गर्मी से बेहाल, पसीने में लथपथ प्रिया बस स्टॉप पर खड़ी थी, जब एक अजनबी की तेज़, बेबाक नज़र ने उसके अंदर की सुलगती आग को और भड़का दिया। उसकी साड़ी का पल्लू थोड़ा सरका हुआ था, और गर्दन पर जमा पसीना उसकी त्वचा को एक चमक दे रहा था। सामने से आ रहे उस नौजवान, रोहन की आँखों में उसने कुछ ऐसा देखा, जो उसकी अपनी दबी हुई ख्वाहिशों को आवाज़ दे रहा था। उनकी नज़रें मिलीं, और उस पल में, शहर के शोरगुल के बीच, उन्हें **बस स्टॉप पर मिला प्यार का इशारा** साफ महसूस हुआ।
रोहन ने एक पल भी नहीं गंवाया। बस आने का कोई नामोनिशान नहीं था। वह उसके करीब आया, उसकी साँसों में उसकी खुशबू भर गई। “बस नहीं आ रही, कहीं छोड़ दूँ?” उसकी आवाज़ में एक अजीब-सा आकर्षण था, जो प्रिया को चाहकर भी मना करने नहीं दे रहा था। प्रिया ने संकोच किया, लेकिन उसके अंदर की उत्तेजना उसे हाँ कहने पर मजबूर कर रही थी। “जी, अगर आप चाहें…” उसकी धीमी आवाज़ में एक अनकही सहमति थी।
रोहन की बाइक पर बैठकर प्रिया का बदन उसके जिस्म से टकरा रहा था। हवा उसके खुले बालों से खेल रही थी, और रोहन के कंधे पर उसका हाथ बेकाबू धड़कनों का साथ दे रहा था। उनके बीच की दूरी हर पल कम होती जा रही थी। प्रिया को समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या कर रही है, लेकिन उसकी रूह इस रोमांच में खो जाना चाहती थी। वह उसके स्पर्श, उसकी गर्माहट और उसकी मौजूदगी में खुद को बेबस महसूस कर रही थी। जब रोहन ने अपनी बाइक एक सुनसान गली में एक अपार्टमेंट के सामने रोकी, तो प्रिया का दिल ज़ोरों से धड़का। उसने बिना कुछ कहे चाबी घुमाई और दरवाज़ा खोला। प्रिया ने एक गहरी साँस ली और उसके पीछे अंदर चली गई।
दरवाज़ा बंद होते ही कमरे में गहरा सन्नाटा छा गया, जिसे सिर्फ उनके जिस्मों की बढ़ती धड़कनें तोड़ रही थीं। रोहन ने प्रिया की ओर देखा, उसकी आँखों में वही वासना थी जो प्रिया अपनी आँखों में महसूस कर रही थी। उसने धीरे से अपना हाथ बढ़ाया और प्रिया के गाल को सहलाया। प्रिया की पलकें झुक गईं, उसके होंठ हल्के से खुले थे, एक अनकही प्यास का इज़हार कर रहे थे। रोहन झुका और उसके अधरों को अपने होंठों में भर लिया। वह एक ज़बरदस्त, गहरा चुम्बन था, जो उन दोनों की सारी दबी इच्छाओं को आज़ाद कर रहा था। प्रिया ने अपनी आँखें बंद कर लीं और खुद को उस पल के हवाले कर दिया। उसकी उँगलियाँ रोहन के बालों में उलझ गईं, और वह भी जवाब में उसे उतनी ही शिद्दत से चूमने लगी।
साड़ी का पल्लू कब सरक कर ज़मीन पर गिरा, प्रिया को पता ही नहीं चला। रोहन के हाथ उसकी कमर पर थे, धीरे-धीरे ऊपर सरकते हुए, उसकी ब्रा के हुक को खोलते हुए। उसके स्तन आज़ाद होकर उसके सामने आ गए, लाल और प्यासे। रोहन ने बिना देर किए अपने होंठ उसके एक स्तन पर रख दिए, उसे चूसने लगा, जैसे कोई प्यासा बच्चा अपनी माँ का दूध पीता है। प्रिया के मुँह से दर्द और आनंद से भरी एक मदहोश आह निकली। उसकी देह कामुकता की आग में जलने लगी थी। रोहन उसे गोद में उठाकर बेडरूम में ले गया और बिस्तर पर हल्के से लिटा दिया।
प्रिया अब पूरी तरह से बेबस थी, उसकी आँखें बंद थीं, होंठ खुले थे और पूरा बदन थरथरा रहा था। रोहन ने धीरे-धीरे उसके बदन से कपड़ों का हर एक टुकड़ा अलग किया, हर स्पर्श पर प्रिया के बदन में बिजली सी दौड़ रही थी। प्रिया ने भी उसके शर्ट के बटन खोले, उसके मज़बूत सीने को सहलाया और उसकी पैंट को नीचे सरकाया। दोनों जिस्म अब एक-दूसरे के सामने नंगे और आतुर थे। **बस स्टॉप पर मिला प्यार का इशारा** अब एक बेकाबू जुनून में बदल चुका था।
रोहन उसके ऊपर आया, और प्रिया ने अपनी टाँगें उसके कमर के इर्द-गिर्द कस लीं। उनकी आँखों में एक-दूसरे के लिए अथाह प्यार और वासना थी। उसने धीरे से प्रिया के भीतर प्रवेश किया। प्रिया की एक चीख निकल गई, जो तुरंत एक गहरी आह में बदल गई। उसकी योनि की कसक और गर्माहट ने रोहन को पागल कर दिया। वे एक-दूसरे में इस कदर समा गए थे कि बाहर की दुनिया का कोई होश नहीं था। हर धक्के के साथ प्रिया की आहें और रोहन की साँसें तेज़ होती जा रही थीं। पसीने से भीगे उनके जिस्म एक-दूसरे से चिपक रहे थे, और बिस्तर की चादरें उनकी कामुकता की गवाह बन रही थीं। प्रिया ने अपने नाखूनों से रोहन की पीठ खुरच दी, और उसकी आवाज़ अब सिर्फ मदहोश सिसकियों में बदल चुकी थी।
एक चरम सुख की लहर ने दोनों को अपनी आगोश में ले लिया। रोहन ने एक अंतिम धक्का दिया, और प्रिया के बदन में एक तीव्र कंपन हुआ। उसकी आँखों से खुशी के आँसू छलक पड़े और उसके होंठों से निकली एक लंबी, संतुष्ट आह ने पूरे कमरे को भर दिया। रोहन उसके ऊपर ही लेटा रहा, उसकी साँसें अभी भी तेज़ी से चल रही थीं। दोनों की रूह तक तृप्त हो चुकी थी। वे कुछ पल वैसे ही एक-दूसरे की बाहों में खोए रहे। **बस स्टॉप पर मिला प्यार का इशारा** आज उनकी ज़िंदगी का सबसे हसीन और यादगार लम्हा बन गया था, जिसने दो अजनबी जिस्मों को एक पवित्र और वासनात्मक बंधन में बांध दिया था।
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