अकेली लड़की का रात का सफर: अँधेरी रात में देह का मिलन

गाँव की सूनी पगडंडी पर रोशनी के कदम लड़खड़ा रहे थे, हर आहट पर दिल एक अंजानी धड़कन के साथ उछल रहा था। आस-पास घना अँधेरा और नीम के पेड़ों से आती ठंडी हवा उसके खुले बदन को छूकर एक सिहरन पैदा कर रही थी। आज अकेली लड़की का रात का सफर कुछ ज़्यादा ही लम्बा और भयावह लग रहा था। वह अपने बुआ के घर से लौट रही थी और गाँव के इस सुनसान रास्ते पर रात के दस बज चुके थे। उसके आँचल से ढका सीना डर और एक अजीब सी उत्तेजना से बार-बार ऊपर-नीचे हो रहा था। उसके भीतर एक आग सुलग रही थी, एक ऐसी आग जिसे बुझाने वाला कोई नहीं था।

अचानक झाड़ियों के पीछे से एक भारी आवाज़ आई, “रोशनी, इतनी रात गए कहाँ से आ रही हो?”

रोशनी का कलेजा मुँह को आ गया। उसने पलटा तो सामने अर्जुन खड़ा था, गाँव का वह नौजवान जिसकी मर्दानगी और आँखों की शरारत गाँव भर में मशहूर थी। उसके हाथ में एक टॉर्च थी, जिसकी रोशनी रोशनी के चेहरे और फिर उसके उतार-चढ़ाव भरे बदन पर घूम रही थी।

“मैं… मैं बुआ के घर से आ रही हूँ, अर्जुन भैया,” रोशनी ने सहमे स्वर में कहा।

अर्जुन ने एक कामुक मुस्कान दी। “भैया? इस सुनसान रात में भैया नहीं, साथी की ज़रूरत पड़ती है, रोशनी।” उसकी आवाज़ में एक गहरा नशा था।

रोशनी की साँसें तेज़ हो गईं। वह जानती थी अर्जुन की नियत क्या है, और उसके बदन में एक ठंडी लहर दौड़ गई। डर के साथ-साथ एक अनजानी सी चाहत भी उसके रोम-रोम को छू रही थी। वह इस अकेली लड़की का रात का सफर कैसे पूरा करेगी?

अर्जुन उसके करीब आया, उसकी साँसों की गरमाहट रोशनी के बदन से टकराई। “डरो मत, मैं तुम्हें घर छोड़ दूँगा।”

उसके हाथ ने धीरे से रोशनी की पीठ को छुआ। यह स्पर्श केवल एक हाथ नहीं था, यह वासना की एक गर्म लहर थी जो रोशनी की रीढ़ की हड्डी से सीधे उसके गुप्त अंगों तक पहुँच गई। रोशनी सिहर उठी, उसकी आँखें अपने आप बंद हो गईं।

“चलो, पास की वह पुरानी झोपड़ी तक चलते हैं, वहाँ से रास्ता कम अँधेरा है,” अर्जुन ने फुसलाया और रोशनी को लगभग खींचता हुआ ले गया। झोपड़ी के पास पहुँचते ही उसने रोशनी को अपनी बाहों में भर लिया। रोशनी ने विरोध करना चाहा, पर उसके बदन ने साथ नहीं दिया। अर्जुन के होंठ उसके गालों से होते हुए गर्दन पर उतर आए। “कितनी प्यासी हो तुम, रोशनी,” अर्जुन ने फुसफुसाते हुए उसके कान में कहा।

रोशनी के पूरे बदन में बिजली सी दौड़ गई। उसकी छाती तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रही थी। अर्जुन के मजबूत हाथ उसके पतले कमर को जकड़ रहे थे। उसने रोशनी के आँचल को एक झटके में हटा दिया। रोशनी के उभरे हुए स्तन उसके सामने थे, उनकी नोकें ठंड और उत्तेजना से कड़क हो चुकी थीं।

“आह!” रोशनी के मुँह से एक धीमी सिसकी निकली जब अर्जुन ने उसके होंठों को अपने होंठों में कैद कर लिया। यह एक जंगली, बेताब चुंबन था जिसने उसकी सारी चेतना छीन ली। उसकी ज़ुबान अर्जुन की ज़ुबान से टकराई, और वह एक गहरा स्वाद चख रही थी।

अर्जुन ने उसे झोपड़ी के अंदर ज़मीन पर बिछाया। रोशनी की साड़ी धीरे-धीरे उसके बदन से अलग होने लगी। उसने अपनी आँखें बंद कर लीं, अपनी लाज खोने की बजाय एक नई तरह की मुक्ति महसूस कर रही थी। अर्जुन की नज़रें उसके हर अंग पर घूम रही थीं, जैसे कोई भूखा शिकारी अपने शिकार को देख रहा हो। उसने रोशनी की जाँघों को सहलाया, जो काँप रही थीं।

“तुम कितनी सुंदर हो, रोशनी,” अर्जुन ने गरजा।

उसके हाथ रोशनी के स्तनों पर पहुँच गए। वह उन्हें मसलने लगा, उनकी कड़क नोकों को अपनी उँगलियों से निचोड़ने लगा। रोशनी के मुँह से दर्द और आनंद की चीखें एक साथ निकल रही थीं।

“और यहाँ…” अर्जुन ने कहा और उसके हाथ रोशनी के गुप्त स्थान पर पहुँच गए। रोशनी की योनि गीली हो चुकी थी, प्यास से तड़प रही थी। अर्जुन ने उसकी योनि के द्वार को सहलाया, अपनी उंगलियों से उसे खोलने लगा।

रोशनी का बदन एक आग के गोले में बदल गया था। वह बेकाबू होकर अर्जुन की कमीज़ को खींच रही थी। अर्जुन ने एक ही झटके में अपनी पैंट खोली और उसका मजबूत लिंग बाहर आ गया, रात के अँधेरे में भी उसका आकार साफ दिख रहा था।

रोशनी ने आँखें खोलीं और उसकी आँखों में एक नई चमक थी – वासना की चमक।

“तैयार हो?” अर्जुन ने पूछा, उसकी आवाज़ मोटी और कामुक थी।

रोशनी ने केवल सिर हिलाया, उसकी साँसें अटक चुकी थीं।

अर्जुन ने अपने लिंग को रोशनी की योनि के द्वार पर रखा। रोशनी ने अपनी जाँघें फैलाईं, उसे अंदर लेने के लिए तैयार थी। एक गहरे धक्के के साथ, अर्जुन अंदर समा गया। “आहहह!” रोशनी की चीख पूरी झोपड़ी में गूँज उठी, दर्द और असीम आनंद का मिश्रण। अर्जुन ने उसे कसकर पकड़े रखा, उसकी हर हरकत रोशनी को एक नए संसार में ले जा रही थी।

वह ऊपर-नीचे होने लगा, उसकी हर धड़कन रोशनी के भीतर गहराई तक महसूस हो रही थी। रोशनी भी अपनी कमर हिलाकर उसका साथ दे रही थी। उनके बदन पसीने से भीग चुके थे, और उनकी कामुक आवाज़ें रात की खामोशी को चीर रही थीं।

“और तेज़… और गहरा,” रोशनी हाँफते हुए बोली, उसकी आँखें छत पर टिकी थीं। अर्जुन ने उसकी बात मानी, उसकी गति और तेज़ हो गई। उनके शरीर एक-दूसरे से टकरा रहे थे, मांस के मिलने की आवाज़ साफ़ सुनाई दे रही थी।

कुछ ही पलों में, रोशनी का बदन काँपने लगा। उसके अंदर एक तेज़ करंट दौड़ा और वह चरम सुख की अनुभूति में चीख उठी। अर्जुन ने भी अपने आपको ढीला छोड़ दिया, उसके भीतर का सारा रस रोशनी की कोख में समा गया। दोनों हाँफते हुए एक-दूसरे से लिपटे रहे, उनके बदन की आग अभी भी धधक रही थी।

रात का सफर अब भी जारी था, पर अब वह पहले जैसा नहीं था। अर्जुन ने उसे उठाया, उसके बिखरे बालों को सहलाया। रोशनी की आँखों में अब डर नहीं, बल्कि एक असीम तृप्ति और शरारत थी।

“घर तक छोड़ दूँ?” अर्जुन ने मुस्कुराते हुए पूछा।

रोशनी ने भी मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “आज अकेली लड़की का रात का सफर अधूरा नहीं रहा, अर्जुन।”

वह जानती थी कि यह अकेली लड़की का रात का सफर उसकी रूह में एक ऐसी छाप छोड़ गया था, जो ज़िंदगी भर उसके साथ रहेगी, और शायद किसी और रात के सफर की चाहत भी जगा गया था।

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