सफेद सूती साड़ी में लिपटी मीना की देह, भीतर सुलगती एक अनकही आग की गवाह थी। दोपहरी की शांत हवा भी उसके मन की बेचैनी को कम नहीं कर पा रही थी। शादी के सात साल हो चुके थे, और अब उसे अपनी शादीशुदा जिंदगी हमेशा अधूरी लगती थी, एक ऐसी **अधूरी शादीशुदा जिंदगी की चाहत** जो उसे हर पल कचोटती रहती थी। पति रमेश अपनी नौकरी में मशगूल था, और घर की जिम्मेदारियों के तले मीना कब एक जीती-जागती स्त्री से सिर्फ गृहणी बन गई, उसे पता भी न चला। उसकी प्यासी देह, उसकी तड़पती रूह, दोनों एक ऐसे स्पर्श की प्रतीक्षा में थीं जो उसे फिर से जीवंत कर दे।
और फिर आया अर्जुन। पड़ोस के खाली मकान में किराए पर रहने आया वो युवा, जिसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी। पच्चीस-छब्बीस का होगा, सुगठित देह, सांवला रंग और एक बेफिक्र मुस्कान जो मीना के भीतर कुछ अनजाना सा जगा देती थी। पहली बार जब वह उससे मिली, तो उसकी नज़रें मीना के उभारों पर टिक गई थीं, एक क्षण के लिए ही सही, पर मीना ने उसे महसूस कर लिया था। उसकी रूह तक सिहर गई थी।
कुछ दिनों तक दूर से ही बातें होती रहीं, कभी बालकनी से, कभी सब्जी लेते हुए। अर्जुन अक्सर उसकी ओर देखकर एक अर्थपूर्ण मुस्कान देता, और मीना की साँसें तेज हो जातीं। एक दिन, पानी की पाइप लीक होने का बहाना बनाकर अर्जुन मीना के घर आया। वह नल ठीक करने के बहाने रसोई में झुका हुआ था, और मीना उसकी पीठ, उसकी उभरी हुई बांहों को निहार रही थी। उसकी टी-शर्ट के अंदर से दिखती पीठ की मांसपेशियां और भी आकर्षक लग रही थीं। “भाभी, थोड़ा पानी मिलेगा?” उसने सीधा होकर कहा, उसकी आँखें मीना की आँखों में गहराई तक झाँक रही थीं।
मीना ने पानी दिया, और जब अर्जुन ने गिलास वापस किया, तो उनकी उँगलियाँ छू गईं। एक बिजली का झटका मीना की देह में दौड़ गया। अर्जुन ने भी वही सिहरन महसूस की थी, यह उसके चेहरे पर साफ था। वह बिना कुछ कहे चला गया, पर उस स्पर्श का असर दोनों पर गहरा था। मीना उस रात सो नहीं पाई, करवटें बदलती रही। रमेश की नींद की गहरी खर्राटे उसे और भी अकेला महसूस करा रही थीं।
अगले दिन सुबह, अर्जुन ने मीना को अपने घर बुलाया, यह कहकर कि उसके घर में कुछ मच्छर बहुत परेशान कर रहे हैं और उसे कोई दवा नहीं मिल रही है। मीना ने हिचकिचाते हुए सहमति दी। उसके कदम उसके नियंत्रण में नहीं थे, वे खुद-ब-खुद अर्जुन के घर की ओर बढ़ रहे थे। जैसे ही वह भीतर दाखिल हुई, अर्जुन ने दरवाज़ा बंद कर लिया। भीतर एक मंद रौशनी थी, और हवा में कोई अजीब सी, मादक गंध घुल रही थी।
“भाभी, मच्छर तो बस बहाना था,” अर्जुन ने उसकी ओर बढ़ते हुए कहा, उसकी आँखों में एक ऐसी आग थी जो मीना की भीतर की आग से मेल खा रही थी। “मैं तो कब से आपके करीब आना चाहता था।”
मीना के होंठ काँप रहे थे, “अर्जुन… यह गलत है…”
“गलत? या वो **अधूरी शादीशुदा जिंदगी की चाहत** जो आपके हर अंग में सुलग रही है?” अर्जुन ने लगभग फुसफुसाते हुए कहा, और एक झटके में उसने मीना की कमर को अपनी बाहों में भर लिया।
मीना ने विरोध नहीं किया, बस अपनी आँखें बंद कर लीं। उसकी देह ने आत्मसमर्पण कर दिया था। अर्जुन के गर्म होंठ उसके गले से होते हुए उसकी गर्दन पर उतर आए, एक मीठी सी सिहरन पैदा करते हुए। मीना की साँसें तेज हो गईं, उसके हाथों ने अनायास ही अर्जुन की टी-शर्ट पकड़ ली।
अर्जुन ने उसे उठाया, और सीधा बेडरूम की ओर ले गया। मीना की साड़ी सरक चुकी थी, और उसके पेट पर अर्जुन के हाथों का स्पर्श उसे मदहोश कर रहा था। बिस्तर पर गिरते ही, उनके होंठ आपस में भिड़ गए, एक दूसरे की प्यास बुझाने के लिए। मीना के मन में सारी वर्जनाएं पिघल चुकी थीं, आज वो अपनी **अधूरी शादीशुदा जिंदगी की चाहत** को पूरा करने वाली थी, उन वर्जनाओं को तोड़कर जो उसे बांधे हुए थीं।
अर्जुन ने धीरे-धीरे मीना की साड़ी को उसके शरीर से अलग किया, और फिर ब्लाउज को भी। मीना के स्तन, कसकर ब्रा में लिपटे हुए, बाहर आने को बेताब थे। अर्जुन की आँखें उन पर ठहरीं, और फिर उसने धीरे से ब्रा की हुक खोली। दो पूर्ण, भरे हुए स्तन बाहर निकले, उनके निप्पल गुलाबी और उत्तेजित थे। अर्जुन ने एक निप्पल को अपने मुँह में लिया, और मीना के मुँह से एक तीव्र आह निकली। उसके हाथ अर्जुन के बालों में उलझ गए, उसे और गहराई तक खींचते हुए।
कपड़े एक-एक करके हटते गए, और दोनों देह एक दूसरे से लिपट गईं, एक दूसरे की गर्मी को महसूस करते हुए। अर्जुन ने मीना की जांघों को फैलाया, और फिर धीरे-धीरे अपने पुरुषत्व को उसके भीतर उतारा। मीना की आँखें बंद थीं, उसके मुँह से निकलती मदहोश कर देने वाली आहें पूरे कमरे में गूँज रही थीं। हर धक्के के साथ, एक नई लहर उसे अपने आगोश में ले रही थी, उसे उस सुख की पराकाष्ठा पर पहुंचा रही थी जिसके लिए वह बरसों से तड़प रही थी। उनका मिलन जंगली था, तीव्र था, और वासना से भरा हुआ था।
जब दोनों थककर शांत हुए, तो मीना अर्जुन के सीने पर सिर रखकर लेटी थी, उसकी साँसें सामान्य हो रही थीं। उसने अर्जुन के गर्म शरीर को कसकर पकड़ा हुआ था, जैसे यह एक सपना हो जो टूट न जाए। आज रात मीना ने सिर्फ एक देह नहीं, बल्कि अपनी सदियों पुरानी **अधूरी शादीशुदा जिंदगी की चाहत** को तृप्त किया था। यह तो बस शुरुआत थी।
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