जब शाम ढली और ऑफिस की बत्तियां एक-एक कर बुझने लगीं, सोनल को पता था कि आज की रात सिर्फ काम की नहीं, कुछ और ही होने वाली थी। उसके दिल की धड़कनें तेज थीं, उस जानी-पहचानी उत्तेजना से जो पिछले कुछ हफ़्तों से उसके भीतर पनप रही थी। बॉस राहुल, जो अपने केबिन में बैठा देर तक काम करने का बहाना कर रहा था, जानता था कि सोनल जानबूझकर रुक रही है। आज रात उनकी **ऑफिस में चोरी छिपे इश्क की दास्तान** एक नए मुकाम पर पहुँचने वाली थी।
सोनल ने अपनी फ़ाइलें समेटीं, जानबूझकर थोड़ा और समय लेते हुए। उसके सलवार कमीज़ का दुपट्टा थोड़ा ढीला था, और उसे महसूस हो रहा था कि राहुल की आँखें उस पर गड़ी हुई हैं। आखिरकार, उसने उठकर राहुल के केबिन की ओर कदम बढ़ाए। दरवाज़ा हल्का सा खुला था। उसने अंदर झाँका। राहुल अपनी कुर्सी पर बैठा था, मेज़ पर पड़ी कागज़ात की ओर नहीं, बल्कि अपनी काली कॉफ़ी मग को निहारते हुए। जैसे ही सोनल अंदर आई, उसकी आँखें तुरंत सोनल पर टिक गईं। उन आँखों में एक भूखी, वासना भरी चमक थी।
“सर, मेरा काम हो गया,” सोनल की आवाज़ में एक हल्की सी काँपती थरथराहट थी।
“बैठो, सोनल,” राहुल ने गहरी आवाज़ में कहा। “मुझे कुछ बात करनी है।”
सोनल ने बिना कुछ कहे सामने वाली कुर्सी खींच ली, लेकिन वह बैठी नहीं। वह वहीं खड़ी रही, उसकी निगाहें राहुल के ऊपर थीं। राहुल धीरे से अपनी कुर्सी से उठा और सोनल की तरफ बढ़ा। ऑफिस की ठंडी हवा भी उनके बीच पनप रही गर्माहट को कम नहीं कर पा रही थी। राहुल ने सोनल के करीब आकर, उसके गाल पर अपनी ऊँगली से छुआ। एक सिहरन सोनल के पूरे बदन में दौड़ गई।
“तुम जानती हो ना, सोनल, कि मैं क्या चाहता हूँ?” राहुल की आवाज़ धीमी और कामुक थी।
सोनल ने बस अपनी आँखें झुका लीं, होंठों को हल्के से दबाते हुए। उसकी साँसें तेज हो गई थीं।
राहुल ने एक हाथ सोनल की कमर पर रखा और उसे अपनी ओर खींच लिया। सोनल का शरीर खुद-ब-खुद उसके शरीर से चिपक गया। राहुल ने उसके सिर को ऊपर उठाया, और बिना किसी देरी के अपने होंठ उसके नर्म होंठों पर रख दिए। वह एक भूखा, प्यासा चुम्बन था जो सोनल के भीतर की हर दबी हुई इच्छा को जगा रहा था। सोनल ने भी अपनी आँखें बंद कर लीं और खुद को उस पल के हवाले कर दिया। उसकी उँगलियाँ धीरे से राहुल के बालों में उलझ गईं।
चुम्बन गहरा होता गया, जब तक कि उन दोनों को साँस लेने की ज़रूरत महसूस हुई। राहुल ने अपने होंठ सोनल की गर्दन पर फेरे, और सोनल के मुँह से एक मदहोश आह निकली। राहुल ने उसके सलवार कमीज़ के दुपट्टे को ज़मीन पर गिराया, फिर उसके कुर्ते के बटन खोलने लगा। जैसे-जैसे बटन खुलते गए, सोनल का गोरा पेट और छातियाँ धीरे-धीरे बाहर आने लगीं। राहुल की आँखें उन पर गड़ी थीं, जैसे उसने कभी ऐसा कुछ देखा ही न हो। उसने सोनल की ब्रा को एक झटके में हटा दिया, और उसकी छातियाँ राहुल की आँखों के सामने नग्न हो गईं। सोनल शर्माने की बजाय, अपने भीतर एक अजीब सी शक्ति महसूस कर रही थी।
राहुल ने झुककर उसकी एक निप्पल को अपने मुँह में ले लिया और उसे चूसने लगा। सोनल के पैरों तले ज़मीन खिसक गई, उसके हाथों ने राहुल के कंधे को कसकर पकड़ लिया। उसकी सिसकियाँ पूरे केबिन में गूँजने लगीं। राहुल ने उसे वहीं मेज़ पर सहारा देते हुए बैठा दिया, और उसकी सलवार को धीरे-धीरे नीचे सरका दिया। सोनल अब पूरी तरह से नग्न थी, सिर्फ उसकी पैंटी उसके गुप्तांगों को ढक रही थी। राहुल की भूखी आँखें उस पर टिकी थीं। उसने एक पल भी नहीं गंवाया और सोनल की पैंटी को भी उतार फेंका।
सोनल का योनि गुलाबी और नम दिख रही थी, कामोत्तेजना से भरी हुई। राहुल ने उसकी जाँघों को फैलाया और अपनी उँगलियों से उसकी नमी को महसूस किया। सोनल पूरी तरह से बेकाबू हो चुकी थी, वह राहुल का नाम फुसफुसा रही थी। राहुल ने अपनी पैंट खोली, और उसका कड़ा लिंग बाहर आ गया, जो सोनल की प्रतीक्षा कर रहा था। सोनल ने उसे देखा, और एक गहरी साँस ली।
राहुल ने खुद को सोनल के करीब किया, और धीरे से अपने लिंग के सिरे को सोनल की योनि पर रखा। सोनल ने अपनी कमर उठाई, जैसे वह उसे अंदर लेना चाहती हो। राहुल ने एक गहरा धक्का दिया, और सोनल के मुँह से एक चीख निकल गई जो तुरंत खुशी की आहों में बदल गई। उसका शरीर राहुल के आकार को समायोजित कर रहा था। राहुल ने अपनी गति धीमी रखी, फिर धीरे-धीरे तेज करने लगा। केबिन में सिर्फ उनके शरीर के टकराने की आवाज़ें, सोनल की मदहोश सिसकियाँ और राहुल की गहरी साँसें थीं।
राहुल ने सोनल की कमर पकड़कर उसे और अपनी ओर खींचा, उसकी योनि में और गहरा प्रवेश करते हुए। सोनल अपनी आँखें बंद किए, अपने चरम सुख की ओर बढ़ रही थी। उसके पूरे शरीर में सिहरन उठ रही थी। वह अपनी सारी मर्यादाओं को भूल चुकी थी। “राहुल… और तेज़… प्लीज़…” वह फुसफुसाई।
और राहुल ने उसकी इच्छा पूरी की। वह और तेज़, और गहरा होता गया, जब तक कि सोनल ने एक ज़ोरदार चीख के साथ अपना चरम सुख नहीं पा लिया, उसका शरीर काँप रहा था। राहुल ने भी कुछ ही पलों में अपना वीर्य सोनल के भीतर छोड़ दिया, खुद भी एक गहरी आह के साथ चरम पर पहुँच गया।
दोनों कुछ देर तक एक-दूसरे से चिपके रहे, उनकी साँसें तेज थीं और शरीर पसीने से भीगा हुआ था। इस बंद केबिन में, उनकी **ऑफिस में चोरी छिपे इश्क की दास्तान** ने एक नया रंग ले लिया था। सोनल ने राहुल की छाती पर अपना सिर रखा, संतुष्टि और हल्की थकान से भरी हुई। राहुल ने उसके बालों को सहलाया। यह सिर्फ एक शारीरिक मिलन नहीं था, बल्कि उनके बीच पनपे गहरे आकर्षण और हवस की आग को बुझाने का एक रास्ता था, जिसका एहसास उन्हें देर रात के इस सन्नाटे में हो रहा था। उन्हें पता था, यह बस शुरुआत थी।
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