उस गर्मी और पसीने से तरबतर भीड़ भरी बस में, मेरा दिल किसी और ही आग में जल रहा था। मैं प्रिया, रोज़ की तरह बस में धक्के खा रही थी जब अचानक बस ने एक ज़ोर का ब्रेक मारा। मैं लड़खड़ाई और सीधे एक मज़बूत सीने से जा टकराई। मेरी नज़रें ऊपर उठीं और मैंने राहुल को देखा। उसकी गहरी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, जो मेरी रूह तक को छू रही थी। हमारे जिस्मों के बीच वो मामूली सा स्पर्श बिजली बनकर दौड़ गया। मुझे लगा कि उस पल, हमें पता ही नहीं चला कि कब **बस में हुई पहली मुलाकात का प्यार** एक अटूट बंधन की शुरुआत बन गया।
राहुल ने अपनी मज़बूत बाँहों से मुझे सहारा दिया, और मैंने महसूस किया उसकी उंगलियाँ मेरी कमर पर ठहर गईं। बस में भयानक भीड़ थी, और हम एक-दूसरे से चिपक कर खड़े थे। हर मोड़ पर, हर झटके पर, हमारे शरीर एक-दूसरे से और करीब आते। उसके होंठ मेरे कान के पास थे, “संभल कर,” उसने फुसफुसाया, और उसकी गर्म साँसों ने मेरे पूरे शरीर में सिहरन दौड़ा दी। मेरी साड़ी उसके सीने से दब रही थी, और मैं अपने स्तनों के उभार को उसकी छाती पर महसूस कर पा रही थी। मेरी साँसें तेज़ हो रही थीं, और मुझे लगा कि वो भी मेरी धड़कनों को सुन रहा है।
जब मेरा स्टॉप आया, तो राहुल ने अचानक कहा, “क्या मैं तुम्हें घर तक छोड़ दूं?” मेरी ज़ुबान से ‘हाँ’ निकल गई, बिना सोचे समझे। बस से उतरते ही, शाम की हल्की रोशनी में भी उसकी आँखों की चमक मुझे साफ़ दिखाई दे रही थी। हमने बातें करना शुरू किया, और हर पल हम एक-दूसरे में और गहराई से उतरते जा रहे थे। जब हम मेरे घर के दरवाज़े पर पहुँचे, तो हवा में एक अजीब सा तनाव था। मेरी नज़रें उसके होंठों पर टिकी थीं, और मुझे लगा कि वो भी मेरे गुलाबी होंठों को निहार रहा है। मैंने बिना कुछ सोचे, अपना हाथ आगे बढ़ाया और उसके गाल को सहलाया। उसकी साँस थम सी गई।
अगले ही पल, उसके होंठ मेरे होंठों पर टूट पड़े। यह एक भूखा, बेताब चुंबन था, जिसमें सालों की प्यास समाई थी। हमारे जिस्म एक-दूसरे में सिमट गए, और उसने मुझे अपने बाँहों में भरकर दरवाज़े से अंदर धकेल दिया। दरवाज़ा बंद होते ही, कपड़े एक-एक करके फर्श पर गिरने लगे। उसने मुझे उठा लिया और सीधा बेडरूम में ले गया। मेरे स्तन उसके सीने से रगड़ रहे थे, और मैं अपनी गरमा-गरम साँसों से उसकी गर्दन को सहला रही थी। बिस्तर पर गिरते ही, उसके हाथ मेरी साड़ी को हटाते हुए मेरी जांघों पर चढ़ गए। उसने मेरे गुलाबी निप्पलों को अपने मुँह में भर लिया और मैं एक गहरी आह भरने लगी।
“प्रिया,” उसने अपनी गरमा-गरम साँसों से मेरे कानों को सहलाया, “तुम इतनी खूबसूरत हो कि **बस में हुई पहली मुलाकात का प्यार** आज मेरी रूह को जगा रहा है।” उसके शब्द मेरे भीतर तक उतर गए। उसने मेरी टाँगों को फैलाया और उसके मज़बूत अंग ने मेरी योनि के द्वार को सहलाया। मैंने अपनी कमर उठाई, और अगले ही पल, वो मेरे भीतर समा गया। एक मीठी सी चीख़ मेरे होंठों से निकली। हम एक लय में हिलने लगे, उसकी हर धक्के के साथ मैं और ज़्यादा गहराई में डूबती जा रही थी। हमारे जिस्म पसीने से तरबतर थे, और कमरा हमारी आहों और फुसफुसाहटों से भर गया था।
राहुल ने अपनी गति तेज़ की, और मैंने उसकी पीठ पर अपने नाखून गड़ा दिए। मेरी योनि उसके अंग को कसकर जकड़ रही थी, और हम दोनों चरम सीमा की ओर बढ़ रहे थे। एक ज़ोरदार झटके के साथ, हमारे जिस्म एक साथ काँपे और हम एक-दूसरे की बाँहों में चूर हो गए। संतुष्टि की एक गहरी लहर हमारे पूरे शरीर में दौड़ गई। मैं उसकी छाती पर लेटी थी, उसकी तेज़ धड़कनों को महसूस कर रही थी। उस रात, **बस में हुई पहली मुलाकात का प्यार** सिर्फ़ एक इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक जन्मों का बंधन बन गया था, जिसने हमारे जिस्मों और रूहों को हमेशा के लिए एक कर दिया था।
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