मीना की साड़ी का पल्लू सरका और उसकी निगाहें बरामदे में बैठे रवि के युवा, गठीले बदन पर जा ठहरीं। दोपहर की सुस्त धूप में रवि की पसीने से भीगी पीठ पर उसकी नजरें ठहर गईं, एक अज़ीब सी लहर उसके भीतर दौड़ी। पैंतालीस बसंत देख चुकी मीना ने कभी सोचा न था कि उसके सूखे पड़े मन में फिर से कोई नया अंकुर फूट पाएगा।
रवि, जो पास ही के मकान में नया किराएदार था, अक्सर मीना के छोटे-मोटे कामों में मदद कर देता था। कभी नल ठीक करना, कभी भारी सामान उठाना। उसकी मौजूदगी में एक नई, रोमांचक ऊर्जा थी, जो मीना के बेजान दिनों में घुलने लगी थी। आज रवि उनके आँगन में पौधों को पानी दे रहा था। उसके झुकने पर उसकी ट्राउज़र कमर से थोड़ी नीचे सरक जाती, एक आकर्षक दृश्य दिखाती। मीना के होंठ अनायास भींच गए।
“रवि, थोड़ा अंदर आओ। पानी पियोगे?” मीना की आवाज़ में एक अनकही पुकार थी।
रवि सीधा हुआ, उसकी आँखों में एक शरारती चमक थी जो मीना की ओर बढ़ी। “हाँ भाभी जी, ज़रूर।”
वह अंदर आया, उसके शरीर से आती मिट्टी और पसीने की मिली-जुली गंध मीना को मदहोश कर गई। मीना ने उसे ठंडा पानी दिया। जब रवि ने गिलास वापस किया, तो उसकी उंगलियां मीना की उंगलियों से छू गईं। यह स्पर्श बिजली के झटके सा था, जिसने मीना के पूरे बदन में सनसनी दौड़ा दी। दोनों की नज़रें मिलीं और उस एक पल में, एक मौन इकरार हो गया। अधेड़ उम्र की औरत का नया रोमांस अपनी शुरुआत के दहलीज पर खड़ा था।
मीना का दिल तेज़ी से धड़क रहा था। उसने सोचा, “यह क्या हो रहा है?” पर उसके शरीर की हर कोशिका इस नए अनुभव की तरफ खिंची जा रही थी। रवि ने साहस बटोरा, “भाभी जी, आपके पौधों को ठीक से लगाना है… क्या मैं ऊपर छत पर गमले रख दूँ?”
मीना ने सिर्फ सिर हिलाया। वह रवि के पीछे-पीछे सीढ़ियां चढ़ने लगी। रवि की चाल में एक आत्मविश्वास था, उसके मजबूत कंधे और कसे हुए नितम्ब मीना की आँखों के सामने थे। छत पर पहुँचते ही रवि ने एक गमला उठाया, और जैसे ही वह मुड़ा, मीना से टकरा गया। उसकी उंगलियां मीना की कमर पर टिक गईं, और मीना की सांसें अटक गईं। रवि की गर्म सांसें मीना की गर्दन पर महसूस हुई।
“माफ़ करना भाभी जी,” रवि ने फुसफुसाया, उसकी आवाज़ में एक अलग ही धुन थी।
मीना ने अपनी आँखें बंद कर लीं, उसकी देह थरथरा रही थी। वह जानती थी कि उसे रवि को रोकना चाहिए, पर उसके शरीर की हर इच्छा अब उसे आगे बढ़ने को कह रही थी। रवि ने अपनी उंगलियां मीना की कमर पर कस दीं और फिर धीरे से उन्हें उसके पल्लू के नीचे से, उसकी नग्न कमर पर सरका दिया। मीना की आह निकल गई।
उसने रवि को देखा, उसकी आँखों में गहरा जूनून था। बिना एक शब्द कहे, रवि ने मीना का हाथ पकड़ा और उसे खींचता हुआ बेडरूम की ओर ले चला। दरवाजा बंद होते ही, रवि ने मीना को दीवार से सटा लिया और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। एक तूफानी, बेताब चुंबन। मीना ने शुरुआत में हिचकिचाई, पर फिर उसके हाथ रवि की गर्दन में उलझ गए और वह भी उसी शिद्दत से जवाब देने लगी।
रवि के हाथ तेज़ी से मीना की साड़ी खोलने लगे। एक-एक करके परतें गिरीं, पेटीकोट और ब्लाउज भी उतर गए। मीना का खूबसूरत, भरा-भरा शरीर रवि की आँखों के सामने था। रवि ने उसे बिस्तर पर धकेला और उसके ऊपर आ गया। उसके होंठ मीना की गर्दन से होते हुए उसके उभारों तक पहुँच गए, जहाँ उसने उन्हें पूरी तरह से अपने मुंह में भर लिया। मीना की चीखें उसके होंठों से निकलती रहीं, एक नया सुख, एक नया आनंद।
रवि के हाथ अब उसकी जाँघों के बीच से होते हुए उसकी योनि तक पहुँच गए, जो अब पूरी तरह से गीली और प्यासी थी। उसने अपनी उंगलियों से उसे सहलाना शुरू किया, मीना की साँसें तेज़ हो गईं। उसने अपने शरीर को ऊपर उठाया, रवि की उंगलियों का दबाव पाकर वह एक अलग ही दुनिया में थी। अधेड़ उम्र की औरत का नया रोमांस अब अपने चरम पर था, वासना की सारी सीमाएँ टूट चुकी थीं।
रवि ने अपने कपड़े उतारे और मीना की भीगी योनि पर अपने लिंग को टिकाया। एक गहरी साँस लेकर, उसने धीरे-धीरे प्रवेश किया। मीना ने एक बार फिर आह भरी, एक मीठे दर्द और असीम सुख के मिश्रण से। रवि की हर गति मीना के भीतर एक नया तूफान ला रही थी। वह अपनी कमर को ऊपर उठाती, रवि को अपने भीतर और गहराई तक खींचती। उनके शरीर पसीने से लथपथ थे, एक-दूसरे में पूरी तरह से खोए हुए। कमरे में सिर्फ उनके जिस्मों के टकराने की आवाज़ और मीना की सुखभरी सिसकियाँ गूँज रही थीं।
कुछ देर बाद, जब दोनों थक कर एक-दूसरे की बाहों में ढीले पड़ गए, मीना ने रवि को कसकर गले लगा लिया। उसका चेहरा संतुष्टि और एक अजीब सी शांति से चमक रहा था। उसने रवि के माथे को चूमा। उसे महसूस हुआ कि उसने सिर्फ एक नया प्रेमी नहीं पाया था, बल्कि अपनी खोई हुई आत्मा को भी फिर से खोज लिया था। उसके भीतर एक नई आग जगी थी, जो अब बुझने वाली नहीं थी। यह अधेड़ उम्र की औरत का नया रोमांस था, जिसने उसे फिर से जीना सिखा दिया था।
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