पड़ोस की दहलीज पर अधूरी शादीशुदा जिंदगी की चाहत की आग

शाम ढल चुकी थी, और रीना की प्यास उसके सूखे होंठों से कहीं गहरी थी। पिछले दस सालों से राजेश के साथ बँधी उसकी शादीशुदा जिंदगी, एक सूखी नदी की तरह थी जिसमें भावनाओं का पानी कभी बहता ही नहीं था। राजेश हमेशा अपने काम में व्यस्त रहता, और रीना का शरीर, उसकी आत्मा, हर रात एक अनकही भूख लिए करवटें बदलती रहती। उसे बस एक ही चाहत थी – उसकी अधूरी शादीशुदा जिंदगी की चाहत को कोई तो समझे, कोई तो पूरा करे।

पड़ोस के फ्लैट में रहने वाला रोहन, रीना से कुछ साल छोटा था, लेकिन उसकी आँखों में एक ऐसी आग थी जो अक्सर रीना की नज़रें अपनी ओर खींच लेती। रोहन की मस्कुलर देह, उसकी भरी हुई बाहें और वो तीखी मुस्कान, रीना के अंदर कुछ ऐसा जगा देती थी जिसे वो बरसों से दबाए बैठी थी। आज, जब राजेश एक बिज़नेस ट्रिप पर बाहर था, रोहन ने अचानक दरवाज़ा खटखटाया, “भाभी, आपकी बालकनी की बत्ती शायद फ्यूज हो गई है। मैं मदद करूँ?”

रीना का दिल धक से रह गया। रात के सन्नाटे में रोहन का उसके फ्लैट में आना, उसकी कल्पनाओं को हकीकत में बदलने जैसा था। उसने न चाहते हुए भी ‘हाँ’ कह दिया। रोहन अंदर आया, उसकी मर्दाना महक रीना के नथुनों से टकराई, और उसके पूरे शरीर में एक सिहरन दौड़ गई। बत्ती ठीक करते हुए, रोहन की उँगलियाँ गलती से रीना की पीठ से छू गईं। वो बस एक क्षण था, लेकिन उस एक क्षण में रीना ने महसूस किया कि वर्षों की प्यास उसकी त्वचा पर जाग उठी है।

“लगता है हो गया, भाभी,” रोहन ने मुड़ते हुए कहा, और उसकी आँखें सीधे रीना की आँखों में मिलीं। उन आँखों में सिर्फ़ काम नहीं था, एक गहरी समझ थी, एक बुलावा था। रीना ने अपने सूखे होंठों पर ज़बान फेरी। “शुक…शुक्रिया, रोहन।” उसकी आवाज़ जैसे कहीं गले में अटक गई थी।

रोहन ने एक कदम बढ़ाया, और फिर दूसरा। रीना का दिल अब तेज़ी से धड़क रहा था। उसने दरवाज़ा बंद कर दिया था, जैसे दुनिया को बाहर ही छोड़ दिया हो। रोहन ने धीरे से रीना का हाथ थामा, उसकी उँगलियाँ रीना की हथेली पर एक धीमी, नशीली चाल चल रही थीं। “भाभी, आपकी आँखों में जो प्यास है, उसे मैं महसूस कर सकता हूँ।” उसकी आवाज़ गहरी और मदहोश कर देने वाली थी।

रीना के शरीर में एक अजीब सी गर्मी दौड़ गई। उसे पता था कि ये गलत है, लेकिन उसकी वर्षों की अधूरी शादीशुदा जिंदगी की चाहत अब इतनी प्रबल हो चुकी थी कि उसे रोकना असंभव था। रोहन ने उसे अपनी बाहों में खींच लिया। उनके होंठ मिले, एक बिजली का करंट रीना के पूरे वजूद से गुजरा। ये कोई साधारण चुंबन नहीं था, ये वासना का, दबी हुई इच्छाओं का एक ज्वार था जो रीना के अंदर वर्षों से उमड़ रहा था। रोहन के होंठ उसके होंठों को निगल रहे थे, उसकी ज़बान रीना के मुँह में अपनी जगह बना रही थी, एक मीठा, जंगली स्वाद।

रीना की साड़ी की प्लेटें ढीली पड़ने लगीं, रोहन के हाथ उसकी कमर पर कसते चले गए। वो उसे बेडरूम तक ले गया, उनके होंठ एक पल के लिए भी जुदा नहीं हुए। रीना की साड़ी सरक कर ज़मीन पर गिर गई, उसके ब्लाउज़ के हुक एक-एक करके खुलने लगे। रोहन की आँखें रीना के उभरे हुए वक्ष पर टिक गईं, और उसने एक गहरी साँस ली। “तुम कितनी खूबसूरत हो, रीना,” उसने धीमी आवाज़ में कहा, और फिर बिना किसी देरी के, उसने अपने होंठों से रीना के स्तनों को ढँक लिया। रीना के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली चीख निकली।

उसने खुद को रोहन के हवाले कर दिया। रोहन ने उसे धीरे से बिस्तर पर धकेला, और रीना की अधूरी शादीशुदा जिंदगी की चाहत आज पूरी होने वाली थी। रोहन का शरीर उसके ऊपर था, उनकी त्वचा एक-दूसरे से चिपक रही थी, गर्मी और पसीने की एक नई दुनिया बना रही थी। रोहन ने अपनी पैंट हटाई, और रीना ने उसकी मर्दानगी को महसूस किया। वो गरम, कठोर और तैयार थी। रीना ने अपनी आँखें बंद कर लीं, और जब रोहन ने उसके भीतर प्रवेश किया, तो एक गहरी आह उसके भीतर से निकली।

दर्द नहीं था, सिर्फ़ आनंद था। एक ऐसा आनंद जो उसने कभी अनुभव नहीं किया था। रोहन की हर धकेल, हर गति, रीना की दबी हुई हर इच्छा को जगा रही थी। वे एक-दूसरे में खो चुके थे, आवाज़ें और साँसें एक हो चुकी थीं। रीना का शरीर ऐंठ रहा था, उसका मन एक अनजान नशे में झूल रहा था। उसने अपनी बाहें रोहन की गर्दन के इर्द-गिर्द कस लीं, उसे अपने भीतर और गहराई तक खींचना चाहा।

चरम सुख की लहर ने जब रीना को अपनी गिरफ्त में लिया, तो उसके शरीर का कण-कण झनझना उठा। रोहन भी उसके साथ उसी गहरे आनंद में डूबा हुआ था। जब वे शांत हुए, एक-दूसरे की बाहों में थके हुए लेटे थे, तो रीना ने रोहन के सीने पर अपना सिर रखा। उसके दिल में एक अजीब सी शांति थी, एक तृप्ति थी जो उसे कभी राजेश से नहीं मिली थी।

“ये सब… क्या था?” रीना ने फुसफुसाते हुए पूछा।

रोहन ने उसे और कसकर अपनी बाहों में भर लिया। “ये वो था जिसकी तुम्हें हमेशा चाहत थी, रीना। तुम्हारी अधूरी शादीशुदा जिंदगी की चाहत का जवाब।”

आज रीना ने जान लिया था कि उसकी अधूरी शादीशुदा जिंदगी की चाहत का एक नया, दहकता रास्ता खुल चुका था, और वो उस पर चलने के लिए तैयार थी, चाहे उसकी कीमत कुछ भी हो। उसके अधरों पर एक शरारती मुस्कान थी, और उसके भीतर एक नई आग जल रही थी।

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