आज की उमस भरी दोपहर में प्रिया की साड़ी का पल्लू भी उसके बदन से चिपक कर उसे और मदहोश बना रहा था। रसोई में काम करते हुए उसकी गोरी पीठ से पसीने की बूँदें सरकती, उसकी कमर की गहराइयों में समा जातीं। राहुल वहीं चौखट पर खड़ा उसे निहार रहा था, उसकी आँखें प्रिया की हर हरकत पर टिकी थीं। भाभी का झुकना, उठना, उसकी साड़ी का सरकना, सब राहुल के भीतर एक आग सुलगा रहा था। यह आग कोई नई नहीं थी; गाँव के इस घर में देवर भाभी का छुप-छुप कर रोमांस पिछले कई महीनों से सुलग रहा था।
“भाभी, इतनी गर्मी में भी काम कर रही हो? थोड़ा आराम कर लो,” राहुल की आवाज़ में एक अजीब-सी नमी थी।
प्रिया ने पलटकर देखा। उसकी पलकें झुकी हुई थीं, होंठों पर हल्की सी मुस्कान। “अरे राहुल, तुम कब आए? कुछ नहीं, बस खाना बना रही थी।”
“खाना तो बन जाएगा… पर तुम इतनी सुंदर दिख रही हो कि मन करता है बस देखता ही रहूँ,” राहुल ने धीरे से कहा, एक कदम आगे बढ़ते हुए।
प्रिया का दिल धक-धक करने लगा। उसे पता था राहुल क्या चाहता है, और शायद वह खुद भी यही चाहती थी। उसके पति, राहुल के बड़े भाई, शहर गए हुए थे और आज रात लौटने वाले नहीं थे। यह उनके लिए एक सुनहरा अवसर था।
राहुल प्रिया के पास आया और धीरे से उसकी कमर पर अपना हाथ रख दिया। प्रिया सिहर उठी। उसकी साँसें तेज हो गईं। राहुल ने उसे अपनी ओर खींचा। “भाभी, कब तक यह आग दबा कर रखोगी?” उसने प्रिया के कान में फुसफुसाते हुए कहा, उसके होंठ प्रिया की गर्दन पर सरकने लगे।
प्रिया ने अपनी आँखें बंद कर लीं। उसका शरीर राहुल के स्पर्श के लिए तरस रहा था। “राहुल… कोई देख लेगा,” उसने लड़खड़ाती आवाज़ में कहा, लेकिन उसके विरोध में कोई दम नहीं था।
“आज कोई नहीं देखेगा,” राहुल ने उसे बाहों में भरकर सीधे बेडरूम की ओर ले जाते हुए कहा।
बेडरूम का दरवाज़ा बंद होते ही, राहुल ने प्रिया को दीवार से सटा लिया। उसके होंठ प्रिया के नरम होंठों पर टूट पड़े। यह एक भूखा, बेताब चुंबन था, जिसमें सालों की दबी हुई इच्छाएँ बाहर आ रही थीं। प्रिया ने भी अपना पूरा साथ दिया, उसके हाथों ने राहुल की पीठ को कसकर पकड़ लिया। उनकी जीभें आपस में टकराईं, एक-दूसरे के स्वाद को चखती रहीं। राहुल के हाथ तेज़ी से प्रिया की साड़ी खोलने लगे। एक-एक परत उतरती गई और प्रिया का गोरा बदन उसके सामने आता गया। उसके ब्लाउज के बटन खुलते ही, प्रिया के भरे-पूरे वक्ष राहुल की आँखों के सामने थे।
“भाभी, तुम कितनी सुंदर हो,” राहुल ने उनके गुलाबी निप्पलों को सहलाते हुए कहा। प्रिया ने एक गहरी आह भरी, उसकी आँखें मदहोशी में बंद हो गईं।
राहुल ने प्रिया को बिस्तर पर धकेला और उसके ऊपर आ गया। उसके कपड़े भी जल्दी ही उतर चुके थे। दोनों के नंगे बदन एक-दूसरे से चिपक गए, पसीना उनकी त्वचा को और फिसलन भरा बना रहा था। राहुल ने प्रिया की जांघों को फैलाया और धीरे से उसके भीतर प्रवेश किया। प्रिया की एक गहरी चीख उसके मुँह से निकली, जिसमें दर्द से ज़्यादा सुख था। उनकी साँसें तेज़ हो गईं, कमरा उनके शरीर के टकराने की आवाज़ और प्रिया की सुखद आहों से गूँज उठा। देवर भाभी का छुप-छुप कर रोमांस अब पूरी तरह से खुलकर अपनी चरम सीमा पर था। राहुल ने अपनी गति तेज़ की, प्रिया भी उसके साथ पूरी तरह से तालमेल बिठा रही थी। उनकी इच्छाएं एक-दूसरे में समा गईं, एक तूफानी लहर की तरह वे दोनों एक साथ सुख के सागर में डूब गए।
कुछ देर बाद, जब उनके शरीर शांत हुए, तो वे एक-दूसरे की बाहों में लिपटे हुए थे। प्रिया ने राहुल के सीने पर अपना सिर रखा और उसकी साँसों को महसूस किया। यह सिर्फ़ एक शारीरिक मिलन नहीं था, बल्कि दो दिलों की एक गुपचुप चाहत का इज़हार था। राहुल ने उसके माथे को चूमा। “यह हमारा राज़ है, भाभी।”
प्रिया ने मुस्कुराते हुए ऊपर देखा। उसकी आँखों में एक नई चमक थी, एक नया संतोष। “हमारा अपना… गरमा गरम राज़,” उसने फुसफुसाया, और राहुल ने उसे फिर से अपनी बाहों में कस लिया, यह जानते हुए कि इस देवर भाभी का छुप-छुप कर रोमांस अभी शुरू ही हुआ था।
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