उसकी साड़ी का पल्लू जैसे ही सरका, रोहन की नज़रें प्रिया के भीगे, दमकते बदन पर ठहर गईं। दोपहर की तपती धूप थी और प्रिया अभी-अभी नहाकर निकली थी। पानी की बूँदें उसके साँवले बदन पर मोती-सी चमक रही थीं, और साड़ी के भीतर से झांकता उसका कसीला यौवन रोहन की आँखों में कामुकता की आग सुलगा रहा था। उसने दरवाज़ा बंद किया और धीमी चाल से प्रिया की ओर बढ़ा।
“क्या हुआ?” प्रिया ने शरमाते हुए पूछा, पर उसकी आँखों में भी उतनी ही लालसा थी। रोहन ने कुछ नहीं कहा, बस उसके पास जाकर उसे अपनी बाहों में भर लिया। प्रिया का नर्म, गीला बदन उसके सशक्त शरीर से चिपका तो एक सिहरन दौड़ गई। रोहन ने अपनी उँगलियाँ उसकी कमर पर फैलाईं, उसकी पतली कमर पर धीरे-धीरे सहलाते हुए उसने साड़ी का पल्लू पूरी तरह हटा दिया। अब प्रिया का भीगा पेट और उसकी कमर पूरी तरह से उसके सामने थे। वह हल्का-सा काँप उठी जब रोहन ने अपनी उँगलियों से उसकी कमर के गहरे गड्ढों को छुआ। यह तो बस उनके बेकाबू जवानी का गरमा गरम प्यार था, जो अब दहक उठा था।
उसने प्रिया की गर्दन पर अपनी गर्म साँसें छोड़ीं और फिर उसके कानों को धीरे से चूमना शुरू किया। प्रिया की आँखें बंद हो गईं, उसकी साँसें तेज़ होने लगीं। रोहन के होंठ धीरे-धीरे उसकी गर्दन से नीचे उतरते हुए उसके कंधे पर आ गए, जहाँ उसने अपनी ज़ुबान से पानी की बूँदों को चखा। प्रिया की उँगलियाँ रोहन के बालों में उलझ गईं, और वह धीरे-धीरे उसकी पीठ सहलाने लगी। रोहन ने प्रिया को पलटकर अपनी ओर किया और अब उसके होंठ प्रिया के लबों पर थे। एक गहरा, प्यासा चुंबन, जिसमें वे दोनों एक-दूसरे की वासना का स्वाद चख रहे थे।
चुंबन गहरा होता गया, और रोहन के हाथ धीरे-धीरे प्रिया की साड़ी को ऊपर उठा रहे थे। एक ही झटके में उसने प्रिया की साड़ी को ज़मीन पर गिरा दिया। अब वह सिर्फ़ एक पतली पेटीकोट और ब्रा में थी, उसका बदन कामुकता से थरथरा रहा था। रोहन की आँखें उसके उभरे हुए वक्ष पर टिक गईं, जो उसके ब्रा में कसे हुए थे। उसने अपनी उंगलियों से उसकी ब्रा के हुक खोले, और प्रिया के कामुक वक्ष आज़ाद हो गए। उसने अपने होंठ प्रिया के एक स्तन पर टिका दिए और उसे हल्के से चूसा। प्रिया के मुँह से एक तीव्र सिसकी निकली, उसकी रीढ़ की हड्डी में जैसे करेंट दौड़ गया। रोहन एक स्तन को चूसता रहा, जबकि दूसरे को अपनी उंगलियों से सहलाता रहा, उसके निप्पल को हल्के से खींचता रहा। प्रिया पूरी तरह मदहोश हो चुकी थी, उसके हाथ रोहन के शर्ट को नोच रहे थे।
रोहन ने अपनी शर्ट उतारी और फिर प्रिया का पेटीकोट भी उतार दिया। अब वे दोनों ही नग्न थे, उनके बदन एक-दूसरे को छूने के लिए बेताब थे। रोहन ने प्रिया को धीरे से बिस्तर पर धकेला और उसके ऊपर आ गया। उनके बदन एक-दूसरे से चिपक गए, त्वचा की गर्मी एक-दूसरे में घुल रही थी। रोहन ने प्रिया की जांघों को फैलाया और धीरे-धीरे अपने पुरुषत्व को उसकी गहराई में उतारने लगा। प्रिया ने एक पल के लिए अपनी आँखें भींच लीं, फिर एक लंबी आह भरी। जब रोहन पूरी तरह से उसमें समा गया, तो उसने अपने होंठ प्रिया के माथे पर रखे।
रोहन ने धीरे-धीरे कमर हिलाना शुरू किया, और प्रिया भी उसके साथ ताल मिलाने लगी। हर धक्के के साथ, प्रिया आहें भर रही थी, यह बेकाबू जवानी का गरमा गरम प्यार था जो उन्हें मदहोश कर रहा था। उनके बदन पसीने से भीग गए थे, और कमरे में सिर्फ़ उनकी कामुक सिसकियाँ और बदन के टकराने की आवाज़ गूँज रही थी। प्रिया ने अपनी टाँगों से रोहन को कस कर जकड़ लिया, और वह उसे और गहरा महसूस करना चाहती थी। रोहन भी पूरे आवेश में था, उसकी कामुक ऊर्जा प्रिया की देह में उतर रही थी।
कई मिनटों तक उनके बदन इसी तरह एक-दूसरे में खोए रहे, जब तक कि एक तीव्र सिहरन से वे दोनों एक साथ काँप उठे। प्रिया ने रोहन को और कसकर पकड़ लिया, उसकी उँगलियाँ उसकी पीठ को नोंच रही थीं, और एक गहरी, तीव्र तृप्ति की लहर उनके पूरे शरीर में दौड़ गई। वे दोनों शिथिल होकर एक-दूसरे की बाहों में ढह गए, उनकी साँसें तेज़ थीं।
कुछ पल बाद, जब उनकी साँसें सामान्य हुईं, तो रोहन ने प्रिया के माथे पर चुंबन किया। “मेरा प्यार,” उसने फुसफुसाया। प्रिया ने अपनी आँखें खोलीं और उसकी आँखों में देखा। आज रात उन्होंने महसूस किया कि उनका बेकाबू जवानी का गरमा गरम प्यार एक ऐसी आग थी, जो कभी बुझने वाली नहीं थी, और वे हर रात इस आग में जलकर और ज़्यादा एक-दूसरे के हो जाना चाहते थे। बाहर भले ही गर्मी थी, पर उनके भीतर की आग ने इस कमरे को एक ऐसी जन्नत बना दिया था, जहाँ सिर्फ़ प्यार और वासना ही थी।
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