उसकी निगाहें मेरे सीने पर टिकते ही, मुझे लगा जैसे मेरे भीतर कहीं आग लग गई हो। बस स्टॉप पर यूँ तो हज़ारों आते-जाते हैं, पर उस दिन, उस भीड़ में भी, उसकी आँखों का जादू कुछ और ही था। राहुल, मैं मन ही मन उसका नाम बुदबुदाई, हालाँकि मैं उसे जानती भी नहीं थी। वो मेरी ओर देख मुस्कुराया और मेरे अंदर की दबी हुई प्यास जैसे जाग उठी। उसकी आँखों में वह शरारत थी, वह आमंत्रण था, जो मुझे बरसों से चाहिए था।
“बस नहीं आ रही आज,” उसने धीमी, मादक आवाज़ में कहा, जैसे यह सिर्फ एक बहाना हो बात शुरू करने का।
“लगता है आज हमें कोई और सवारी ढूंढनी पड़ेगी,” मैंने भी तुरंत जवाब दिया, और मेरी आवाज़ में भी वही छुपी हुई इच्छा थी जो उसकी आँखों में थी। हमारा यह पहला संवाद ही इतना कामुक था कि लगा जैसे बस स्टॉप पर मिला प्यार का इशारा सिर्फ आँखों से नहीं, बल्कि हमारे दिलों की धड़कनों से भी आ रहा था।
अगले ही पल, उसकी हथेली मेरी कमर पर आ टिकी, हल्की सी थिरकन, एक अप्रत्याशित स्पर्श। मैंने उसे नहीं रोका। उसके होंठ मेरे कान के पास आए और उसने फुसफुसाया, “मेरे घर चलोगी? वहाँ बस का इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा।” मेरे पूरे शरीर में सिहरन दौड़ गई। मैंने बस एक पल के लिए सोचा, फिर अपनी सहमति में धीरे से सिर हिला दिया। मेरी देह, मेरी आत्मा, सब उस पल किसी अनजाने सुख के लिए तरस रही थी।
उसके अपार्टमेंट में घुसते ही, उसने मुझे दीवार से लगा लिया। हमारे होंठ मिले, और यह कोई साधारण चुंबन नहीं था। यह वासना का, बरसों की प्यास का, और उस पल की अदम्य इच्छा का मिलाप था। उसकी जीभ मेरी जीभ से मिली, एक दूसरे को टटोलती, चूसती हुई। मेरे हाथों ने उसकी कमीज के बटन खोले, और उसके मजबूत जिस्म की गरमाहट मेरे हाथों से टकराई। उसके हाथों ने मेरी साड़ी खोली, और वह मेरी नंगी पीठ पर फिसलते हुए मेरे कूल्हों तक पहुंच गए, उन्हें हल्के से दबाते हुए।
कपड़े एक-एक करके फर्श पर गिरते गए, और हम दोनों अब एक दूसरे के सामने पूरी तरह नग्न खड़े थे। मैंने शरम से आँखें बंद कर लीं, पर उसने मेरे गालों को थामकर मुझे उसकी आँखों में देखने को मजबूर किया। “तुम बहुत खूबसूरत हो, प्रिया,” उसकी आवाज़ इतनी गहरी थी कि मेरा दिल उछल पड़ा। उसने मेरे स्तन अपने हाथों में भर लिए, उनके सख्त चूचुक को अपनी उँगलियों से मसला। मेरे मुँह से एक मदहोश कर देने वाली आह निकली। वह नीचे झुका और मेरे एक चूचुक को अपने मुँह में भर लिया, उसे चूसता, काटता हुआ। मैं दर्द और आनंद के मिश्रित भावों से सिसक उठी।
उसका स्पर्श मेरे पूरे शरीर पर घूम रहा था, मेरी जांघों पर, मेरे पेट पर, और फिर वह मेरी योनि तक पहुँच गया। उसकी उंगलियाँ मेरी गीली फाँकों पर फिसलती हुई अंदर-बाहर होने लगीं। “ओह्ह्ह्… राहुल… और तेज़ी से…” मैं कराह उठी। मेरी देह अब उसके लिए पूरी तरह तैयार थी। उसने मुझे बिस्तर पर धकेला और मेरे पैरों को चौड़ा करके अपने मजबूत लिंग को मेरी योनि के द्वार पर टिका दिया। मैंने उसे अपनी आँखों में देखा, और उस पल फिर मुझे याद आया बस स्टॉप पर मिला प्यार का इशारा। वह इशारा अब एक भयानक हकीकत में बदल रहा था।
“तैयार हो?” उसने पूछा। मैंने बस सिर हिलाया। उसने एक ज़ोरदार धक्का दिया और उसका पूरा लिंग मेरे अंदर समा गया। “आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्!” मेरे मुँह से एक चीख निकली, जो तुरंत ही आनंद की सिसकियों में बदल गई। उसने अंदर-बाहर आना-जाना शुरू किया, हर धक्के के साथ मैं और गहरी होती जा रही थी। हमारे जिस्म टकरा रहे थे, हमारे पसीने मिल रहे थे, और हमारी आहें कमरे में गूँज रही थीं। मैं उसकी कमर पकड़े, अपने कूल्हों को ऊपर उठाती, उसे और गहराई से मुझमें धँसने के लिए उकसा रही थी।
राहुल ने अपनी गति बढ़ाई, और मैं चरमसुख की ओर बढ़ती महसूस कर रही थी। मेरा शरीर काँप रहा था, मेरी योनि कसती जा रही थी, और मैं ज़ोर-ज़ोर से कराह रही थी। “राहुल! आ… आ रहा है… मुझे… आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्!” उसने एक आखिरी ज़ोरदार धक्का दिया और मैं फट पड़ी, मेरा पूरा शरीर ऐंठ गया, और मैंने एक गहरी, संतुष्ट चीख के साथ अपने आप को उसके हवाले कर दिया। वह भी मेरे अंदर ही खाली हो गया, उसकी गरमाहट मेरी योनि को भरती हुई।
हम दोनों एक-दूसरे की बाहों में थके हुए पड़े थे, हमारी साँसें तेज़ थीं, और हमारे जिस्म पसीने से भीगे हुए थे। यह बस स्टॉप पर मिला प्यार का इशारा, एक अनचाहे अजनबी के साथ, मेरे जीवन का सबसे कामुक और संतुष्ट करने वाला अनुभव बन गया था। मैंने अपने सिर को उसके सीने पर रखा, और उसकी धड़कनों की आवाज़ सुनती रही, जानती थी कि यह सिर्फ शुरुआत थी।
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