मीना भाभी की साड़ी का पल्लू जब भी सरकता, रवि की प्यासी आँखें वहीं अटक जातीं। दोपहर का वक्त था, सूरज आग बरसा रहा था और घर में सिर्फ वही दोनों थे। भैया काम पर गए थे, और मीना भाभी रसोई में कुछ काम कर रही थीं। उनकी पतली कमर, जब वो झुकतीं, साड़ी के अंदर से झलकती और रवि के तन-बदन में आग लगा देती। वह सोफे पर बैठा था, लेकिन उसकी नजरें पल भर के लिए भी मीना पर से नहीं हट रही थीं। आज उसे लगा कि यह सिर्फ एक दोपहर नहीं, बल्कि किसी अनकही, अनजानी इच्छा की दहलीज थी, जहां से एक देसी भाभी की गरमा गरम कहानी शुरू होने वाली थी।
मीना ने पानी का गिलास उठाने के लिए जैसे ही हाथ बढ़ाया, रवि तुरंत उठकर बोला, “भाभी, मैं दे देता हूँ।” उसके हाथ ने गिलास लेते हुए जानबूझकर मीना के मुलायम हाथ को छुआ। एक हल्की सी सिहरन दोनों के शरीर में दौड़ गई। मीना ने एक पल के लिए अपनी नजरें उठाईं, उसकी बड़ी-बड़ी काजल लगी आँखें रवि की आँखों से मिलीं, और उस एक पल में, एक अनकही बात दोनों के बीच हुई। रवि की रगों में खून तेजी से दौड़ने लगा।
पानी पीकर मीना अपने कमरे में आराम करने चली गई। गर्मी और थकान से उसकी नींद भारी हो रही थी। उसने साड़ी का पल्लू थोड़ा ढीला किया और बिस्तर पर अंगड़ाई लेती हुई लेट गई। उसके होंठों पर हल्की सी मुस्कान थी, शायद उसे रवि के स्पर्श का अहसास अभी भी हो रहा था। रवि ने धीरे से उसका पीछा किया। दरवाजे पर खड़ा होकर उसने मीना को देखा। उसकी साड़ी की खिसकी हुई किनारी से उसका आधा स्तन दिख रहा था, और उसकी सांसें तेज हो गईं। रवि ने दरवाजा बंद किया और धीमे कदमों से कमरे में दाखिल हुआ।
मीना को लगा जैसे कोई उसके पास आया है। उसने आँखें खोलीं और रवि को अपने सामने खड़ा पाया। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, एक हवस जो मीना ने पहले कभी नहीं देखी थी। मीना ने थोड़ा घबराकर कहा, “रवि, क्या बात है?”
रवि बिना कुछ बोले, बस मीना के पास आकर बिस्तर पर बैठ गया। उसने अपना हाथ धीरे से मीना के माथे पर रखा, उसके बालों को सहलाया। मीना का दिल तेजी से धड़कने लगा। रवि का हाथ उसके गालों से होता हुआ उसकी गर्दन पर आ गया, और फिर उसके ब्लाउज की किनारी पर। मीना ने हल्की सी आह भरी, उसकी आँखें बंद हो गईं। वह जानती थी कि अब कुछ होने वाला है, और शायद वह इसे रोकना भी नहीं चाहती थी।
रवि ने अपने होंठ मीना के होंठों पर रख दिए। एक गहरा, गीला चुम्बन, जिसमें प्यास थी, इंतजार था। मीना ने भी धीरे-धीरे जवाब देना शुरू किया। उसकी जीभ रवि की जीभ से मिली, एक मीठी जंग शुरू हो गई। रवि के हाथ अब मीना के स्तनों पर थे, वो उन्हें अपनी हथेली में भरकर मसल रहा था। मीना के मुंह से सिसकियाँ निकल रही थीं, “उम्म…रवि…उम्म…”
रवि ने मीना के ब्लाउज के बटन खोले, और उसके सुर्ख स्तन उसके सामने आ गए। उसने अपनी जीभ से उनके निप्पलों को छेड़ा, उन्हें चूसना शुरू किया। मीना का बदन ऐंठने लगा, उसके अंदर एक आग भड़क उठी। उसने रवि के बाल अपने हाथों में कस लिए। “आह… और तेज… रवि…”
कपड़े एक-एक करके हटते गए। दोनों का जिस्म अब नग्न था, पसीने और वासना से लथपथ। रवि ने मीना की जाँघों को फैलाया, और अपने कठोर लिंग को उसकी योनि के द्वार पर टिकाया। मीना ने अपनी आँखें बंद कर लीं, एक गहरी साँस ली। “आ जाओ रवि… अब और सब्र नहीं होता।”
रवि ने एक जोरदार धक्का दिया, और उसका पूरा लिंग मीना की गरम, रसीली योनि में समा गया। “आहह्हह…” मीना के मुँह से दर्द और सुख से मिली हुई एक चीख निकली। रवि ने धीमी गति से धक्के लगाने शुरू किए, और मीना हर धक्के के साथ उठकर उसका साथ दे रही थी। बिस्तर चरमरा रहा था, कमरे में सिर्फ उनकी मदहोश कर देने वाली सिसकियाँ और धक्कों की आवाजें गूँज रही थीं। हर एक चुम्बन, हर एक स्पर्श, इस देसी भाभी की गरमा गरम कहानी को और भी गहरा और रोमांचक बना रहा था।
रवि की गति बढ़ती गई, और मीना भी उतनी ही तेजी से उसका जवाब दे रही थी। दोनों का बदन एक-दूसरे से चिपक गया था, पसीना उनकी त्वचा पर मोतियों की तरह चमक रहा था। “रवि… मैं… उम्म… आ रही हूँ…” मीना के शरीर में एक कंपकंपी उठी, और वह चरमसुख की गहराइयों में डूब गई। रवि ने भी कुछ ही पलों में अपने आप को मीना के अंदर खाली कर दिया, दोनों हाँफते हुए एक-दूसरे पर गिर पड़े।
वे देर तक एक-दूसरे से लिपटे रहे, दुनिया और समय को भुलाकर। मीना ने रवि के बालों में अपनी उंगलियाँ फेरीं, उसके माथे पर एक प्यार भरा चुम्बन दिया। “मैंने कभी सोचा नहीं था, रवि…”
रवि ने उसे और कसकर अपनी बाँहों में भर लिया। वह जानते थे कि यह सिर्फ एक शुरुआत थी, उनकी देसी भाभी की गरमा गरम कहानी के कई और अध्याय अभी बाकी थे। आज की दोपहर ने उनके रिश्तों में एक नई, उत्तेजक गर्माहट भर दी थी, जो हमेशा उन्हें एक-दूसरे की ओर खींचती रहेगी।
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