अपर्णा की देह में आज एक ऐसी अग्नि धधक रही थी, जिसकी तपिश ने उसे बरसों से नहीं छुआ था। उसकी अधेड़ उम्र की आँखों में एक अजीब सी चमक थी, एक हसरत जो अब तक सिर्फ खामोश रातों की साथी थी। पिछले कुछ महीनों से, जब से नया लड़का रोहन उनके पड़ोस में रहने आया था, अपर्णा की ज़िंदगी में एक मीठी बेचैनी घुल गई थी। रोहन, अपनी मस्कुलर काया और तीखी नज़रों से, अक्सर अपर्णा के आँचल को ताड़ जाता, और उसकी युवा, मदमस्त चाल अपर्णा के दिल में जाने कितने तूफ़ान उठा देती।
आज शाम, बालकनी में खड़े होकर, अपर्णा ने देखा कि रोहन अपनी शर्ट उतारकर पौधों को पानी दे रहा था। उसकी मजबूत पीठ, कसे हुए बाज़ू, और पसीने से भीगी त्वचा पर सूरज की रोशनी एक अद्भुत नशा पैदा कर रही थी। अपर्णा की साँसें तेज़ हो गईं। उसने महसूस किया कि उसकी देह के हर रेशे में एक अनजान सी चाहत कुलबुला रही है। यह अधेड़ उम्र की औरत का नया रोमांस था, जिसे वो खुद भी पूरी तरह समझ नहीं पा रही थी।
जैसे ही रोहन ने घूमकर अपर्णा को देखा, उसकी आँखों में एक शरारती मुस्कान तैर गई। “शाम हो गई अपर्णा जी, आपकी बालकनी की रोशनी तो अभी तक नहीं जली,” उसने मुस्कुराते हुए कहा।
अपर्णा के गाल गुलाबी हो गए। “ओह, मैं ध्यान ही नहीं दे पाई,” उसने धीरे से कहा, उसकी आवाज़ में एक अजीब सी लज्जा थी।
“अकेली हैं आप?” रोहन ने पूछा, उसकी आवाज़ में एक गहरा अर्थ था।
“हाँ,” अपर्णा ने फुसफुसाते हुए कहा।
“क्या मैं ऊपर आ सकता हूँ, एक कप चाय के लिए?” रोहन ने सीधे पूछा, उसकी आँखों में एक निमंत्रण था जिसे अपर्णा चाहकर भी ठुकरा नहीं पाई।
कुछ ही पलों में, रोहन अपर्णा के घर में था। घर की धीमी रोशनी और हवा में फैली चमेली की खुशबू ने एक मादक माहौल बना दिया था। चाय तो बस एक बहाना थी। उनकी आँखें एक-दूसरे से मिलीं, और उस पल दोनों को पता था कि अब कुछ भी साधारण नहीं रहने वाला। रोहन धीरे से उठा और अपर्णा के पास आया, जो सोफे पर बैठी थी। उसने झुककर अपर्णा के गाल को हल्के से छुआ। अपर्णा की देह में एक सिहरन दौड़ गई।
“आप बहुत खूबसूरत हैं, अपर्णा जी,” रोहन ने उसकी कान के पास फुसफुसाया।
अपर्णा ने अपनी आँखें बंद कर लीं, उसकी देह अब रोहन के स्पर्श की प्यासी थी। रोहन ने धीरे-धीरे अपने होंठ अपर्णा के होंठों पर रख दिए। यह एक नरम शुरुआत थी, जो पल भर में एक गहन, वासनामय चुंबन में बदल गई। अपर्णा ने अपने हाथ रोहन की गर्दन में डाल दिए, और उसे अपनी ओर खींच लिया, जैसे वर्षों की प्यास बुझाने को बेताब हो। उनके होंठ, जीभ, और साँसें एक-दूसरे में घुल गईं।
रोहन ने अपर्णा को अपनी बाहों में उठा लिया, उसकी मजबूत पकड़ अपर्णा को सुरक्षित और उत्तेजित महसूस करा रही थी। उसने उसे बेडरूम की ओर ले जाकर बिस्तर पर धीरे से लिटा दिया। अपर्णा की साड़ी के पल्लू को रोहन ने बड़े प्यार से हटाया, और फिर उसके ब्लाउज के बटन खोलने लगा। जैसे ही उसका खुला बदन रोहन की नज़रों के सामने आया, अपर्णा की दबी हुई आह निकल पड़ी। रोहन की आँखों में वासना और श्रद्धा का एक अनूठा मेल था।
“आपकी ये जवानी, ये सुडौल काया,” रोहन ने फुसफुसाया, उसके हाथ अपर्णा के स्तन पर पहुँच गए। अपर्णा के रोम-रोम में आग लग गई। उसने रोहन के सिर को अपने वक्षों पर दबा लिया, उसकी उंगलियाँ रोहन के घने बालों में उलझ गईं। रोहन ने उसके निप्पल्स को अपने मुँह में लिया, और एक जंगली आह अपर्णा के गले से निकली। सालों से जिस सुख से वो वंचित थी, आज वो उसे पूरी शिद्दत से महसूस कर रही थी।
रोहन ने अपनी शर्ट उतारी, फिर अपनी पैंट भी उतार दी। अपर्णा ने रोहन की युवा, मजबूत काया को पहली बार इतने करीब से देखा था। उसकी आँखें चमक उठीं। रोहन ने अपनी जीभ से अपर्णा के पेट, जांघों और अंततः उसकी योनि के द्वार पर एक रास्ता बनाया। अपर्णा अपने बिस्तर पर छटपटा उठी, उसके शरीर के हर अंग से एक गहरी, मीठी पीड़ा और आनंद का मिलाप हो रहा था। उसकी योनि रोहन की हर हरकत से गीली होती जा रही थी।
जब रोहन ने धीरे-धीरे अपना लिंग उसकी योनि में उतारा, तो अपर्णा ने एक गहरी, संतोष भरी चीख निकाली। यह अधेड़ उम्र की औरत का नया रोमांस था, जो उसे उसकी देह की सबसे गहरी इच्छाओं से मिला रहा था। रोहन ने धीमे-धीमे गति पकड़ी, और अपर्णा ने भी अपनी कमर उठाई, उसके साथ ताल मिलाने लगी। कमरे में सिर्फ उनके शरीर के टकराने की आवाज़ें, उनकी साँसें और आनंद की चीखें गूँज रही थीं। हर धक्का अपर्णा को स्वर्ग के करीब ले जा रहा था। उसकी आँखों में आँसू थे, पर ये खुशी और परम आनंद के आँसू थे।
कई देर तक उनका यह प्रेम-क्रीड़ा चलता रहा, जब तक कि दोनों ने एक साथ चरम सुख का अनुभव नहीं किया। अपर्णा, रोहन की बाहों में निढाल पड़ी थी, उसकी देह पूरी तरह तृप्त और शांत थी। उसके होंठों पर एक संतोष भरी मुस्कान थी। यह सिर्फ एक मुलाकात नहीं थी, यह एक नया अध्याय था, एक अधेड़ उम्र की औरत का नया रोमांस, जो उसकी सूनी ज़िंदगी में जवानी का जोश और प्यार का बेमिसाल अहसास भर गया था। रोहन ने उसके माथे पर एक प्यार भरा चुंबन दिया। अपर्णा जानती थी कि अब उसकी रातें कभी अकेली नहीं रहेंगी, और उसकी देह की यह प्यास अब हमेशा रोहन ही बुझाएगा।
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