए। “रोहन… आह… क्या कर रहे हो तुम…” उसकी आवाज़ में विरोध कम और उत्तेजना ज़्यादा थी। रोहन ने उसकी साड़ी खींचकर एक तरफ़ कर दी, और उसके ब्लाउज के बटन खोलने लगा। जैसे ही ब्लाउज हटा, प्रिया के सुडौल वक्षस्थल रोहन की आँखों के सामने आ गए। रोहन ने बिना देरी किए एक निप्पल को अपने मुँह में भर लिया और उसे चूसने लगा, जैसे कोई भूखा बच्चा अपनी माँ का दूध पीता है।
प्रिया का शरीर मरोड़ रहा था, उसकी आहें कमरे की खामोशी तोड़ रही थीं। “आह… रोहन… बस… नहीं… और तेज़…” रोहन ने एक हाथ से प्रिया की साड़ी और पेटीकोट ऊपर सरकाया, और उसके नीचेूनी अंग पर अपनी उंगलियाँ फेरने लगा। प्रिया पहले से ही गीली थी, उसकी कामवासना की नदी उफान पर थी। रोहन ने अपनी लुंगी भी उतार फेंकी।
“आज यह **भाभी देवर का रोमांस हिंदी कहानी** एक नई करवट ले रहा था,” रोहन ने अपने मन में सोचा, जैसे ही उसने खुद को प्रिया के भीतर धँसा दिया। प्रिया ने एक गहरी चीख मारी, पर फिर तुरंत ही उसे एक मदहोशी ने घेर लिया। उनकी धड़कनें एक हो गईं, उनकी साँसें एक लय में चल रही थीं। रोहन लगातार प्रिया के भीतर गहराइयाँ नाप रहा था, और प्रिया अपने देवर की हर धक्के का स्वागत कर रही थी। उनके अंग-अंग एक दूसरे में समाते जा रहे थे, पसीना उनके शरीर से बह रहा था, पर उन्हें कुछ होश नहीं था।
“आह्ह्ह… रोहन… और… और तेज़…” प्रिया ने चिल्लाकर कहा, उसकी जाँघें रोहन की कमर को कस कर पकड़े हुए थीं। रोहन ने अपनी रफ़्तार बढ़ाई, और कुछ ही पलों में दोनों एक साथ चरम सुख की पराकाष्ठा पर पहुँच गए। उनके शरीर काँप रहे थे, और उन्होंने एक दूसरे को कसकर पकड़ लिया।
साँसें जब कुछ सामान्य हुईं, तो वे दोनों एक दूसरे की बाहों में लिपटे थे। प्रिया ने रोहन के माथे पर एक गहरा चुंबन दिया। उनकी आँखों में अब एक नया इकरार था, एक गहरी समझ थी। यह सिर्फ़ एक रात की प्यास नहीं थी, बल्कि एक अनकही भावना थी जिसने आज एक नया रूप ले लिया था। रात गहरी हो चुकी थी, पर उनके दिलों में अब एक नया सूरज उग आया था, एक ऐसा रिश्ता जिसने आज सारी सीमाएँ तोड़ दी थीं। यह उनकी अपनी, एक गोपनीय **भाभी देवर का रोमांस हिंदी कहानी** थी, जो अब कभी खत्म नहीं होने वाली थी।
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