गर्मी की दोपहर में, जब घर में कोई न था, प्रिया भाभी का देवर रोहन की ओर बढ़ता हर कदम एक गहरी आग में बदल रहा था।
प्रिया, जिसकी शादी को पाँच साल हो चुके थे, कभी नहीं सोचा था कि उसके मन में ऐसी अनकही हवस जागेगी। उसके पति, रमेश, अक्सर काम से बाहर रहते थे, और घर में अकेलापन उसे और सताता था। ऐसे में, रोहन, उसका देवर, जो कुछ महीनों से उनके साथ रह रहा था, उसकी आँखों का सुकून और दिल की बेचैनी दोनों बन गया था। रोहन की मजबूत भुजाएँ, उसका चौड़ा सीना और वो अल्हड़ मुस्कान, सब कुछ प्रिया के भीतर कुछ जगा रहा था। यह *भाभी का देवर के प्रति आकर्षण* इतना गहरा और अनचाहा था कि उसे खुद पर शर्म आती, पर दिल पर किसका बस चलता है?
आज दोपहर को, जब रमेश शहर से बाहर थे, और घर में बस प्रिया और रोहन थे, तो माहौल में एक अजीब सी गर्मी और सन्नाटा था। प्रिया रसोई में काम कर रही थी, जब रोहन पानी पीने आया। उसने टी-शर्ट और लोअर पहना हुआ था, और उसके पसीने से भीगी हुई टी-शर्ट से उसके शरीर की बनावट साफ दिख रही थी। प्रिया ने एक पल के लिए अपनी नज़रें झुकाईं, पर फिर हिम्मत करके उसे देखा। रोहन ने भी उसे एक ऐसी नज़रों से देखा, जिसमें सवाल कम और इच्छा ज़्यादा थी।
“भाभी, बहुत गर्मी है,” रोहन ने कहा, उसकी आवाज़ में एक हल्की सी थरथराहट थी।
“हाँ, बेटा,” प्रिया ने जवाब दिया, उसकी आवाज़ भी अटकने लगी थी। उसने देखा कि रोहन की नज़रें उसके भीगे हुए ब्लाउज पर टिकी थीं, जहाँ से उसके उभार साफ झलक रहे थे। प्रिया का दिल ज़ोरों से धड़कने लगा। उसने जानबूझकर अपनी चुन्नी को थोड़ा और सरकाया, ताकि उसकी कमर की पतली रेखा और भी स्पष्ट हो जाए। रोहन की साँसें तेज़ हो गईं।
एक पल में, रोहन ने ग्लास नीचे रखा और प्रिया के करीब आ गया। “भाभी…” उसकी आवाज़ अब एक सरगोशी बन चुकी थी।
प्रिया को पता था कि अब पीछे हटने का कोई रास्ता नहीं था। उसकी नस-नस में एक अनजानी ऊर्जा दौड़ रही थी। उसने अपनी आँखें बंद कर लीं, जब रोहन ने धीरे से उसके कंधे पर हाथ रखा। उसका स्पर्श बिजली की तरह प्रिया के जिस्म में दौड़ गया। प्रिया ने अपनी आँखें खोलीं और रोहन की आँखों में देखा। वहाँ सिर्फ़ वासना नहीं थी, एक अटूट, गहरा *भाभी का देवर के प्रति आकर्षण* भी था, जो दोनों को अपनी ओर खींच रहा था।
रोहन ने प्रिया की कमर को अपनी उंगलियों से सहलाते हुए उसे अपने करीब खींचा। प्रिया ने कोई विरोध नहीं किया, बल्कि खुद को उसकी बाहों में ढीला छोड़ दिया। उनके होंठ एक-दूसरे की ओर बढ़े, और पलक झपकते ही एक बेताब, भूखे चुंबन में बदल गए। प्रिया ने रोहन की गर्दन को अपनी बाहों में जकड़ लिया, और उनके चुंबन में एक आग सी जल उठी। रोहन के हाथों ने प्रिया की कमर से होते हुए उसकी साड़ी को ऊपर उठाया, और फिर उसके नितम्बों को कसकर पकड़ लिया। प्रिया के मुँह से एक मदहोश सिसकी निकली।
रोहन ने उसे गोद में उठा लिया और बेडरूम की ओर बढ़ गया। प्रिया ने अपनी टाँगों को उसकी कमर के इर्द-गिर्द कस लिया, उसकी साँसें रोहन के कानों में गरम हवा भर रही थीं। बिस्तर पर पहुँचकर, उसने प्रिया को धीरे से लिटाया और फिर खुद भी उसके ऊपर झुक गया। उनके जिस्मों के बीच कोई दूरी नहीं बची थी। रोहन ने प्रिया के ब्लाउज के बटन खोलने शुरू किए, उसकी उंगलियाँ काँप रही थीं। जैसे ही ब्लाउज हटा, प्रिया के उभरे हुए वक्ष रोहन के सामने थे। उसने बिना देर किए एक को अपने मुँह में भर लिया, और प्रिया के मुँह से एक चीख निकल गई।
प्रिया के भीतर का हर अणु जाग चुका था। वह भी अब उतनी ही बेताब थी। उसने रोहन की टी-शर्ट उतार दी, उसकी मजबूत छाती पर अपने नाखून गढ़ा दिए। रोहन उसके बदन को सहलाता रहा, उसकी साड़ी और पेटीकोट कब हट गए, पता ही न चला। प्रिया अब पूरी तरह उसके सामने नंगी थी, उसका जिस्म वासना से धधक रहा था। रोहन ने अपने लोअर को भी हटा दिया, और उनके नंगे जिस्म एक-दूसरे से चिपक गए। एक गर्मजोशी भरी गर्माहट दोनों में दौड़ गई।
रोहन ने अपनी उंगलियों से प्रिया की योनि को सहलाया, जो पहले से ही गीली हो चुकी थी। प्रिया ने अपनी टाँगें और फैला दीं, उसकी आँखें बंद थीं, और उसके होंठों से मदहोश आहें निकल रही थीं। रोहन ने धीरे से खुद को प्रिया के भीतर प्रवेश कराया। प्रिया ने एक गहरी साँस ली, उसके जिस्म की अधूरी प्यास आखिरकार बुझ रही थी। हर धक्के के साथ, उनकी वासना और गहरी होती गई। प्रिया ने रोहन को और कसकर जकड़ लिया, उसके बालों को मुट्ठी में भींच लिया। उनकी आवाज़ें, उनकी आहें, बेडरूम की खामोशी में गूंज रही थीं। उनका यह गुप्त मिलन, इस *भाभी का देवर के प्रति आकर्षण* का यह चरम सुख, उन्हें एक ऐसी दुनिया में ले जा रहा था, जहाँ सिर्फ वे दोनों थे, और उनकी बेकाबू हवस।
कुछ देर बाद, जब दोनों थक कर एक-दूसरे की बाहों में ढीले पड़ गए, तो भी उनके जिस्मों से निकलने वाली गर्मी बनी हुई थी। प्रिया ने रोहन के सीने पर अपना सर रख दिया, और रोहन ने उसे कसकर अपनी बाहों में भर लिया। यह सिर्फ एक पल नहीं था, यह एक नई शुरुआत थी, उनके रिश्तों की एक नई अनकही कहानी। प्रिया के होठों पर एक संतोष भरी मुस्कान थी, जैसे उसे वह मिल गया था जिसकी उसे हमेशा से तलाश थी, अपने ही घर में, अपने ही देवर की बाहों में।
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