उस भीड़ भरी बस में मेरी निगाहें सीधे उसकी गहराती आँखों से जा मिलीं, और एक झटके में मेरा पूरा वजूद कंपकंपा उठा। रति, मेरा नाम रति है, और आज से पहले मैंने कभी किसी अजनबी में ऐसी आग नहीं देखी थी। वह एक कोने में बैठा था, उसकी मज़बूत भुजाएँ और चौड़ा सीना एक साधारण सी टी-शर्ट में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे थे। बस खचाखच भरी थी, हर मोड़ पर धक्का लगता, और मैं हर बार अपनी पकड़ ढीली पाती। तभी एक ज़ोरदार झटके के साथ, मैं सीधे उसकी गोद में जा गिरी।
“क्षमा करना!” मैंने हड़बड़ा कर कहा, मेरा चेहरा शर्म से लाल था। पर उसकी गर्म हथेली ने मेरी कमर को ऐसे थामा कि मुझे उठने में भी देर लगी। उसकी साँसें मेरे माथे पर महसूस हुईं, और उसकी आँखें मेरी आँखों में गहराई से झाँकने लगीं। “कोई बात नहीं,” उसने धीमी, मादक आवाज़ में कहा, “लगता है बस ने हमें मिलाना चाहा।” मोहित, उसने अपना नाम बताया। और बस में हुई पहली मुलाकात का प्यार, उस पल से ही हमारे जिस्मों में बिजली की तरह दौड़ गया था। मेरी साड़ी का पल्लू सरक चुका था, और मैं महसूस कर सकती थी कि उसकी निगाहें मेरी खुली कमर और वक्ष की रेखाओं पर ठहर गई थीं। एक अजीब सी गुदगुदी मेरे भीतर उठ रही थी।
बाकी का सफ़र शब्दों से कम और स्पर्श से ज़्यादा बीतने लगा। बस में भीड़ इतनी थी कि किसी को हमारी नज़दीकी पर ध्यान ही नहीं गया। हर बार जब बस एक गड्ढे से गुज़रती, मैं उसके और करीब आ जाती। उसकी उँगलियाँ अनजाने में मेरी कलाई को छू जातीं, फिर सरकती हुई मेरी बाजू पर और फिर हल्के से मेरी कमर पर टिक जातीं। मेरे जिस्म में जैसे कोई आग लग गई थी, हर स्पर्श पर एक रोमांच दौड़ जाता। मैं भी जानबूझकर कभी अपने बालों को झटकती, तो कभी उसके कंधे से सट जाती। हमारी आँखों में एक अनकही प्यास साफ झलक रही थी।
जब हमारी मंज़िल आई और हम बस से उतरे, तब शाम ढल चुकी थी। अगला गाँव दूर था और आखिरी बस जा चुकी थी। मोहित ने अपनी आवाज़ में एक अजीब सा ठहराव लिए कहा, “पास में एक छोटा सा लॉज है, रात वहीं बिताते हैं?” मेरी ज़बान कुछ कह नहीं पाई, पर मेरे जिस्म की हर कोशिका हाँ कह रही थी। यह बस में हुई पहली मुलाकात का प्यार अब एक अनजाने सफ़र पर निकल चुका था।
लॉज का कमरा सादा था, पर उस पल वह हमें स्वर्ग से भी सुंदर लगा। जैसे ही दरवाज़ा बंद हुआ, मोहित ने बिना किसी हिचकिचाहट के मुझे अपनी बाहों में भर लिया। “अब कोई सीमा नहीं,” उसने फुसफुसाते हुए कहा। उसके गर्म होंठ मेरे होंठों से ऐसे मिले, जैसे सदियों की प्यास बुझाने को बेताब हों। मैंने भी पूरी शिद्दत से उसका जवाब दिया, मेरी उँगलियाँ उसके बालों में उलझ गईं। उसकी ज़बान ने मेरे मुँह के हर कोने को तलाशना शुरू किया, और मैं मदहोश होती जा रही थी।
उसकी हथेलियाँ मेरी कमर पर सरकती हुई मेरी साड़ी के पल्लू को नीचे धकेलने लगीं। मेरी साँसें तेज़ हो गईं जब उसने मेरी पीठ से ब्लाउज़ के हुक खोले। मेरा ब्लाउज़ ज़मीन पर गिरा, और मेरे वक्ष उसके सीने से जा लगे। ब्रा की पतली पट्टी हटाते ही, मेरे उभरे हुए वक्ष उसके सामने थे, कँपकँपाते और इंतज़ार करते हुए। उसने धीरे से मेरे एक निप्पल को अपने मुँह में लिया और चूसने लगा, मेरी आहें पूरे कमरे में गूँज उठीं। मैं पूरी तरह से पिघल रही थी, उसकी उँगलियाँ अब मेरी पेटीकोट के नाड़े को खोलने में लगी थीं।
एक-एक कर हमारे कपड़े ज़मीन पर गिरने लगे, और हम दोनों पूर्ण नग्न होकर एक-दूसरे के सामने थे। मोहित की आँखें मेरे जिस्म पर ऐसे टिकी थीं, जैसे कोई भूखा शिकारी अपने शिकार को देख रहा हो। उसने मुझे बिस्तर पर धकेला और मेरे ऊपर आ गया। उसकी मज़बूत देह का वज़न मेरे ऊपर स्वर्गिक अहसास दे रहा था। उसके होंठ फिर से मेरे होंठों पर थे, और उसकी हथेलियाँ मेरी जाँघों के बीच की गरमाहट को तलाश रही थीं। मेरा शरीर उत्तेजना से काँप रहा था।
जब उसने अपने कठोर पुरुषत्व को मेरे भीतर महसूस कराया, तो एक तीव्र सुख की लहर मेरे पूरे शरीर में दौड़ गई। मैंने अपनी टाँगें उसकी कमर के चारों ओर कस लीं और उसे और गहराई से अंदर खींच लिया। हम दोनों की साँसें तेज़ हो गईं, और कमरे में सिर्फ़ हमारे जिस्मों के मिलने की आवाज़ें और हमारी मदहोश आहें गूँज रही थीं। मोहित ने अपनी गति बढ़ाई, और मैं हर धक्के के साथ चरम सुख की ओर बढ़ती जा रही थी। “और… और तेज़…” मैंने फुसफुसाते हुए कहा, और उसने मेरी बात मान ली। कुछ ही पलों में, हम दोनों एक साथ चरमसुख की गहराइयों में डूब गए, हमारे जिस्म एक-दूसरे से पूरी तरह से जुड़े हुए थे।
थके-हारे, पर बेहद संतुष्ट, हम दोनों एक-दूसरे की बाहों में पड़े थे। मेरा सिर उसके सीने पर था, और मैं उसकी दिल की धड़कनें सुन सकती थी। वह आज भी मुझे याद है, बस में हुई पहली मुलाकात का प्यार, जिसने हमें एक अनकही कहानी लिखने का मौक़ा दिया, एक ऐसी कहानी जिसकी यादें मेरे जिस्म और रूह में हमेशा ज़िंदा रहेंगी। यह सिर्फ़ एक मुलाकात नहीं थी, यह दो जिस्मों का एक-दूसरे में खो जाने का पहला क़दम था।
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