उस रात जब मेरे बड़े भाई शहर से बाहर गए थे, तब मुझे नहीं पता था कि भाभी पूजा की मदहोश कर देने वाली जवानी मेरा इंतज़ार कर रही थी, एक ऐसी रात जो मेरी प्यासी आँखों को सुकून और मेरे शरीर को अनूठा सुख देने वाली थी। गर्मी अपने चरम पर थी, और पंखा भी बस गर्म हवा ही फेंक रहा था। मैं अपने कमरे में करवटें बदल रहा था, तभी हल्की-सी खड़खड़ाहट पर मेरी नज़र दरवाज़े की तरफ गई। पूजा भाभी! वह हल्के गुलाबी रंग की नाईटी में पानी पीने किचन की तरफ जा रही थीं। नाईटी उनके सुडौल शरीर से चिपकी हुई थी, जो उनके उभारों को और भी स्पष्ट कर रही थी।
उन्होंने मुझे जागते हुए देख लिया। उनकी नज़रें पल भर के लिए मेरी नज़रों से मिलीं, और उस एक पल में, मैंने उनकी आँखों में भी वही अतृप्त प्यास देखी जो मेरी रग-रग में दौड़ रही थी। “राहुल, अभी तक सोए नहीं?” उनकी आवाज़ शहद जैसी मीठी थी। “गर्मी बहुत है, भाभी,” मैंने धीमी आवाज़ में कहा, “और नींद नहीं आ रही।” वह मेरे पास आकर खड़ी हो गईं, उनकी भीनी-भीनी खुशबू मेरे दिमाग पर छा गई। “हाँ, गर्मी तो है,” उन्होंने कहते हुए अपनी नाईटी के गले को थोड़ा खींचा, जिससे उनकी गहरी खाई और उनके स्तनों की हल्की सी झलक और साफ हो गई। मेरा दिल ज़ोर से धड़कने लगा।
“पानी ले आऊं, भाभी?” मैंने जैसे-तैसे पूछा। “नहीं, मैं पी चुकी। तुम सो जाओ, कल ऑफिस भी जाना है।” उन्होंने कहा, पर उनकी आँखों में एक अलग चमक थी, जो जाने के लिए नहीं, बल्कि रुकने के लिए कह रही थी। मैंने हिम्मत की और कहा, “अगर आप चाहें तो मैं आपके माथे की मालिश कर दूं, शायद नींद आ जाए।” वह मुस्कुराईं, एक ऐसी मुस्कान जो न सिर्फ निमंत्रण थी बल्कि सहमति भी। “ठीक है,” उन्होंने धीमी आवाज़ में कहा, और मेरे पलंग के किनारे आकर बैठ गईं।
मैं उनके करीब आया, और धीरे से अपने हाथ उनके माथे पर रखे। मेरी उंगलियां उनके मुलायम बालों को छूती हुई उनके माथे पर घूम रही थीं। मैंने देखा उनकी पलकें झुकने लगी थीं। मैं नीचे खिसका और धीरे से उनके कंधे पर हाथ फेरा। नाईटी का हल्का कपड़ा मेरी उंगलियों के नीचे से सरक रहा था। “यहाँ भी दर्द है, भाभी?” मैंने जानबूझकर पूछा। “हाँ, थोड़ा सा,” उन्होंने आँखें बंद किए ही कहा। यह सचमुच राहुल के लिए उसकी भाभी की दीवानी कर देने वाली कहानी थी, एक ऐसा सपना जो अब हकीकत बनने की कगार पर था।
मेरा हाथ उनके कंधे से नीचे सरकते हुए उनकी बाजुओं को सहलाने लगा। फिर धीरे से मैंने उनकी गर्दन पर अपनी उंगलियां फेरनी शुरू कीं। उनकी सांसें तेज़ होने लगीं। “राहुल,” उन्होंने फुसफुसाया। मैंने उन्हें जवाब नहीं दिया, बल्कि अपना चेहरा उनके करीब ले गया और उनके गाल पर धीरे से अपने होंठ रख दिए। एक हल्की सी सिहरन उनके पूरे शरीर में दौड़ गई। मैंने देखा उनकी आँखें अभी भी बंद थीं, जैसे वह इस पल को पूरी तरह महसूस कर रही हों। मैंने और हिम्मत की, और उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।
यह पहली बार था। उनके होंठ बेहद नरम और मीठे थे। शुरू में हल्की झिझक थी, पर जल्द ही वह भी मेरा साथ देने लगीं। हमारी जीभें एक-दूसरे से गुत्थम-गुत्था हो गईं, जैसे वर्षों की प्यास मिटा रही हों। मैंने अपना एक हाथ उनकी कमर पर रखा और उन्हें अपनी तरफ खींच लिया। वह मेरे सीने से चिपक गईं। मेरा दूसरा हाथ धीरे से उनकी नाईटी के भीतर घुस गया, और सीधे उनके गर्म, फूले हुए स्तन पर पहुँच गया। “आह…” उनके मुंह से एक धीमी सी आह निकली।
मैंने उनकी नाईटी को ऊपर उठाना शुरू किया। वह खुद ही थोड़ी उठकर मेरी मदद करने लगीं। कुछ ही पलों में वह पूरी तरह से मेरे सामने नग्न थीं। उनके गोरे, सुडौल बदन पर मेरी नज़रें ठहर गईं। मेरे होंठ उनके स्तनों पर टिक गए, और मैं उनके गुलाबी निप्पल्स को अपनी ज़ुबान से छेड़ना शुरू कर दिया। वह अपने नाखूनों से मेरे बालों को सहला रही थीं और मेरे कानों में धीमी-धीमी आहें भर रही थीं।
मैं धीरे-धीरे उनके पेट से नीचे खिसका, उनके मुलायम पेट को चूमता हुआ, उनकी नाभि में अपनी ज़ुबान घुमाता हुआ। वह बेताब हो चुकी थीं। मेरा हाथ अब उनकी जांघों के बीच पहुँच चुका था, और उनकी कामवासना से नम जगह को महसूस कर रहा था। मैंने धीरे से अपनी उंगली उनके अंदर डाली। “उफ्फफ… राहुल… बस अब और नहीं…” वह कहने लगीं, पर उनकी आवाज़ में ‘नहीं’ की जगह ‘हाँ’ साफ सुनाई दे रही थी। मैंने अपनी उंगलियों की गति तेज़ की, और उनकी योनि की गहराइयों को टटोला। वह पूरी तरह से भीग चुकी थीं।
अब मुझसे सब्र नहीं हो रहा था। मैंने अपने कपड़े उतारे और अपनी मज़बूत देह को उनके ऊपर लेटा दिया। मेरी उत्तेजित मर्दानगी उनकी गीली योनि पर दबाव डालने लगी। मैंने उनकी आँखों में देखा। उन आँखों में प्यास, समर्पण और एक अजीब सी तृप्ति थी। मैंने एक गहरी साँस ली और धीरे-धीरे अपने लिंग को उनके अंदर धकेलना शुरू किया। “आह… धीरे… राहुल…” उन्होंने कहा, उनकी आवाज़ दर्द और आनंद के मिश्रण से भरी थी। मैंने धीरे-धीरे पूरा अंदर तक प्रवेश किया।
हमारी सांसें एक हो चुकी थीं, हमारे शरीर पसीने से भीग चुके थे। मैं तेज़ और गहरी गति से धक्के देने लगा। वह हर धक्के पर कमर उठातीं और मेरे साथ ताल से ताल मिलातीं। उनके मुंह से निकलती हर आह, हर कराह मुझे और जोश दे रही थी। “और… ज़ोर से… राहुल…” उन्होंने फुसफुसाया। आज राहुल ने अपनी भाभी की दीवानी कर देने वाली जवानी पर अपना पूरा हक़ जमा लिया था। उनकी योनि मेरे लिंग को कसकर पकड़े हुए थी, और हम दोनों एक-दूसरे में समा चुके थे।
कुछ ही पलों में, हम दोनों एक साथ अपनी चरमोत्कर्ष पर पहुँच गए। उनके शरीर में एक तेज़ झटका लगा, और वह कसकर मेरे ऊपर सिकुड़ गईं। मेरी मर्दानगी ने भी अपनी सारी गर्मजोशी उनके अंदर उड़ेल दी। हम दोनों हाँफते हुए एक-दूसरे से चिपके रहे। उनकी साँसें अभी भी तेज़ चल रही थीं, और उनके चेहरे पर एक गहरी संतुष्टि का भाव था।
हम दोनों देर तक उसी तरह चिपके रहे, एक-दूसरे की गर्मी और अपनी धड़कनों को महसूस करते हुए। उन्होंने मेरे गाल पर एक हल्का चुंबन दिया। “तुमने मुझे… मेरा दीवाना बना दिया, राहुल,” उन्होंने फुसफुसाया। यह सिर्फ एक रात नहीं थी, यह उनके बीच शुरू हुई भाभी की दीवानी कर देने वाली कहानी की पहली कड़ी थी, एक ऐसी कहानी जो अब हर रात को अपनी नई रंगत देने वाली थी।
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