बारिश की वो रात, जैसे हर बूँद में कोई ख़ास आग भरी हो, जिसने रंजना के तन-मन को दहका दिया था। खिड़की से आती हवा के हर झोंके के साथ उसका गुलाबी आँचल सरक रहा था, और उसकी आँखें दरवाज़े पर टिकी थीं, इंतज़ार में, एक ख़ास एहसास की प्यास में। बिजली कब की गुल हो चुकी थी और मोमबत्ती की पीली रोशनी में रंजना का बदन और भी कामुक लग रहा था, एक अप्रकट आमंत्रण। उसके भीतर कुछ करवट ले रहा था, एक अनजाना उतावलापन, जिसे वो अपने पति, अर्जुन, के सिवा और किसी के साथ शांत नहीं करना चाहती थी।
तभी दरवाज़ा खुला और अर्जुन भीतर आए, उनके कपड़े बारिश से भीगे हुए थे। जैसे ही उनकी निगाहें रंजना पर पड़ीं, एक चिंगारी भड़की जिसने उस अँधेरे कमरे को भी रोशन कर दिया। अर्जुन ने दरवाज़ा बंद किया और रंजना की ओर बढ़े, उनके कदमों में एक अलग ही धमक थी। “क्या बात है मेरी रानी, आज इतनी चुपचाप क्यों हो?” उनकी आवाज़ में वो जानी-पहचानी शरारत थी। रंजना ने सिर उठाया, उसकी आँखों में जो गहरा नशा था, अर्जुन उसे साफ़ पढ़ सकते थे। “इंतज़ार कर रही थी,” वो फुसफुसाई, उसकी आवाज़ में शहद की मिठास थी।
अर्जुन ने एक पल भी ज़ाया न किया। वो सीधा रंजना के पास पहुँचे और उसे बाहों में कस लिया। बारिश की ठंडक और उनके बदन की गरमी का मेल रंजना के भीतर एक तूफ़ान उठा गया। उनके होंठ मिले, पहले धीरे से, फिर एक उन्मादी भूख के साथ। एक दूसरे को चूमते हुए, अर्जुन के गीले कपड़े रंजना की पतली साड़ी पर भारी पड़ रहे थे, पर रंजना को इसकी कोई परवाह न थी। उसने अर्जुन के बाल पकड़े और उन्हें और गहराई से चूमने लगी। यह उनके बेकाबू जवानी का गरमा गरम प्यार था, जो किसी सीमा को नहीं जानता था। अर्जुन के हाथों ने रंजना की कमर थामी और उसे अपनी ओर खींच लिया, उनके बदन एक दूसरे में समाने को बेताब थे।
कपड़े एक-एक कर उतरने लगे, बारिश की आवाज़ और मोमबत्ती की लौ के बीच उनके साँसों की गरमी कमरे में फैल गई। रंजना की साड़ी ज़मीन पर गिरी और अर्जुन ने उसकी नंगी पीठ पर अपना हाथ फेरा। उसकी मुलायम त्वचा पर उनके हाथों का स्पर्श बिजली की तरह दौड़ गया। अर्जुन ने उसे गोद में उठा लिया और पलंग पर लिटा दिया। अब बस उनकी आँखें एक-दूसरे में खोई थीं, और उनके बदन एक-दूसरे को तलाश रहे थे। अर्जुन ने रंजना के वक्षस्थल पर झुके, उनके कोमल उभारों को अपने होंठों से ढँक लिया। रंजना के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगीं, उसकी आँखें बंद हो गईं और उसने अपने पैर फैला दिए।
अर्जुन ने नीचे झुककर रंजना के हर अंग को अपने प्यार से सहलाया, उसके भीतर की आग को और भड़काया। रंजना की उत्तेजना चरम पर पहुँच चुकी थी। उसने अपने पैरों से अर्जुन को अपने ऊपर खींचा और उनकी कामुकता चरम पर पहुँच गई। जब अर्जुन उसके भीतर समाए, तो रंजना के मुँह से एक चीख़ निकली, जो खुशी और राहत दोनों से भरी थी। उनके बदन एक-दूसरे से चिपक गए, पसीने की बूँदें उनकी त्वचा पर चमक रही थीं। हर धक्के के साथ, बेकाबू जवानी का गरमा गरम प्यार कमरे में गूँज रहा था। रंजना अपनी कमर हिलाकर अर्जुन का साथ दे रही थी, और अर्जुन ने अपनी पूरी ताक़त से उसे प्यार किया। उनके साँसों की रफ़्तार तेज़ हो चुकी थी, और वो एक दूसरे में पूरी तरह खो चुके थे।
कई पल ऐसे ही गुज़र गए, जब तक कि दोनों एक साथ, सुख के चरम पर न पहुँच गए। उनके बदन शांत पड़े थे, पर उनके दिल अब भी तेज़ी से धड़क रहे थे। अर्जुन ने रंजना को बाहों में भरा और उसके माथे पर चूमा। रंजना ने अपनी आँखें खोलीं और मुस्कुराई। “यह बेकाबू जवानी का गरमा गरम प्यार ही है,” वो फुसफुसाई, “जो हमें हर रात एक नई दुनिया में ले जाता है।” बारिश अब भी बाहर तेज़ हो रही थी, पर उनके भीतर की आग ने उस रात को एक अविस्मरणीय और सबसे सुखद बना दिया था।
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