देर रात दफ्तर की सुनसान ख़ामोशी में प्रिया के कानों में जब रोहन की भारी साँसों का अहसास घुला, तो उसकी रूह तक सिहर उठी। वो आखिरी प्रेजेंटेशन खत्म करने में लगी थी, और उसे पता था कि रोहन की देर रात की उपस्थिति सिर्फ़ काम के लिए नहीं थी। उसकी पलकें उठीं और सामने रोहन खड़ा था, उसकी आँखें प्रिया के होंठों पर टिकी थीं, मानो उन्हें चूमने की इजाज़त मांग रही हों। दफ्तर की मंद रौशनी में भी उसकी आँखों की चमक इतनी तीव्र थी कि प्रिया के गालों पर गुलाबी रंगत दौड़ गई।
“अभी तक जागी हो, प्रिया?” रोहन की आवाज़ में एक अजीब-सी गर्माहट थी, जो प्रिया के भीतर तक उतर गई। उसने सिर झुका लिया, उसके दिल की धड़कनें बेतहाशा बढ़ रही थीं। “बस थोड़ा सा काम बचा था,” उसने फुसफुसाया। रोहन धीरे-धीरे उसके करीब आया, उसकी सुगंध, उसकी मर्दाना महक प्रिया को अपने आगोश में ले रही थी। उसके हाथ धीरे से प्रिया के कंधे पर टिके, फिर उसकी गर्दन पर सरक गए। प्रिया ने अपनी आँखें बंद कर लीं, उसे पता था कि अब वापसी का कोई रास्ता नहीं था।
“प्रिया, तुम्हें नहीं लगता कि हमारी ये अधूरी प्रेम कहानी आज एक रोमांचक अंत के इंतज़ार में है?” रोहन ने उसके कान के पास झुकते हुए कहा, उसकी साँसों की गर्मी प्रिया की त्वचा को दहका रही थी। यह वो सच था जिसे दोनों ने बरसों तक अपने दिल में दबा रखा था। आज, इस सुनसान दफ्तर में, उनके बीच की हर दीवार टूट रही थी। प्रिया ने कोई जवाब नहीं दिया, बस अपना सिर पीछे की ओर झुकाया, उसके होंठ रोहन के होंठों की तलाश में थे।
पलक झपकते ही रोहन के होंठ प्रिया के होंठों से मिल गए। यह एक भूखी, अधीर चुंबन थी, जो वर्षों की दबी हुई वासना को जगा रही थी। प्रिया ने भी पूरी शिद्दत से उसका साथ दिया, उसके हाथ रोहन की गर्दन के पीछे पहुँच गए और उसने उसे और कसकर अपनी ओर खींच लिया। उनके होंठ एक-दूसरे को चूमते, काटते, रसपान करते रहे, और उनके जिस्मों में आग सी लगने लगी।
रोहन ने प्रिया को अपनी बाहों में उठाया, जैसे वो किसी अदृश्य शक्ति के वश में हो, और उसे अपनी गाड़ी तक ले गया। रास्ते भर उनके होंठ एक-दूसरे से अलग नहीं हुए। उसके अपार्टमेंट पहुँचते ही, रोहन ने प्रिया को दरवाज़े से सटाकर फिर से चूमना शुरू कर दिया, इस बार और भी ज़्यादा तीव्रता के साथ। उसके हाथ प्रिया की कमर से होते हुए उसकी साड़ी के पल्लू को खिसकाने लगे। प्रिया की साँसें तेज़ हो गईं, और उसने खुद को रोहन के हाथों में पूरी तरह से छोड़ दिया।
साड़ी और ब्लाउज ज़मीन पर गिरे, फिर पेटीकोट और अंत में उसकी पतली ब्रा। प्रिया का अर्धनग्न जिस्म रोहन के सामने था, जो उसकी आँखों में लालच और प्यार का मिश्रण जगा रहा था। उसने प्रिया को बिस्तर पर धकेल दिया, और बिना एक पल भी बर्बाद किए खुद भी अपने कपड़े उतारने लगा। जब दोनों जिस्म नग्न अवस्था में एक-दूसरे के सामने थे, तो एक अजीब सी पवित्रता और पाप का अहसास एक साथ उभरा। रोहन ने प्रिया को अपनी बाहों में कस लिया, उसकी उंगलियाँ प्रिया के वक्षों को सहलाने लगीं। प्रिया के मुँह से दर्द और आनंद से भरी एक सिसकी निकली। यह वही रोमांचक अंत था जिसकी उसकी देह बरसों से प्रतीक्षा कर रही थी, हमारी अधूरी प्रेम कहानी का सबसे गहरा, सबसे नग्न सच।
रोहन ने प्रिया के होंठों पर फिर से कब्ज़ा कर लिया, जबकि उसके हाथ उसके जांघों के बीच से होते हुए उसकी अंतरंगता को छू रहे थे। प्रिया की देह पानी-पानी हो रही थी, उसकी योनि रोहन के स्पर्श के लिए बेताब थी। उसने अपनी टांगें खोलीं, उसे और करीब आने का न्योता दिया। रोहन ने एक गहरा निश्वास छोड़ा और अपनी मर्दानगी को प्रिया की गर्माहट में डुबो दिया।
एक कसक भरी चीख प्रिया के होंठों से निकली, जो जल्द ही सुख की गहरी आहों में बदल गई। उनके जिस्म एक लय में हिलने लगे, कमरे में बस उनके साँसों की आवाज़ें, जिस्मों के टकराने की मधुर धुन और प्रिया की कामुक कराहें गूँज रही थीं। हर धक्के के साथ, उनकी वर्षों पुरानी चाहत एक नए मुकाम पर पहुँच रही थी। वे एक-दूसरे में खो चुके थे, वासना की इस अग्नि में उनके जिस्म पूरी तरह से पिघल रहे थे।
कुछ ही देर में, वे दोनों एक साथ चरम पर पहुँच गए। प्रिया ने रोहन को कसकर जकड़ लिया, उसके नाखूनों ने रोहन की पीठ पर निशान छोड़ दिए, और रोहन ने प्रिया के नाम की एक गहरी आह भरी। वे एक-दूसरे के ऊपर निढाल पड़े थे, उनकी साँसें तेज़ और अस्त-व्यस्त थीं, लेकिन उनके चेहरे पर एक गहरी संतुष्टि का भाव था।
हाँ, यही था, उनकी अधूरी प्रेम कहानी का वो रोमांचक अंत, जो सिर्फ़ एक शुरुआत थी। उन्होंने एक-दूसरे की आँखों में देखा और बिना कुछ कहे ही एक अनंत वादा कर लिया। उनकी देह की भूख शांत हो चुकी थी, लेकिन उनके दिलों की प्रेम कहानी ने अभी-अभी एक नया अध्याय शुरू किया था, जो अब कभी अधूरा नहीं रहने वाला था।
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