दोपहर की तपती धूप में, रीना के जिस्म में भी एक अजीब सी आग सुलग रही थी। उसका पति प्रकाश शहर गया हुआ था, और गाँव का घर बिल्कुल शांत था, जैसे हर कोने से कोई गहरी साँस ले रहा हो। रीना ने अपनी साड़ी का पल्लू थोड़ा ढीला किया, पसीने की बूँदें उसकी गर्दन से होकर नीचे जा रही थीं, और उसकी देह में एक अनकही बेचैनी हिलोरें ले रही थी। उसी पल दरवाज़े पर हल्की सी दस्तक हुई।
“कौन?” रीना ने धीमे स्वर में पूछा।
“मैं, मोहन दीदी,” एक जवान, घनी आवाज़ आई। मोहन, पड़ोस का लड़का, जो अक्सर छोटे-मोटे काम के लिए आता था। रीना के दिल की धड़कन अचानक तेज़ हो गई। पिछले कुछ हफ़्तों से मोहन की आँखें रीना पर कुछ ज़्यादा ही ठहरने लगी थीं, और रीना की आँखें भी उसे अनदेखा नहीं कर पाती थीं। यह उनकी छुप छुप कर प्यार करने की कहानी की शुरुआत थी, एक ऐसी कहानी जो किसी को पता नहीं चल सकती थी।
रीना ने दरवाज़ा खोला। मोहन सामने खड़ा था, उसकी पसीने से भीगी टी-शर्ट उसके मज़बूत जिस्म से चिपकी थी, और उसकी आँखों में एक अजीब सी लपट थी। “प्रकाश भैया ने कहा था, पिछला स्टोर रूम ठीक करवाना है।”
“हाँ, आओ,” रीना ने कहा, उसकी आवाज़ में एक अजीब सी कम्पन थी। वह उसे अंदर ले गई, स्टोर रूम की तरफ़ इशारा किया। वह कमरा घर के एक कोने में था, जहाँ दिन में भी हल्की-फुल्की रौशनी रहती थी, और बाहर की आवाज़ें मुश्किल से पहुँचती थीं।
जैसे ही मोहन स्टोर रूम में घुसा, रीना भी उसके पीछे आ गई और दरवाज़ा भीतर से बंद कर दिया। कमरे में हल्की सी घुटन और मिट्टी की खुशबू थी। मोहन ने मुड़कर रीना को देखा। उसकी साँसें तेज़ हो गईं। रीना की साड़ी उसके वक्षों पर कसकर लिपटी थी, और पसीने के कारण वो और भी स्पष्ट दिख रहे थे। मोहन की आँखें रीना के भरे-पूरे जिस्म पर ठहर गईं।
“क्या हुआ, मोहन?” रीना ने धीमे से पूछा, उसकी आवाज़ में एक निमंत्रण था।
मोहन बिना कुछ कहे रीना के करीब आ गया। रीना का दिल ज़ोरों से धड़क रहा था। उसने अपने होंठों को रीना के होंठों पर रख दिया, एक जंगली प्यास के साथ। रीना ने पहले थोड़ा हिचकिचाया, फिर उसके चुम्बन का जवाब पूरी शिद्दत से दिया। उनके होंठों की गरमाहट, साँसों का मिलन, और जिस्मों की नज़दीकी ने कमरे की हवा में एक नई आग लगा दी। मोहन के मज़बूत हाथ रीना की कमर पर कस गए, और उसने रीना को अपनी ओर खींच लिया।
रीना की साड़ी का पल्लू कब गिरा, उसे पता ही नहीं चला। मोहन ने अपनी उंगलियों से उसकी पीठ सहलाई, फिर ब्लाउज के हुक खोले। रीना ने अपनी आँखें बंद कर लीं, जब उसके गर्म होंठ रीना की गर्दन से होते हुए उसके वक्षों तक पहुँचे। मोहन ने उसके उभारों को अपने मुँह में भर लिया, और रीना के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली आह निकली। यह उनकी छुप छुप कर प्यार करने की कहानी थी, जहाँ मर्यादाओं की हर दीवार टूट रही थी।
“बस… मोहन…” रीना ने हाँफते हुए कहा, पर उसके शरीर ने मोहन को और कसकर अपनी तरफ़ खींच लिया। मोहन ने धीरे-धीरे रीना की साड़ी खोली, उसे उसके जिस्म से अलग कर दिया। अब रीना सिर्फ़ पेटीकोट और ब्रा में थी, उसकी साँसें तेज़ हो चुकी थीं। मोहन ने उसे अपनी बाहों में उठाया और दीवार के सहारे टिका दिया। उसके गर्म हाथ रीना के कोमल जिस्म पर घूम रहे थे, हर स्पर्श आग लगा रहा था।
मोहन ने अपनी टी-शर्ट उतारी, उसके सुडौल, मज़बूत जिस्म को देखकर रीना की आँखें चमक उठीं। मोहन ने फिर उसके पेटीकोट और ब्रा को भी उतार दिया, और रीना अब पूरी तरह से नग्न थी, अपने वक्षों को छिपाने की कोशिश कर रही थी, पर मोहन ने उसके हाथों को पकड़ लिया। “छिपाओ मत… रीना दीदी,” उसने फुसफुसाया, “तुम बेहद ख़ूबसूरत हो।”
मोहन ने उसे ज़मीन पर बिछे एक पुराने बोरे पर हल्के से लिटाया। रीना की आँखें बंद थीं, उसकी देह आग की तरह जल रही थी। मोहन ने अपने पैंट की ज़िप खोली, और रीना की निगाहें उसके उभार पर पड़ीं। एक पल को वह डर गई, पर अगले ही पल उसकी प्यासी देह ने उस डर को निगल लिया। मोहन ने रीना की जाँघों को फैलाया और धीरे से उसके भीतर प्रवेश किया। रीना के मुँह से एक चीख़ निकली, जो पल भर में आनंद में बदल गई।
मोहन की हर धक्के के साथ रीना का जिस्म ऊपर उठ रहा था, उसका हर अंग कंपन कर रहा था। उनकी साँसें एक-दूसरे में घुल-मिल रही थीं, और कमरे की हर चीज़ उनकी इस गुप्त लीला की गवाह थी। रीना ने मोहन को अपनी बाहों में जकड़ लिया, उसके नाखूनों से उसकी पीठ सहला रही थी। दोनों एक दूसरे में खो चुके थे, आनंद की चरम सीमा पर पहुँच चुके थे। यह उनकी छुप छुप कर प्यार करने की कहानी का सबसे गहरा, सबसे नग्न पल था।
एक तेज़ कँपकँपी के साथ, दोनों शांत हो गए, एक दूसरे की बाहों में ढीले पड़ गए। उनकी साँसें अब भी भारी थीं, पर अब उनमें एक गहरी संतुष्टि थी। मोहन ने रीना के माथे को चूमा। “हमें अब जाना होगा,” उसने फुसफुसाया। रीना ने आँखें खोलीं और मोहन को देखा, उसकी आँखों में अब एक नई चमक थी। उसने मुस्कुराकर मोहन के होंठों पर एक आख़िरी चुम्बन दिया। उनका यह राज़, उनके दिल में हमेशा के लिए दफ़्न हो गया था, और यह सिलसिला अभी शुरू ही हुआ था।
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