देवर भाभी का छुप-छुप कर रोमांस: मर्यादा तोड़ती प्यासी रातें

आज फिर उसकी साड़ी का पल्लू सरक कर कमर से नीचे आ गिरा था, और रोहन की आँखें वहीं अटक गई थीं। दोपहर की तपती गर्मी में गाँव के घर में सब सो रहे थे। सिर्फ़ आँगन में देवी, उसकी भाभी, अपनी गीली साड़ी में कुछ बर्तन माँज रही थी, और रोहन, जो खूँटी पर टँगी अपनी कमीज़ लेने आया था, उस दृश्य में जैसे थम सा गया था। देवी की कमर का वो गड्ढा, उसकी भीगी साड़ी से झाँकती उसकी भरी हुई जाँघें… रोहन का गला सूख गया। यह देवर भाभी का छुप-छुप कर रोमांस अब उन्हें अपनी गिरफ्त में पूरी तरह ले चुका था।

देवी ने मुड़कर देखा तो रोहन को खड़ा पाया। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी जो देवी से छिपी नहीं थी। देवी के गाल हल्के से गुलाबी हो उठे। “क्या हुआ देवर जी? कुछ चाहिए?” उसने अपनी आवाज़ में शरारत दबाते हुए पूछा।

“नहीं… वो… मैं अपनी कमीज़ लेने आया था,” रोहन ने हकलाते हुए कहा, मगर उसकी नज़रें अब भी देवी पर ही टिकी थीं। देवी ने जानबूझकर पानी का एक लोटा उठाया और जैसे ही वह मुड़ी, उसका बदन रोहन के बदन से छू गया। गीली साड़ी का ठंडापन और उसके अंदर का गर्म बदन, दोनों को एक अजीब सी सिहरन दे गया।

“आह!” देवी के मुँह से हल्की सी चीख़ निकली, जैसे कि वह लोटा उसके हाथ से फिसलने वाला था। रोहन ने झट से उसके हाथ को थाम लिया। उनके हाथ मिले और एक बिजली सी दौड़ गई। रोहन की उँगलियाँ देवी की कलाई से ऊपर उसकी बाँह तक सरक गईं। देवी ने आँखें बंद कर लीं, उसकी साँसें तेज़ हो गईं।

“माफ़ करना भाभी, मुझे लगा कि लोटा गिर जाएगा,” रोहन ने फुसफुसाते हुए कहा, उसका मुँह देवी के कान के क़रीब था। उसकी गर्म साँसें देवी की गर्दन पर एक अजीब सी गुदगुदी कर रही थीं। देवी का दिल ज़ोरों से धड़क रहा था। उसने अपनी पलकें खोलीं और रोहन की आँखों में देखा। उन आँखों में प्यास थी, इंतज़ार था, और एक अनकहा न्योता था।

देवी ने बिना कुछ कहे, धीरे से अपना सिर हिलाया और रोहन का हाथ पकड़कर अंदर के कमरे की तरफ़ बढ़ने लगी। यह वही कमरा था जहाँ अक्सर घर का कोई न कोई सो रहा होता था, पर इस वक़्त वहाँ सन्नाटा था। उसने दरवाज़ा अंदर से बंद किया और रोहन की तरफ़ मुड़ी।

रोहन ने एक पल की भी देर न की। उसने अपनी भाभी के होंठों को अपने होंठों में भर लिया। वह भूखे भेड़िए की तरह टूट पड़ा था, सारी मर्यादाएँ, सारे संकोच भूलकर। देवी ने भी अपनी आँखें बंद कर लीं और पूरी शिद्दत से इस चुंबन का जवाब दिया। उनके होंठ एक-दूसरे की प्यास बुझाने को आतुर थे, एक-दूसरे का स्वाद चखने को बेताब। रोहन के हाथ उसकी कमर पर सरके और उसने देवी को अपनी तरफ़ खींच लिया। देवी का भरा हुआ वक्षस्थल रोहन की छाती से सट गया।

एक पल में ही देवी की गीली साड़ी उसके बदन से फिसल कर ज़मीन पर गिर गई। उसके नीचे सिर्फ़ एक पतला ब्लाउज़ और पेटीकोट था। रोहन ने बेताबी से उसके ब्लाउज़ के हुक खोले, और जैसे ही वह खुला, देवी के भरे-भरे स्तन आज़ाद होकर रोहन की आँखों के सामने आ गए। रोहन ने उन्हें दोनों हाथों में भर लिया, उसकी उँगलियाँ उनके सख्त निप्पलों पर घूमते ही देवी के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली आह निकली।

“रोहन…” देवी ने फुसफुसाते हुए उसका नाम पुकारा।

रोहन ने भी अपनी कमीज़ और पैंट उतार फेंकी। अब दोनों बदन पूरी तरह से एक-दूसरे के सामने थे, बिना किसी परदे के, बिना किसी रोक-टोक के। रोहन ने देवी को बिस्तर पर धकेला और उसके ऊपर आ गया। उसकी उँगलियाँ देवी की जाँघों के बीच की गरमाहट महसूस कर रही थीं। देवी ने अपनी जाँघें खोल दीं, उसे अपने अंदर बुलाते हुए।

“आज तक कभी इतनी प्यास नहीं लगी थी, भाभी,” रोहन ने कहा, उसकी आवाज़ भारी थी।

“और आज तक कभी इस प्यास को बुझाने की हिम्मत नहीं हुई थी, देवर जी,” देवी ने जवाब दिया, उसकी आँखों में अब शर्म नहीं, बल्कि गहरा प्रेम और वासना थी।

रोहन ने एक गहरा धक्का दिया और देवी के मुँह से एक मीठी सी चीख़ निकली। वह अंदर तक हिल गई थी। रोहन धीरे-धीरे गति बढ़ाने लगा, और हर धक्के के साथ देवी के बदन में एक नई आग सी लग रही थी। वह अपनी कमर उठाकर उसका साथ दे रही थी, उसे अपने अंदर और गहरा समाने को कह रही थी। कमरे में सिर्फ़ उनके बदन के टकराने की आवाज़ें थीं, और उनकी मदहोश कर देने वाली आहें और सिसकारियाँ। जैसे ही रोहन ने अपनी गति बढ़ाई, देवी ने सोचा, ‘यही तो है देवर भाभी का छुप-छुप कर रोमांस का असली नशा’।

कई देर तक उनके बदन एक-दूसरे में खोए रहे। जब सब शांत हुआ तो दोनों थककर चूर हो चुके थे, मगर उनके चेहरों पर एक अजीब सी तृप्ति थी। वे एक-दूसरे की बाहों में थे, उनकी साँसें तेज़ी से चल रही थीं। उनके देवर भाभी का छुप-छुप कर रोमांस की चिंगारी अब एक जलते हुए अलाव में बदल चुकी थी। उनके बीच अब एक गहरा, अनकहा वादा था – उस प्यार का, उस वासना का, जो अब हर चोरी-छिपे मौक़े पर ऐसे ही मर्यादाओं की दीवार तोड़ती रहेगी। अगली बार की प्रतीक्षा में, दोनों ने एक-दूसरे को और कसकर गले लगा लिया।

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