दरवाज़ा बंद होते ही, कमरे की हवा में एक अजीब सी मदहोशी छा गई, जैसे सदियों की प्यास बुझाने का पल आ गया हो। रोहन ने धीरे से पलटा और देखा, नयना, घूंघट में लिपटी, बिस्तर के एक कोने में सिमटी बैठी थी। उसके माथे पर पसीने की बूंदें थीं, और दिल की धड़कनें साफ सुनाई दे रही थीं। यह उनकी सुहागरात थी, और इस रात, उनकी सुहागरात की अनकही बातें हिंदी में गूंजने वाली थीं।
रोहन ने करीब आकर, बड़े प्यार से नयना का घूंघट उठाया। लाल रंग की साड़ी में लिपटी नयना का चेहरा चाँद जैसा चमक रहा था। उसकी आँखें झुकी हुई थीं, पलकें काँप रही थीं। रोहन ने उसके गालों पर अपनी उंगलियाँ फेरीं, तो नयना के पूरे शरीर में एक सिहरन दौड़ गई। उसने धीरे से नयना के होंठों पर अपने होंठ रखे। यह एक हल्की सी छुअन थी, पर इतनी तीव्र कि दोनों के शरीर में आग सी लग गई। नयना ने पहली बार अपनी आँखें उठाईं और रोहन की आँखों में देखा। उन आँखों में गहरा प्यार और वासना साफ दिख रही थी।
“नयना,” रोहन की आवाज़ जैसे किसी गहरे कुएँ से आ रही थी, “तुम आज मेरी हो।”
नयना ने कुछ नहीं कहा, बस अपनी बाहों को रोहन की गर्दन के चारों ओर लपेट लिया। उनके होंठ फिर से मिले, इस बार ज़्यादा गहरे, ज़्यादा जोशीले। रोहन ने उसके अधरों का सारा रस चूस लिया, जैसे एक भूखा भँवरा फूल से अमृत पी रहा हो। नयना की साँसें तेज हो गईं, और उसने अपनी आँखें बंद कर लीं, अपने आपको उस क्षण में पूरी तरह खो देने दिया।
रोहन के हाथ नयना की कमर पर फिसले, और उसने धीरे-धीरे उसकी साड़ी खोलनी शुरू कर दी। एक-एक परत हटती गई, और नयना का कोमल बदन उसके सामने आने लगा। उसने उसके ब्लाउज के बटन खोले, और उसके भरे हुए वक्षों को अपनी हथेलियों में थाम लिया। नयना के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली आह निकली। रोहन ने उसके निप्पलों को अपने मुँह में लिया और धीरे-धीरे चूसने लगा। नयना का शरीर बिजली की तरह काँप उठा। उसकी उंगलियाँ रोहन के बालों में उलझ गईं और वह उसे और करीब खींचने लगी।
जैसे हर छुअन एक नई कहानी गढ़ रही थी, उनकी सुहागरात की अनकही बातें हिंदी में अब शब्दों से कहीं ज़्यादा गहरे उतर रही थीं। रोहन ने अपनी जीभ से नयना के पेट को सहलाया, उसकी नाभि में अपनी जीभ घुमाई। नयना की उत्तेजना चरम पर पहुँच रही थी। उसने अपनी साड़ी और पेटीकोट को खुद ही उतार फेंका, और सिर्फ़ अपनी ब्रा और पैंटी में रह गई। रोहन ने उसे उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया। अब सिर्फ़ ब्रा और पैंटी ही उनके बीच दीवार बनी थीं, और रोहन ने उन्हें भी उतार फेंका। नयना अब पूरी तरह से नग्न थी, उसकी गोरी त्वचा मोम जैसी चमक रही थी।
रोहन ने अपने कपड़े भी उतार दिए, और अब दोनों नग्न अवस्था में एक-दूसरे के सामने थे। रोहन ने नयना की जांघों को फैलाया और उसकी कामुक योनि को अपनी उंगलियों से सहलाने लगा। नयना के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगीं, “आह, रोहन… और…”
उसने अपनी एक उंगली नयना की गीली योनि में डाली, और नयना की आँखों से खुशी के आँसू छलक आए। रोहन ने अपने पुरुषत्व को नयना की योनि के मुहाने पर रखा। एक गहरी साँस ली, और धीरे-धीरे भीतर धँसने लगा। नयना ने एक दर्द भरी आह भरी, पर वह दर्द भी उसे मीठा लग रहा था। रोहन ने एक ही झटके में खुद को पूरा भीतर डाल दिया। नयना की चीख उसके होंठों में दब गई।
अब दोनों एक लय में हिल रहे थे। रोहन के हर धक्के के साथ नयना का शरीर ऊपर उठता और फिर नीचे गिरता। पसीने की बूँदें उनके जिस्मों पर मोतियों सी चमक रही थीं। कमरे में सिर्फ़ उनके शरीर के टकराने की आवाज़ें, उनकी तेज साँसें और नयना की उत्तेजित आहें गूँज रही थीं। नयना ने अपने नितंबों को ऊपर उठाना शुरू कर दिया, रोहन को और गहराई में उतरने का इशारा कर रही थी।
“और तेज़, रोहन! और तेज़!” नयना ने अपनी आँखें बंद करके चिल्लाया।
रोहन ने उसकी बात मानी और अपनी गति बढ़ा दी। पलंग चरमरा रहा था, जैसे वह भी उनके प्रेम की अग्नि में जल रहा हो। कुछ ही देर में, नयना के शरीर में एक तेज़ कंपकंपी उठी, और वह रोहन को कसकर जकड़ते हुए चरमसुख को प्राप्त हुई। उसकी गर्माहट ने रोहन को भी अपनी चपेट में ले लिया, और वह भी एक गहरी आह के साथ नयना के भीतर ही चरमसुख की गहराई में डूब गया।
दोनों हाँफते हुए एक-दूसरे से लिपटे रहे। नयना ने अपनी आँखें बंद कर लीं, और रोहन ने उसे अपनी बाहों में कस लिया। यह सचमुच उनकी सुहागरात की अनकही बातें हिंदी में नहीं, बल्कि सीधे उनकी आत्माओं में दर्ज हो चुकी थीं, एक ऐसी रात जो उन्होंने एक-दूसरे को पूरी तरह से समर्पित कर दी थी। संतुष्टि और प्रेम की एक गहरी भावना ने पूरे कमरे को भर दिया था। वे अब सिर्फ़ दो शरीर नहीं, बल्कि एक आत्मा बन चुके थे।
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