दोपहर की तपती धूप में, मीरा भाभी की पतली साड़ी के पीछे से झाँकती जवानी रोहन को बेचैन कर रही थी। पंखे की धीमी हवा भी उनके माथे पर उभरी पसीने की बूँदों को सुखा नहीं पा रही थी, और हर बूँद रोहन के दिल में एक नई आग लगा रही थी। घर में कोई नहीं था, सिर्फ वो दोनों। भाभी सोफे पर अधलेटी कोई मैगज़ीन पढ़ रही थीं, उनकी साड़ी का पल्लू उनकी आधी छाती से सरक गया था, और रोहन की आँखें वहीं अटक गई थीं। उनका साँवला बदन, उभारों पर कसे ब्लाउज की महीन बुनाई, सब कुछ उसे पागल कर रहा था।
“रोहन, क्या देख रहे हो?” मीरा भाभी की आवाज़ ने उसे चौंकाया।
रोहन ने नज़रें चुराईं, “कुछ नहीं भाभी, बस गर्मी बहुत है।”
भाभी मुस्कुराईं, उनकी मुस्कुराहट में एक शरारत थी जो रोहन के अंदर तक महसूस हुई। “हाँ, गर्मी तो है… बैठो यहाँ, पास।”
रोहन का दिल ज़ोरों से धड़कने लगा। वह उनके पास आकर बैठ गया, शरीर में एक अजीब सी सिहरन दौड़ रही थी। भाभी ने अपनी मैगज़ीन एक तरफ रखी और अपनी उंगलियाँ रोहन की बांह पर फिराईं। “लगता है तुम्हें मुझसे भी ज़्यादा गर्मी लग रही है।”
उनकी उंगलियों का स्पर्श बिजली सा था। रोहन ने हिम्मत जुटाई और धीरे से भाभी का हाथ पकड़ लिया। भाभी ने हाथ नहीं छुड़ाया, बल्कि उनकी उंगलियाँ रोहन की हथेली में समा गईं। आँखों में एक गहरा, अनकहा सवाल था।
“भाभी…” रोहन की आवाज़ गले में ही अटक गई।
“क्या रोहन?” उनकी साँसें तेज़ हो गईं थीं, और रोहन ने देखा कि उनकी छाती तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रही थी।
बिना कुछ कहे, रोहन ने अपना चेहरा उनके करीब किया और उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। पहले एक नर्म स्पर्श, फिर एक भूखी प्यास। मीरा भाभी ने भी शुरू में थोड़ा झिझका, लेकिन फिर उन्होंने अपनी आँखें बंद कर लीं और इस चुंबन का पूरा आनंद लेने लगीं। उनकी साँसें अब एक हो रही थीं, और उनके होठों का रस रोहन को मदहोश कर रहा था। यह चुंबन गहरा होता गया, जब तक कि दोनों की साँस फूल न गई।
रोहन ने चुंबन तोड़ा, उसके होंठ अब उनके कानों पर थे। “आज मैं आपको अपनी भाभी की दीवानी कर देने वाली कहानी का हर पल जीना चाहता हूँ।”
मीरा भाभी की साँसों की गर्मी रोहन के गाल पर महसूस हो रही थी। उन्होंने धीरे से हामी भरी। रोहन ने धीरे-धीरे उनके साड़ी का पल्लू हटाया, फिर उनके ब्लाउज के बटन खोलने लगा। हर बटन के खुलने के साथ, उनके बदन का एक नया हिस्सा सामने आ रहा था, जो रोहन को और ज़्यादा बेताब कर रहा था। जब ब्लाउज उतर गया, तो उनके गुलाबी रंग की ब्रा में कसे स्तन रोहन की आँखों के सामने थे। वह खुद को रोक न सका और अपने होंठ उनके गुलाबी निप्पलों पर रख दिए, जो ब्रा के पीछे से झाँक रहे थे।
मीरा भाभी के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली आह निकली। उन्होंने रोहन के बालों में अपनी उंगलियाँ फंसा लीं। रोहन ने उनकी ब्रा खोली और उनके दोनों स्तन आज़ाद कर दिए। उन्हें देखकर रोहन की आँखों में वासना की चमक थी। उसने बारी-बारी से दोनों स्तनों को अपने मुँह में लिया, उन्हें चूसा, काटा, जब तक कि भाभी पूरी तरह से उत्तेजित न हो गईं। उनके शरीर में एक अजीब सी बेचैनी थी।
“और… और करो रोहन…” भाभी ने फुसफुसाते हुए कहा।
रोहन ने भाभी की साड़ी और पेटीकोट भी उतार दिया। अब वह सिर्फ एक छोटी सी पैंटी में थीं, जिससे उनकी कामुक जवानी साफ झलक रही थी। रोहन ने अपनी जीभ से उनकी नाभि के इर्द-गिर्द खेला, फिर धीरे-धीरे नीचे उतरते हुए उनकी पैंटी में झाँकती कामरस से तर योनि पर। भाभी ने अपनी टाँगें फैला दीं। रोहन ने उनकी पैंटी हटाई और उनकी मदमस्त योनि को अपनी जीभ से सहलाने लगा। भाभी की हिचकियाँ बंधी हुई थीं, उनके शरीर में एक अजीब सी थरथराहट थी।
“बस… अब और नहीं… रोहन…” भाभी ने हाँफते हुए कहा, “अब तुम मुझे भर दो…”
रोहन ने अपने कपड़े उतारे। उनके मज़बूत बदन को देखकर भाभी की आँखों में एक नई चमक थी। रोहन ने अपनी भाभी को अपनी बाँहों में उठाया और उन्हें बेडरूम की ओर ले गया। बिस्तर पर लेटते ही, उनके होंठ फिर से एक हो गए। रोहन ने धीरे से अपनी उंगलियाँ भाभी की गरम योनि में डालीं, फिर धीरे-धीरे अपने उत्तेजित लिंग को उनकी देह के द्वार पर रखा।
एक लंबी, गहरी साँस के साथ, रोहन ने एक ही झटके में खुद को भाभी के अंदर उतार दिया।
“आहहहहह!” भाभी के मुँह से दर्द और आनंद का मिश्रण निकला।
दोनों के शरीर एक साथ झूलने लगे। कमरे में सिर्फ उनके जिस्मों के टकराने की आवाज़ें, उनकी आहें और साँसें गूंज रही थीं। यह पल, यह अहसास, यही तो थी भाभी की दीवानी कर देने वाली कहानी की असल शुरुआत। रोहन अपनी भाभी में पूरी तरह से खो गया था, और मीरा भाभी भी उसे अपने हर हिस्से से स्वीकार कर रही थीं। हर धक्के के साथ, उनकी वासना और बढ़ती जा रही थी। वे दोनों एक दूसरे में इस कदर समा गए थे कि उन्हें किसी और चीज़ का होश नहीं था।
जब दोनों थक कर चूर हो गए, तो रोहन ने अपनी भाभी को अपनी बाँहों में कस लिया। उनके शरीर पसीने से भीगे हुए थे, लेकिन उनके चेहरे पर एक असीम शांति और संतुष्टि थी।
मीरा भाभी ने रोहन के बालों में उंगलियाँ फिराते हुए फुसफुसाया, “यह… यह सब क्या था, रोहन?”
रोहन ने उनके माथे पर एक चुंबन दिया। “यह हमारी… हमारी भाभी की दीवानी कर देने वाली कहानी थी, भाभी। और यह तो बस शुरुआत है।”
आज उस दोपहर ने उनके रिश्ते को एक नई दिशा दी थी, एक ऐसा राज़ जो सिर्फ उन्हीं दोनों के बीच था, और जिसकी मिठास उन्हें बार-बार करीब आने पर मजबूर करेगी।
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