रात के सन्नाटे में, जब शहर की धड़कनें भी धीमी पड़ जाती थीं, प्रिया के होठों की मदहोश कर देने वाली गर्माहट ने राहुल को झकझोर दिया। उनका छोटा-सा बेडरूम आज फिर किसी गुप्त स्वर्ग-धाम सा महसूस हो रहा था, जहाँ सिर्फ उनकी साँसें और धड़कनें गूँजती थीं। प्रिया ने राहुल की कमीज़ के बटन खोलते हुए अपने नाखूनों से उसकी छाती पर हल्की-सी खरोंच लगाई। राहुल सिहर उठा और प्रिया को अपनी बाहों में कस लिया। “तुम्हारी यह नशीली अदा…” राहुल ने फुसफुसाया और प्रिया के गर्दन पर अपनी ज़ुबान फेरी। प्रिया ने गहरी साँस ली, उसकी साड़ी का पल्लू कब ज़मीन पर गिरा, उसे ख़ुद भी पता न चला। उनके बदन एक-दूसरे को छूने को बेताब थे। राहुल ने प्रिया की ब्रा की स्ट्रैप हटाई और उसके सुडौल स्तनों को अपनी हथेलियों में भर लिया। प्रिया की आह उसके गले से निकली, जब राहुल ने एक निप्पल को अपने मुँह में लिया और धीरे-धीरे उसे चूसने लगा।
प्रिया ने राहुल के बालों को अपनी मुट्ठी में भींच लिया और उसके कानों में कहा, “आज कोई जल्दी नहीं, बस मुझमें खो जाओ।” राहुल ने अपनी उँगलियाँ प्रिया की जाँघों पर फिराईं, साड़ी और पेटीकोट के नीचे से वो उसकी नरम त्वचा को महसूस कर रहा था। उसकी उँगलियाँ धीरे-धीरे ऊपर सरकती गईं, जब तक वो प्रिया की योनि के द्वार पर न पहुँच गईं। प्रिया का बदन काँप उठा। उसकी साँसें तेज़ हो गईं। राहुल ने अपनी एक उँगली अंदर डाली, और प्रिया के मुँह से सिसकारी निकली। “और… और तेज़,” प्रिया ने राहुल के कंधे पर दाँत गड़ाते हुए कहा।
राहुल ने उसकी सलवार उतारी और फिर प्रिया की योनि पर झुक गया। उसकी गर्म ज़ुबान ने प्रिया के अंतरंग भाग को छूते ही प्रिया के शरीर में एक अजीब-सी सिहरन दौड़ गई। राहुल ने बड़े ही प्यार से, और फिर ज़ोर-ज़ोर से प्रिया की योनि को चाटना शुरू किया। प्रिया का बदन मचल उठा, उसकी कमर अपने आप ही ऊपर उठने लगी। “आह राहुल… तुम… तुम मुझे पागल कर दोगे।” उसकी आवाज़ कामुकता से भरी थी।
कुछ देर बाद, राहुल ने ऊपर उठकर अपनी पैंट उतारी। उसका कठोर लिंग प्रिया की आँखों के सामने था, जो उससे मिलने को बेताब था। प्रिया ने अपनी टाँगें फैलाईं और राहुल को अपनी ओर खींचा। जैसे ही राहुल ने प्रवेश किया, प्रिया के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली चीख़ निकली। उनकी शादी को कुछ साल हो गए थे, लेकिन **शादी के बाद भी जारी इश्क** की यह आग हर गुज़रते दिन के साथ और भड़कती जा रही थी। हर बार ऐसा लगता था, जैसे वे पहली बार मिल रहे हों, पहली बार एक-दूसरे में समा रहे हों।
राहुल ने अपनी गति बढ़ाई। कमरे में सिर्फ़ उनके धक्कों की आवाज़ें, प्रिया की मदहोश कर देने वाली आहें और राहुल की गहरी साँसें थीं। प्रिया अपनी कमर उठाकर उसका पूरा साथ दे रही थी। उसके बाल बिखरे हुए थे, चेहरा पसीने से भीगा हुआ, लेकिन आँखों में गहरा जुनून था। वे एक-दूसरे को चूम रहे थे, एक-दूसरे को काट रहे थे, एक-दूसरे की रग-रग में उतर रहे थे। हर धक्का उन्हें और क़रीब ला रहा था, उनकी आत्माओं को एक कर रहा था।
“राहुल… आह… मैं… मैं नहीं सँभल पा रही…” प्रिया की आवाज़ टूट रही थी। राहुल ने अपनी सारी ताक़त एक-एक धक्के में उड़ेल दी। “तुम मेरी हो, सिर्फ़ मेरी!” राहुल ने गरजते हुए कहा और अपनी पूरी गहराई से प्रिया के भीतर उतर गया। उनके शरीर एक-दूसरे से चिपक गए, पसीना बह रहा था, लेकिन उन्हें कोई परवाह नहीं थी। **शादी के बाद भी जारी इश्क** ने उन्हें आज फिर उस चरम पर पहुँचाया था, जहाँ दुनिया का कोई और रिश्ता नहीं पहुँच सकता था।
एक साथ, एक ही पल में, दोनों ने चरम सुख की गहराइयों को छुआ। प्रिया ने राहुल को कसकर पकड़ लिया और उसके नाम का उच्चारण किया। राहुल ने अपना सारा प्रेम, सारा जुनून प्रिया के भीतर उड़ेल दिया। वे कुछ देर तक वैसे ही एक-दूसरे में समाए रहे, उनकी साँसें धीरे-धीरे सामान्य हो रही थीं। प्रिया ने राहुल के माथे पर चूमते हुए कहा, “हमारा यह **शादी के बाद भी जारी इश्क** ही हमारी सबसे बड़ी दौलत है।” राहुल ने उसे अपनी बाहों में और कस लिया। रात अभी बाक़ी थी, और उनके जुनून की कहानियाँ अभी और लिखी जानी थीं।
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