उस दोपहर की तपती धूप में नीलम ने अपनी सूनी देह में एक अनजानी सरसराहट महसूस की, जब युवा करण उसकी चौखट पर खड़ा था। चालीस बसंत देख चुकी नीलम, जिसकी ज़िंदगी पति के निधन के बाद से ठहरी हुई थी, उसने करण की आँखों में एक ऐसी आग देखी जो उसकी अपनी बुझती उम्मीदों को फिर से सुलगा सकती थी। करण, पड़ोस में नया आया था और उसके घर में नल ठीक करने आया था। उसका गठीला बदन, आँखों में शरारत और होठों पर मंद-मंद मुस्कान, नीलम के दिल के बंद दरवाजों को जैसे खटखटा रही थी।
नल तो पल भर में ठीक हो गया, मगर करण का घर में ठहरना कुछ देर के लिए बढ़ गया। बातों ही बातों में उनकी आँखें मिलीं, और उन नज़रों के अदृश्य धागे नीलम की ठंडी रगों में एक अजीब-सी गर्मी दौड़ा गए। “अधेड़ उम्र की औरत का नया रोमांस”, यह शब्द नीलम के मन के किसी कोने में दबे पड़े थे, आज करण की मौजूदगी से वे अचानक जाग उठे थे। रात भर नीलम को नींद नहीं आई। उसके बदन का हर अंग एक अनकही प्यास से छटपटा रहा था। अगली शाम, जब करण काम के बहाने फिर उसके घर आया, तो नीलम ने जान-बूझकर साड़ी का पल्लू थोड़ा सरका लिया। उसकी गर्दन पर उभरी नमी और गहरी होती साँसों को करण ने महसूस किया। उसकी आँखों में चमक और गहरी हो गई।
करण ने नीलम का हाथ धीरे से अपने हाथ में लिया। बिजली का एक ऐसा तीव्र झटका नीलम के पूरे बदन में दौड़ा कि उसकी आँखें क्षण भर के लिए बंद हो गईं। करण ने उसे अपने करीब खींचा। उनकी साँसें आपस में घुलने लगीं। करण के होंठ नीलम के होंठों पर आए, पहले हल्के से, फिर एक प्रचंड भूख की तरह उन्हें चूसने लगे। नीलम की सारी झिझक, उसकी सारी बंदिशें जैसे पिघल गईं। उसके हाथ करण की मज़बूत पीठ पर कस गए। साड़ी कब ज़मीन पर गिरी, उन्हें पता ही नहीं चला। नीलम की आँचल से बेपरवाह छातियाँ करण के सामने उजागर थीं, और उसकी उँगलियाँ उन उभारों पर नाचने लगीं। नीलम के मुँह से सिसकियाँ निकल पड़ीं।
करण ने नीलम को अपनी बाहों में उठाया और सीधा बेडरूम में ले गया। धीमी रोशनी में नीलम का अधेड़ बदन एक जवाँ औरत की तरह दमक रहा था। करण ने धीरे-धीरे उसके शरीर को सहलाना शुरू किया, उसकी गर्दन से होता हुआ उसके पेट तक। नीलम का बदन थरथरा रहा था। करण ने उसके गुप्तांगों पर अपना हाथ रखा, और नीलम के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली चीख निकली। उसकी पुरानी प्यास जैसे आज पानी जा रही थी। करण ने उसे बिस्तर पर लिटाया, और फिर उसके ऊपर छा गया। उनके शरीर एक-दूसरे में समाने को बेताब थे।
जब करण ने अपने अंग को नीलम के भीतर उतारा, तो नीलम की आँखें बंद थीं और उसके होंठों पर एक संतोष भरी मुस्कान थी। वह पूरी तरह से करण में समा गई थी। हर धक्के के साथ, नीलम को लगा कि वह फिर से जवान हो रही है। उसकी देह का हर कण जैसे आज ही जन्मा था। करण की युवा शक्ति और नीलम की अनुभवी वासना एक अद्भुत संगम बना रही थी। कमरे में साँसों की गरमी, शरीर के टकराने की आवाज़ें और नीलम की मदहोश कर देने वाली सिसकियाँ गूँज रही थीं। “आह… करण… और… गहरा…”, नीलम फुसफुसाई, उसकी आवाज़ में दर्द नहीं, बल्कि एक असीम आनंद था। यह था **अधेड़ उम्र की औरत का नया रोमांस**; एक ऐसा अहसास जो उसकी कल्पना से भी परे था। वे कई घंटों तक एक-दूसरे में लीन रहे, एक-दूसरे को अपनी वासना की आग में झुलसाते रहे।
जब वे थके-हारे एक-दूसरे की बाहों में पड़े थे, नीलम ने करण के माथे को चूमा। उसकी आँखों में कृतज्ञता थी, और उसके बदन में एक अभूतपूर्व शांति। उसने अपनी खोई हुई जवानी, अपनी बुझी हुई आग को आज फिर से पा लिया था। करण ने उसके होंठों पर एक शरारती चुंबन दिया। उन्हें पता था कि यह सिर्फ़ एक शुरुआत थी, उनकी वासना की कहानियाँ अभी और लिखी जानी थीं। रात अभी भी जवान थी, और उनके दिल एक-दूसरे में पूरी तरह से खो चुके थे।
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