दोपहर की सुनसान खामोशी में, रीमा भाभी का मन देवर आकाश की ओर कुछ ज्यादा ही भटक रहा था। अपने पति के काम पर जाने के बाद, घर का हर कोना उसे सूना और अपनी प्यास से भरा महसूस हो रहा था। आकाश, जो घर पर अपनी परीक्षा की तैयारी कर रहा था, रीमा के दिल और दिमाग पर पूरी तरह छाया हुआ था। उसकी मर्दाना जवानी, उसकी आँखों में छिपी शरारत, और उसका मासूमपन, रीमा को हर पल बेचैन कर रहा था। रीमा के मन में आकाश के प्रति जो भावनाएँ उमड़ रही थीं, वह कुछ और नहीं बल्कि **भाभी का देवर के प्रति आकर्षण** था, जो अब एक ज्वलंत हकीकत बन चुका था।
रीमा ने एक गहरी साँस ली, अपनी ढीली पड़ चुकी साड़ी को थोड़ा और नीचे सरकाया, ताकि उसकी भरी हुई छातियाँ और स्पष्ट दिखें। वह आकाश के कमरे की ओर बढ़ी, जहाँ वह अपनी किताबों में खोया हुआ था। “आकाश, थक गए होगे? चाय बना दूँ?” उसकी आवाज़ में एक अनकही मिठास थी, जो उसने जानबूझकर भरी थी।
आकाश ने सिर उठाया, उसकी नज़रें पल भर के लिए रीमा के उभरे हुए वक्ष पर ठहरीं, फिर तुरंत हट गईं। “नहीं भाभी, बस थोड़ी देर और। फिर खा लूँगा।” उसकी आवाज़ में संकोच था, लेकिन रीमा ने उसकी आँखों में अपनी चाहत की प्रतिध्वनि देख ली थी।
“अरे, तो किताब छोड़ो थोड़ी देर। मुझसे बात करो,” रीमा उसके करीब जाकर बैठ गई, उसका पल्लू जानबूझकर थोड़ा सरका दिया, जिससे उसके गोरे बदन की हल्की झलक आकाश को मिल सके। उसकी साँसों की गर्माहट आकाश के कंधे पर महसूस हुई। आकाश को लगा जैसे उसके बदन में बिजली दौड़ गई हो। उसने अपनी आँखें किताबों पर जमाने की कोशिश की, पर नज़रें बार-बार रीमा के अधखुले वक्ष और गुलाबी होंठों पर अटक जाती थीं।
रीमा ने धीरे से अपना हाथ आकाश की बाजू पर रख दिया। “क्या बात है आकाश? तुम आजकल थोड़े खोए-खोए रहते हो।” उसके स्पर्श से आकाश का शरीर सिहर उठा। “कुछ नहीं भाभी, बस पढ़ाई का तनाव है।”
“तनाव? या कुछ और?” रीमा की उँगलियाँ उसकी बाजू पर धीरे-धीरे ऊपर-नीचे सरक रही थीं। आकाश ने हिम्मत करके अपनी आँखें रीमा की आँखों में डालीं। उन आँखों में उसने अपनी ही प्यास की आग को देखा। यह पल था, जब **भाभी का देवर के प्रति आकर्षण** अपनी सारी सीमाएँ तोड़ रहा था। रीमा ने धीरे से अपना सिर आकाश के कंधे पर टिका दिया। उसकी साँसों की गर्माहट और उसके बदन की खुशबू आकाश को मदहोश कर रही थी।
“भाभी…” आकाश ने सिर्फ इतना ही कहा और उसकी आवाज़ गले में अटक गई। रीमा ने अपना सिर उठाया, उसकी उँगली आकाश के गाल पर धीरे से फिराई और फिर उसके होंठों पर ले गई। “बोलो क्या कहना चाहते हो?” उसकी आवाज़ में निमंत्रण था, एक स्पष्ट बुलावा।
आकाश ने अब और खुद को नहीं रोका। उसने रीमा की कमर पर अपना हाथ रखा और उसे अपनी ओर खींच लिया। उनके बदन एक दूसरे से सट गए। रीमा की साँसें तेज़ हो गईं। उसने अपने होंठ आकाश के होंठों पर रख दिए। यह कोई साधारण चुंबन नहीं था, यह प्यासी आत्माओं का मिलन था। आकाश ने रीमा के होंठों को ऐसे चूसा, जैसे वह सदियों से प्यासा हो। रीमा ने भी पूरा साथ दिया, अपनी जीभ से आकाश की जीभ को छेड़ा, उनके मुँह के अंदर एक मीठी जंग छिड़ गई।
किस करते हुए, आकाश के हाथ रीमा की पीठ से सरकते हुए उसके कूल्हों तक पहुँच गए। उसने रीमा को अपनी गोद में उठा लिया और बेडरूम की ओर बढ़ा। रीमा ने अपनी टाँगें आकाश की कमर पर कस लीं, उसके होंठ एक पल के लिए भी नहीं छूट रहे थे। बेडरूम में पहुँचकर आकाश ने उसे बिस्तर पर धीरे से लिटाया और उसके ऊपर झुक गया। रीमा ने अपनी बाँहें आकाश की गर्दन में डाल लीं।
“आज यह प्यास बुझानी ही होगी आकाश,” रीमा फुसफुसाई, उसकी आँखें वासना से भरी थीं।
आकाश ने रीमा की साड़ी और ब्लाउज को धीरे-धीरे उतारना शुरू किया। हर वस्त्र के हटने के साथ, रीमा का गोरा, भरा हुआ बदन और भी कामुक लग रहा था। जब वह सिर्फ ब्रा और पैंटी में रह गई, तो आकाश की नज़रें उसके उभरे हुए वक्ष पर टिक गईं। उसने धीरे से उसकी ब्रा खोली और रीमा के स्तन आज़ाद हो गए। आकाश ने एक स्तन को अपने मुँह में भर लिया और उसे ऐसे चूसा जैसे कोई बच्चा अपनी माँ का दूध पी रहा हो। रीमा के मुँह से दर्द और आनंद से भरी एक आह निकली। उसकी उँगलियाँ आकाश के बालों में उलझ गईं।
आकाश ने अपने कपड़े भी उतार दिए, और अब दोनों नग्न थे। रीमा की नज़रें आकाश के उत्तेजित लिंग पर पड़ीं, जो पूरी तरह से खड़ा था। उसने धीरे से अपना हाथ बढ़ाया और उसे सहलाया। आकाश सिहर उठा। उसने रीमा की टाँगों को उठाया और उन्हें फैला दिया। रीमा का निचला हिस्सा भी पूरी तरह से गीला हो चुका था, उसकी प्यास चरम पर थी।
आकाश ने धीरे से अपना लिंग रीमा के योनिद्वार पर रखा और एक हल्के धक्के के साथ उसे अंदर धकेल दिया। रीमा के मुँह से एक तीव्र चीख निकली, जो तुरंत एक गहरी आह में बदल गई। “आह… आकाश… धीरे…”
आकाश ने रीमा के शब्दों पर ध्यान नहीं दिया, या शायद वह खुद पर नियंत्रण खो चुका था। उसने अपनी कमर की गति बढ़ा दी। हर धक्के के साथ, रीमा का शरीर मचल उठता। वह आकाश को कसकर पकड़े हुए थी, उसकी पीठ पर नाखून गड़ा रही थी। कमरे में सिर्फ उनके शरीर के टकराने की आवाज़ और रीमा की कामुक आहें गूँज रही थीं।
कुछ ही देर में, रीमा का शरीर काँपने लगा। उसने अपनी टाँगें आकाश की कमर पर कस लीं और एक गहरी चीख के साथ अपने चरम पर पहुँच गई। आकाश ने भी कुछ और धक्के दिए और एक गर्म धार रीमा के अंदर छोड़ते हुए, उसके ऊपर ही ढीला पड़ गया।
दोनों पसीने में लथपथ एक-दूसरे पर पड़े रहे। उनके शरीर अभी भी एक-दूसरे की गर्माहट महसूस कर रहे थे। रीमा ने आकाश के माथे पर एक प्यार भरा चुंबन दिया। उसने महसूस किया कि **भाभी का देवर के प्रति आकर्षण** सिर्फ वासना नहीं थी, बल्कि यह एक गहरी, अनकही भावना थी, जो शायद अब हमेशा उनके बीच रहेगी। यह सिर्फ शुरुआत थी, एक ऐसे रिश्ते की, जहाँ वासना और स्नेह का एक नया अध्याय लिखा गया था।
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