उसकी प्यासी आँखें आज कुछ नया तलाश रही थीं, कुछ ऐसा जो उसकी आत्मा तक को झकझोर दे। रात गहरी हो चुकी थी और शहर के पॉश लाउंज में रिया की नज़रें एक अंजान शख्स पर जा टिकीं। विक्रम, जिसकी मस्कुलर देह और तीव्र आँखें किसी को भी दीवाना बना सकती थीं, उसी कोने में बैठा था जहाँ हल्की रोशनी एक रहस्यमय आभा बिखेर रही थी। उनकी नज़रों का मिलन सिर्फ एक पल का था, पर उस एक पल में रिया के भीतर जैसे आग सी सुलग उठी। उसके सूखे होंठ बेताब हो उठे।
चंद मिनटों बाद, विक्रम उसकी मेज़ के पास था। “आप अकेले यहाँ क्या कर रही हैं, इतनी खूबसूरत रात में?” उसकी आवाज़ में एक गहरापन था जो सीधा रिया के दिल में उतरा। रिया ने मुस्कुराते हुए कहा, “शायद किसी अनजान शख्स से रोमांटिक मुलाकात की तलाश में।” विक्रम की आँखों में चमक आ गई। “आपकी तलाश पूरी हुई समझिये।” अगले कुछ पलों में उनकी बातचीत ने उत्तेजना का रूप ले लिया। हर शब्द, हर इशारा वासना से भरा था। लाउंज की भीड़ उनके लिए मानो ओझल हो चुकी थी। वे दोनों एक-दूसरे की आँखों में वो ज्वाला देख रहे थे जो उन्हें एक साथ जला देने को बेताब थी।
एक भी पल बर्बाद किए बिना, विक्रम ने रिया का हाथ थामा और उसे अपनी होटल सुइट की ओर ले चला। लिफ्ट में सन्नाटा था, पर उनके जिस्मों के बीच की दूरी कम होती जा रही थी। रिया के दिल की धड़कनें तेज थीं, हाथों में पसीना था। जैसे ही सुइट का दरवाज़ा खुला, उनकी निगाहें एक बार फिर मिलीं। अब कोई रोक-टोक नहीं थी। विक्रम ने दरवाज़ा बंद किया और उसे अपनी बाहों में भर लिया। रिया के होंठों पर उसका पहला गहरा चुम्बन पड़ा। यह सिर्फ एक चुम्बन नहीं, बल्कि सदियों की प्यास बुझाने जैसा था। उसकी जीभ रिया के मुँह के हर कोने को तलाश रही थी, और रिया ने भी पूरे उत्साह से उसका साथ दिया।
साँसें फूलने लगीं, जिस्मों में गरमाहट बढ़ने लगी। रिया की सुनहरी साड़ी कब उसके जिस्म से उतर गई, उसे पता ही न चला। विक्रम के मजबूत हाथ उसके बदन पर ऐसे फिर रहे थे जैसे कोई मूर्तिकार अपनी रचना को गढ़ रहा हो। उसके उभरे हुए वक्ष विक्रम के हाथों में ऐसे समा गए मानो वे वहीं के लिए बने थे। उसने रिया के गुलाबी निप्पलों को अपने मुँह में भरा और ऐसे चूसा कि रिया के मुँह से दर्द भरी आह निकल गई। रिया अब सिर्फ एक धड़कन बन कर रह गई थी, जो विक्रम की हर हरकत पर नाच रही थी।
विक्रम ने उसे बिस्तर पर धकेला। रिया ने अपनी आँखें बंद कर लीं, उसके पूरे बदन में एक सिहरन दौड़ रही थी। विक्रम ने अपने सारे कपड़े उतार फेंके। उसका लोहे जैसा कठोर लिंग रिया के सामने ऐसे खड़ा था जैसे किसी युद्ध का ऐलान कर रहा हो। रिया की गुलाबी योनि पहले से ही नमी से तर थी, उस बड़े, सख्त औजार को अंदर लेने के लिए बेताब। विक्रम ने धीरे से उसे अपने ऊपर खींचा और एक ही झटके में, वह गहराई तक धंस गया। रिया के मुँह से निकली चीख एक सुखद आह में बदल गई। “आहह्हह…” उसकी आँखें फैल गईं।
विक्रम ने ज़ोरदार थ्रस्ट शुरू किए। बिस्तर चरमरा रहा था। रिया की जाँघें उसके कमर पर कस गईं। “और तेज़… विक्रम… और तेज़…” रिया फुसफुसाई। उनकी अनजान शख्स से रोमांटिक मुलाकात अब हवस के उस पार जा चुकी थी, जहाँ सिर्फ जिस्मों का संगम था। पसीना उनके बदन से बह रहा था, और हवा में उनकी वासना की गंध फैली थी। विक्रम हर वार में अपनी पूरी जान लगा रहा था, और रिया हर धक्के पर स्वर्ग की सैर कर रही थी।
जब चरम सुख का क्षण आया, तो दोनों के जिस्म एक साथ थर्रा उठे। रिया का शरीर ऐंठ गया और उसने एक लंबी, संतुष्ट आह भरी। विक्रम भी उसके अंदर ही पूरी तरह खाली हो गया, उसकी गर्माहट से रिया का रोम-रोम तृप्त हो गया। वे दोनों ऐसे ही एक-दूसरे की बाहों में पड़े रहे, थके हुए, पर पूरी तरह संतुष्ट। रिया की यह अनजान शख्स से रोमांटिक मुलाकात उसकी ज़िंदगी की सबसे हसीन और सबसे उत्तेजित करने वाली रात बन चुकी थी। अगली सुबह की कोई परवाह नहीं थी, आज की रात पूरी तरह उनकी थी, वासना और असीमित सुख की।
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