रीना की नम आँखें अमन की चौड़ी छाती पर टिकी थीं, और दिल में एक अजीब सी हलचल थी जो सालों से दबी हुई थी। भरी दोपहर थी, सूरज अपनी पूरी तपिश दिखा रहा था, और घर के बाकी सब सदस्य गहरी नींद में थे। इस सुनसान शांति में, रीना और अमन, एक ही कमरे में, नज़दीक लेटे हुए, अपनी धड़कनों की आवाज़ सुन रहे थे। रीना के पति काम पर थे, और यह उनके लिए एक ऐसा अवसर था, जो शायद फिर कभी न मिलता।
कुछ दिनों से रीना को अमन में एक अजीब सा बदलाव महसूस हो रहा था। वह उसे चोरी-चोरी देखता था, और उसकी आँखों में जो भूख रीना पढ़ पाती थी, वह उसे अंदर तक कंपकंपा देती थी। अमन, उसका देवर, हमेशा से ही घर में सबसे प्यारा और हँसमुख था, पर पिछले कुछ समय से उसकी नज़रें रीना के शरीर पर रुकने लगी थीं। रीना जानती थी कि यह ‘भाभी का देवर के प्रति आकर्षण’ सिर्फ एक तरफा नहीं था।
रीना ने धीरे से करवट ली, उसकी साड़ी का पल्लू सरक गया और उसका आधा पेट, और भी गहरे वक्ष का उभार अमन की नज़रों के सामने आ गया। अमन की साँसें तेज हो गईं। उसकी आँखें रीना के नम होंठों पर टिकी थीं, जो कामुकता से थोड़े खुले हुए थे। रीना ने अपनी ज़ुबान अपने होंठों पर फेरी, मानो उसे निमंत्रण दे रही हो।
“अमन,” रीना ने फुसफुसाते हुए कहा, उसकी आवाज़ में शहद घुला हुआ था। “तुम्हें नींद नहीं आ रही?”
अमन की आवाज़ गले में ही फंस गई। “भाभी… मुझे… मुझे बस…”
रीना धीरे से उसके और करीब खिसक गई, उसकी जांघ अमन की जांघ से छू गई। बिजली का एक झटका दोनों के शरीर में दौड़ गया। रीना की आँखों में एक अजीब सी चमक थी, एक चुनौती, एक निमंत्रण। “क्या हुआ अमन? तुम इतने शांत क्यों हो?” उसने अपना हाथ बढ़ाया और धीरे से अमन के हाथ को थाम लिया। उसकी उंगलियाँ अमन की नब्ज़ पर नाच रही थीं।
अमन ने हिम्मत बटोरी। “आपकी खूबसूरती… मुझे सोने नहीं देती, भाभी।”
रीना मंद-मंद मुस्कुराई। “ओह, तो मेरी खूबसूरती तुम्हें परेशान करती है?” उसने अपना हाथ उसके कंधे पर रखा और धीरे से नीचे उसकी चौड़ी छाती पर ले आई, जहाँ से उसकी टी-शर्ट के पतले कपड़े के नीचे उसकी कठोर मांसपेशियाँ महसूस हो रही थीं। रीना का स्पर्श अमन के लिए किसी आग से कम नहीं था। उसकी आँखें बंद हो गईं, और उसने खुद को रीना के इस जादू के हवाले कर दिया।
रीना के मन में अमन के प्रति, अपने देवर के प्रति एक गहरा और निषिद्ध आकर्षण था। वह जानती थी कि यह ‘भाभी का देवर के प्रति आकर्षण’ सिर्फ एक शारीरिक लालसा नहीं, बल्कि आत्मा का पुकार थी। उसने अमन को अपनी तरफ खींचा, और अमन ने भी अब कोई विरोध नहीं किया। उनके होंठ एक-दूसरे से मिल गए। यह एक भूखी, बेचैन चूम थी, जिसमें सालों की दबी प्यास थी। रीना की साड़ी कब उसके शरीर से अलग हो गई, उन्हें पता ही नहीं चला। अमन ने अपनी टी-शर्ट उतार दी, और उसके गठीले बदन को देखकर रीना की आँखें चमक उठीं।
उनके हाथ एक-दूसरे के शरीर पर बेताब होकर घूमने लगे। रीना ने अमन के बालों को मुट्ठी में भर लिया, उसकी जीभ उसकी जीभ से उलझ गई। अमन ने रीना को अपनी बाहों में उठा लिया, उसके नितंबों को कसकर पकड़ा और उसे अपने ऊपर लाद लिया। रीना ने खुशी से एक आह भरी, उसके नाखूनों ने अमन की पीठ पर निशान बना दिए। अमन ने रीना की चोली खोली, उसके बड़े, गोल स्तन उसकी नज़रों के सामने आ गए, जिनके सिरे उत्तेजना से कड़े हो गए थे। अमन ने एक स्तन को अपने मुँह में भर लिया और रीना के मुंह से एक गहरी सिसकारी निकल गई।
अब दोनों के बदन पूरी तरह से नग्न थे, एक-दूसरे की गर्मी में तप रहे थे। अमन ने रीना की टांगों को खोला और खुद को उसके गर्भगृह के मुहाने पर महसूस किया। रीना ने अपनी कमर उठाई, उसे अंदर आने का निमंत्रण दिया। एक गहरी साँस के साथ, अमन ने खुद को रीना के अंदर धकेल दिया। रीना के मुंह से एक तीखी चीख निकली जो उसने अपने होंठों से दबा ली। अंदर की वह गर्माहट, वह कसावट, अमन के लिए स्वर्ग से कम नहीं थी।
धीरे-धीरे, उनके धक्कों की गति बढ़ी, कमरे में सिर्फ उनकी कामुक साँसें और देह के टकराने की आवाज़ें गूँज रही थीं। रीना अपनी आँखें बंद किए, अमन के नाम की माला जप रही थी, और अमन, अपने देवर के रूप में, आज अपनी भाभी की आत्मा और देह को तृप्त कर रहा था। उनका ‘भाभी का देवर के प्रति आकर्षण’ आज अपनी चरम सीमा पर पहुँच गया था। हर धक्का उन्हें और गहराइयों में ले जा रहा था, जहाँ सिर्फ वासना, प्रेम और आनंद का सागर था।
कुछ देर बाद, जब दोनों का शरीर पसीने से भीग चुका था और उनकी साँसें तेज़ हो चुकी थीं, वे एक साथ चरम सुख की उस असीम गहराई में समा गए। एक दूसरे की बाहों में निढाल होकर लेटे वे जानते थे कि आज जो हुआ, वह सिर्फ एक शारीरिक मिलन नहीं था, बल्कि दो आत्माओं का ऐसा संगम था जिसकी प्यास अब शायद कभी न मिटेगी। दो जिस्म एक जान होकर इस दोपहर की गर्मी में पिघल गए, एक ऐसी प्यास बुझाते हुए जो शायद अब कभी खत्म न हो।
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