पड़ोसी विक्रम की आँखों में जब रिया ने अपनी अधूरी शादीशुदा जिंदगी की चाहत देखी, तो एक बिजली सी उसके आर-पार हो गई। रिया की शादी को पाँच साल हो गए थे, पर उसके भीतर की स्त्री आज भी अधूरी थी। पति राजेश का प्यार अब बस एक रस्म बनकर रह गया था, जिसमें कोई गरमाहट, कोई जुनून नहीं था। इसी खालीपन में, उसकी निगाहें अक्सर पड़ोसी विक्रम पर ठहर जाती थीं। विक्रम, जो अपनी भरी-पूरी देह और पैनी नज़रों से रिया की हर दबी हुई इच्छा को भाँप लेता था। जब भी वे बालकनी या सीढ़ियों पर टकराते, विक्रम की आँखों में रिया अपनी **अधूरी शादीशुदा जिंदगी की चाहत** को एक नई लौ के साथ जलता देखती थी।
आज राजेश शहर से बाहर था। रात के गहरे सन्नाटे में, रिया को अपने बिस्तर की चादरें भी ठंडी और बेजान लग रही थीं। एक अजीब सी बेचैनी उसके रोम-रोम में समा रही थी। तभी दरवाज़े पर हल्की सी दस्तक हुई। दिल की धड़कनें तेज़ हो गईं। दरवाज़ा खोला तो सामने विक्रम खड़ा था, चेहरे पर हल्की सी मुस्कान और आँखों में वही जानलेवा चमक। “रिया जी, बिजली चली गई है और मेरे घर में मोमबत्ती नहीं है। क्या आप एक दे सकती हैं?” उसकी आवाज़ में एक अजीब सा ठहराव था, जैसे वह शब्दों से ज़्यादा कुछ और कह रहा हो।
रिया ने उसे अंदर आने का इशारा किया। डिम लाइट में, विक्रम का मस्कुलर बदन और भी आकर्षक लग रहा था। मोमबत्ती ढूंढते हुए, उनके हाथ हल्के से छू गए। एक सिहरन रिया के पूरे शरीर में दौड़ गई। विक्रम ने धीरे से उसका हाथ पकड़ लिया, उसकी उंगलियाँ रिया की मुलायम त्वचा पर घूम रही थीं। “आपकी आँखें आज कुछ ज़्यादा ही बेचैन लग रही हैं, रिया जी,” विक्रम ने फुसफुसाया, उसकी गर्म साँसें रिया के कान को सहला रही थीं। रिया का बदन काँप रहा था, पर वह पीछे नहीं हटी। वह जानती थी कि उसे अब वही मिलने वाला है जिसकी उसे बरसों से तलब थी।
विक्रम ने धीरे से रिया को अपनी तरफ खींचा। उनके होंठ मिले। एक बिजली का करंट रिया के पूरे शरीर में दौड़ गया। यह कोई साधारण चुंबन नहीं था; यह भूख थी, वासना थी, वर्षों की दबी हुई इच्छा का विस्फोट था। विक्रम के होंठ उसके होंठों को चूस रहे थे, उसकी जीभ रिया के मुँह में गहरे उतर रही थी। रिया ने अपनी साड़ी का पल्लू सरकने दिया। विक्रम के हाथ उसकी कमर पर टिक गए और उसने साड़ी का लपेट खोल दिया। रिया की गुलाबी ब्रा और पैंटी में ढकी देह उसके सामने थी, हर साँस के साथ उठती-गिरती। “तुम कितनी सुंदर हो, रिया,” विक्रम ने गुर्राया, उसकी उंगलियाँ रिया की ब्रा के कप में घुसकर उसके उभारों को सहलाने लगीं। रिया की साँसें तेज़ हो गईं, उसकी निप्पल कठोर होकर ब्रा के कप में से उभर आई थीं।
विक्रम ने उसे गोद में उठा लिया और बेडरूम की तरफ ले गया, जहाँ अंधेरे में बस मोमबत्ती की लौ झिलमिला रही थी। उसने रिया को बिस्तर पर लिटाया और खुद उसके ऊपर झुक गया। उसकी जीभ रिया की गर्दन से होते हुए उसके स्तनों तक पहुँच गई। रिया एक मीठी आह भर उठी जब विक्रम ने उसके एक स्तन को अपने मुँह में भर लिया, उसके निप्पल को जीभ से सहलाते हुए चूसा। रिया की उंगलियाँ विक्रम के बालों में उलझ गईं। उसने अपने निचले होंठ को दाँतों तले दबाया, खुशी और दर्द के एक अजीब से मिश्रण में। विक्रम का हाथ अब उसकी पैंटी के भीतर था, उसकी उंगलियाँ रिया की गीली फाँक पर घूम रही थीं। “तुम्हारी यह **अधूरी शादीशुदा जिंदगी की चाहत** आज पूरी होगी, मेरी जान,” विक्रम ने फुसफुसाया, और अपनी एक उंगली रिया के भीतर गहरे उतार दी। रिया की कमर उठ गई, उसकी नस-नस में एक मीठा दर्द फैल गया।
विक्रम ने अपनी पैंट उतार दी, उसका खड़ा, तना हुआ औज़ार रिया की नज़रों के सामने था। रिया ने उसे पकड़ लिया, उसकी उंगलियाँ गरम और कठोर मांस पर घूम रही थीं। “अब और इंतज़ार नहीं,” रिया ने हाँफते हुए कहा। विक्रम ने एक ही झटके में खुद को रिया के भीतर उतार दिया। एक तेज़ चीख रिया के मुँह से निकली, पर वह तुरंत एक गहरी आह में बदल गई। विक्रम ने कमर हिलाई, धीरे-धीरे, फिर तेज़-तेज़। उनके बदन एक-दूसरे से टकरा रहे थे, पसीने में लथपथ। बिस्तर की चरमराहट और रिया की मदहोश कर देने वाली आहें कमरे में गूँज रही थीं। रिया अपनी कमर उठा-उठा कर विक्रम का साथ दे रही थी, उसकी देह का हर कण विक्रम में समा जाना चाहता था। “हाँ, और तेज़… और गहरा,” रिया ने चीखते हुए कहा, जब उसे लगा कि उसकी देह अब बिखरने वाली है। कई धक्कों के बाद, दोनों एक साथ चरम सुख की पराकाष्ठा पर पहुँचे, रिया के भीतर **अधूरी शादीशुदा जिंदगी की चाहत** एक झटके में शांत हो गई।
विक्रम रिया के ऊपर ही पड़ा रहा, उसकी साँसें तेज़ थीं। रिया ने उसे कसकर अपनी बाहों में भर लिया, उसकी आँखों में एक अजीब सी संतुष्टि और चमक थी। यह एक वर्जित रात थी, एक ऐसी रात जिसने रिया की प्यासी देह और आत्मा को तृप्त कर दिया था। सूरज की पहली किरण निकलने से पहले विक्रम चुपचाप चला गया, पर रिया के तन पर उसकी छूअन और उसके भीतर की वो आग हमेशा के लिए एक मीठी याद बन गई थी। अधूरी थी उसकी शादीशुदा ज़िंदगी, पर आज की रात ने उस कमी को पूरी तरह से भर दिया था।
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