मीरा की नम उँगलियाँ जैसे ही रोहन की कमीज के बटन पर थिरकीं, उसकी साँसें उसके होंठों पर एक गर्म अहसास छोड़ गईं और रोहन का बदन सिहर उठा। बाहर सावन की अँधेरी रात में मूसलाधार बारिश बरस रही थी, और अंदर उनकी बंद खिड़कियों के पीछे, एक सालों पुरानी अधूरी प्रेम कहानी एक नए, प्रचंड अध्याय की प्रतीक्षा कर रही थी।
कई सालों बाद आज जब वे इस पैतृक हवेली के पुराने शयनकक्ष में मिले थे, तो हवा में एक अनकही बेचैनी, एक अनछुई आग भरी हुई थी। मीरा ने अपने रेशमी दुपट्टे को एक झटके में उतारा, उसकी नज़रें रोहन की आँखों में गहरे उतर गई थीं। “अब और इंतज़ार नहीं,” उसने फुसफुसाते हुए कहा, उसकी आवाज़ में बरसों की प्यास घुली थी। रोहन ने उसे अपनी बांहों में कस लिया, उसके होंठ मीरा के होंठों पर ऐसे टूट पड़े जैसे कोई प्यासा सदियों बाद पानी से भरे कुएँ को खोज ले। उनके चुंबन में अतीत की मीठी यादें, वर्तमान की प्रगाढ़ इच्छा और भविष्य की अदम्य ललक सब कुछ घुल-मिल गया था।
मीरा के वक्ष रोहन की छाती से ऐसे सटे थे कि दोनों के हृदय की धड़कनें एक हो गई थीं। रोहन ने अपनी जीभ से मीरा के अधरों का अमृत चखा, फिर धीरे-धीरे नीचे उसकी गरदन, उसकी नाजुक हँसली पर उतर गया। मीरा ने सुख की एक धीमी सिसकारी भरी और अपने सिर को पीछे लुढ़का दिया, रोहन की उँगलियाँ उसकी साड़ी के पल्लू को खिसकाने लगीं। रेशमी साड़ी उसके बदन से फिसल कर फर्श पर ढेर हो गई, और फिर एक-एक कर उसके ब्लाउज और पेटीकोट ने भी उसका साथ छोड़ दिया। बारिश की बूँदें खिड़की के शीशे पर थिरक रही थीं और कमरे में सिर्फ उनके साँसों की गर्म आवाज़ें थीं।
मीरा अब रोहन के सामने पूरी नग्न खड़ी थी, उसका गोरा बदन मोम की तरह चमक रहा था। रोहन की आँखों में एक गहरी लपट थी, जो उसने कभी किसी और के लिए महसूस नहीं की थी। उसने धीरे से अपने कपड़े उतारे, मीरा की आँखें उसके सुगठित बदन पर टिकी हुई थीं, हर बार जब उसने उसे दूर से देखा था, उसकी कल्पनाएँ ही उसे सताती थीं, लेकिन आज वह सब कुछ यथार्थ था।
रोहन ने मीरा को बिस्तर पर धीरे से धकेला। बिस्तर की मुलायम चादर पर मीरा का बदन किसी देवी की तरह लग रहा था। रोहन ने उसके वक्षों को अपने हाथों में भर लिया, उसके निप्पलों को अपनी ज़ुबान से छुआ और फिर धीरे-धीरे उन्हें चूसने लगा। मीरा ने अपनी टाँगें फैला दीं, उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, जैसे वह इस पल के लिए युगों से तरस रही हो। रोहन उसकी नाभि के गहरे गड्ढे में अपनी जीभ फिराने लगा, उसकी उँगलियाँ मीरा की जाँघों के भीतर, उसकी योनि के द्वार पर थिरकने लगीं। मीरा का बदन अब पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था, उसकी योनि से एक मीठा स्राव बहने लगा था।
“अब और नहीं, रोहन… मैं अब और इंतज़ार नहीं कर सकती,” मीरा ने हाँफते हुए कहा। उसकी आवाज़ में एक अजीब सी मदहोशी थी। रोहन ने एक गहरी साँस ली, अपने लिंग को मीरा की योनि के द्वार पर स्थापित किया और एक ही झटके में भीतर धकेल दिया। मीरा के मुँह से एक तीव्र चीख निकली, जो तुरंत सुख की एक लंबी आह में बदल गई। वर्षों की तड़प, वर्षों का इंतज़ार, आज इस एक पल में समाप्त हो रहा था।
वे दोनों एक लय में हिलने लगे। रोहन का हर धक्का मीरा की आत्मा तक पहुँच रहा था, उसे हर बार चरमसुख के करीब धकेल रहा था। मीरा ने अपनी टाँगों से रोहन को कस लिया, अपने नाखून उसकी पीठ पर गाड़ दिए। उनकी अधूरी प्रेम कहानी आज देह के हर अणु में, हर धड़कन में, अपनी परिणति पा रही थी। रोहन ने अपनी गति और तेज़ कर दी, और मीरा की आँखें अब बंद थीं, उसके होंठों से सिर्फ सुख की आहें निकल रही थीं। अचानक, रोहन ने एक गर्जना की, और मीरा ने भी अपने शरीर को कस लिया, उसकी योनि के भीतर से एक गर्म लावा फूट पड़ा। उनका बदन ऐंठने लगा, और वे दोनों एक साथ चरम पर पहुँच गए। उनकी अधूरी प्रेम कहानी का रोमांचक अंत आज अपनी सभी बाधाओं को तोड़कर, वासना और प्रेम के सर्वोच्च शिखर पर पहुँच गया था।
शांत होने के बाद, वे दोनों एक-दूसरे की बाहों में लिपटकर बिस्तर पर पड़े रहे। बाहर बारिश धीमी हो चुकी थी, लेकिन उनके भीतर एक तूफान शांत होकर गहरी संतुष्टि में बदल गया था। मीरा ने रोहन के माथे पर एक नर्म चुंबन दिया। “आज हमारी अधूरी प्रेम कहानी का रोमांचक अंत हुआ है,” उसने फुसफुसाया। रोहन ने मुस्कुराते हुए उसे और कसकर अपनी बाँहों में भर लिया। यह सिर्फ अंत नहीं था, यह तो एक नई, और अधिक गहरी प्रेम कहानी की शुरुआत थी, जो अब कभी अधूरी नहीं रहेगी।
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