रेशमा की आँखें भारी थीं, पर नींद कोसों दूर। बाहर की घुप अँधेरी रात और सुनसान गाँव की खामोशी उसके भीतर एक अजीब सी बैचैनी पैदा कर रही थी। बस आधे रास्ते में ख़राब हो गई थी और कंडक्टर ने उसे इस छोटी सी सराय में रुकने की सलाह दी थी। यह **अकेली लड़की का रात का सफर** उसे अनचाहे ही इस छोटे, धूल-भरे गाँव में ले आया था।
सराय का मालिक विक्रम, एक हृष्ट-पुष्ट, सांवले रंग का जवान आदमी, शुरू से ही उसकी आँखों में कुछ तलाश रहा था। उसकी मेहमानवाज़ी में एक गहरी, अनकही चमक थी। रेशमा ने देखा था कि जब वह उसे पानी देने आया था, तो उसकी निगाहें रेशमा के खुले गले से होती हुई उसकी उभरी छातियों पर ठहर गई थीं। एक हल्की सी सिहरन उसकी रीढ़ में दौड़ गई थी।
रात गहराती जा रही थी और रेशमा को अपने कमरे में बेचैनी महसूस हो रही थी। गर्मी और थकान के बावजूद उसे नींद नहीं आ रही थी। उसने अपनी साड़ी का पल्लू ढीला किया और खिड़की के पास खड़ी हो गई, जहाँ से केवल अँधेरा और कुछ झींगुरों की आवाज़ आ रही थी। तभी दरवाज़े पर हल्की सी दस्तक हुई।
“कोई परेशानी है, मैडम?” विक्रम की आवाज़ थी, जिसमें एक अजीब सी गंभीरता और मृदुलता घुली थी।
“नहीं… बस नींद नहीं आ रही,” रेशमा ने हिचकिचाते हुए कहा।
विक्रम भीतर आया, उसकी आँखों में एक अलग सी चमक थी। “माफ़ करना, मैंने सोचा शायद आपको कुछ चाहिए हो। यह गाँव शांत रहता है, ऐसी ख़ामोशी की आदत न हो तो मुश्किल होती है।”
वह धीरे-धीरे उसके पास आया, उसके शरीर की गंध, पसीने और मिट्टी की मिली-जुली एक मादक खुशबू, रेशमा के नथुनों में भर गई।
“आप भी सोये नहीं?” रेशमा ने सवाल किया।
विक्रम ने एक गहरी साँस ली। “कुछ रातें ऐसी होती हैं जब नींद आँखों से रूठ जाती है, और देह में एक अजीब सी तड़प उठती है।” उसकी निगाहें रेशमा के अधखुले होंठों पर टिकी थीं।
रेशमा का दिल तेज़ धड़कने लगा। उसे महसूस हुआ कि विक्रम के इरादे अब सिर्फ मेहमानवाज़ी तक सीमित नहीं थे। उसके शरीर की नस-नस में एक अनजानी आग सुलगने लगी थी।
विक्रम ने धीरे से अपना हाथ बढ़ाया और रेशमा की बाजू छू ली। उसकी उंगलियों का स्पर्श बिजली की तरह रेशमा के बदन में दौड़ गया। “आप बहुत थकी हुई लग रही हैं,” उसने धीमी, भारी आवाज़ में कहा और उसका हाथ उसकी बाजू से होता हुआ धीरे-धीरे उसके कंधे पर चढ़ गया, फिर उसकी नंगी गर्दन पर। रेशमा की साँसें तेज़ हो गईं। उसने आँखें बंद कर लीं, प्रतिरोध करने की इच्छा नहीं थी।
विक्रम ने अपनी उंगलियों से उसकी गर्दन सहलाई, फिर झुका और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। एक पल की हिचकिचाहट, फिर रेशमा ने भी जवाब दिया। वह चुम्बन गहराता चला गया, वासना की आग दोनों के भीतर भड़क उठी। विक्रम ने उसे अपनी बाहों में भर लिया, उसके बदन को अपने मज़बूत जिस्म से सटा लिया। रेशमा ने उसके चौड़े कंधों को कसकर पकड़ लिया, अपनी साड़ी का पल्लू कब ज़मीन पर गिर गया, उसे पता ही न चला।
विक्रम के हाथ तेज़ी से रेशमा की पीठ पर चल रहे थे, उसकी कमर को सहलाते हुए उसने साड़ी खोली और ज़मीन पर गिरा दी। अब रेशमा सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज़ में थी। विक्रम ने उसे बिस्तर पर धकेला और उसके ऊपर आ गया। उसके होंठ फिर से रेशमा के होंठों से टकराए, फिर गर्दन पर, कान की लौ पर, और फिर धीरे-धीरे उसके ब्लाउज़ के बटन खोलते हुए उसकी भरी हुई छातियों पर। रेशमा के मुंह से एक सिसकारी निकली जब उसने उसके खुले स्तनों को अपने होंठों में भर लिया और उन्हें चूसने लगा।
वह उत्तेजना बर्दाश्त से बाहर थी। रेशमा ने अपने हाथों से विक्रम के बालों को जकड़ लिया, उसकी पीठ पर नाखून चुभो दिए। “और… और तेज़…” उसके मुंह से बेताब आवाज़ निकली।
विक्रम ने उसके पेटीकोट का नाड़ा खोला और उसे भी उतार दिया। अब रेशमा पूरी तरह नग्न थी, उसकी गोरी देह रात के अँधेरे में भी कामुक दिख रही थी। विक्रम ने अपने कपड़े भी उतार दिए, और उसका कठोर, उत्तेजित अंग रेशमा की जाँघों के बीच अपनी जगह तलाशने लगा।
शायद यह **अकेली लड़की का रात का सफर** उसे इसी पल तक लाने के लिए था।
एक लंबी, गहरी आह के साथ विक्रम ने रेशमा के भीतर प्रवेश किया। रेशमा के मुंह से एक मधुर चीख निकली, फिर वह उसकी चाल के साथ तालमेल बिठाने लगी। कमरे में सिर्फ़ देह से देह के टकराने की आवाज़ें थीं, और दोनों की साँसों की गर्म फुफकारें। विक्रम की हर धमक रेशमा के अंदर तक महसूस हो रही थी, उसे एक ऐसे सुख के सागर में ले जा रही थी जहाँ उसने पहले कभी गोता नहीं लगाया था।
दोनों एक-दूसरे में खो चुके थे। रेशमा अपनी कमर उठाकर विक्रम के धक्कों का जवाब दे रही थी, उसकी देह आग की तरह दहक रही थी। कुछ देर बाद, एक भयंकर सुख की लहर के साथ, दोनों ने एक साथ अपनी चरम सीमा को छुआ। रेशमा ने अपनी आँखें खोलीं और विक्रम की आँखों में देखा। उन आँखों में जीत और तृप्ति का भाव था।
विक्रम रेशमा के बगल में लेट गया, उसके माथे पर पसीने की बूंदें थीं। रेशमा ने अपना सिर उसके सीने पर रख दिया। अब उसके **अकेली लड़की का रात का सफर** की थकान एक मीठी और गहरी संतुष्टि में बदल चुकी थी। रात अभी जवान थी, और उसके दिल में एक नई उम्मीद जग चुकी थी, कि शायद यह सफर अभी ख़त्म नहीं हुआ था।
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