आज ऑफिस की खामोशी में, मीरा की धड़कनें कुछ ज्यादा ही शोर कर रही थीं। देर रात का सन्नाटा, एसी की धीमी गड़गड़ाहट और केवल दो लोगों की मौजूदगी – मीरा और उसके बॉस, रोहन। यह केवल काम की थकान नहीं थी, बल्कि रोहन और मीरा के बीच पनपती एक नई, वर्जित कहानी की शुरुआत थी – **ऑफिस में चोरी छिपे इश्क की दास्तान**।
रोहन अपनी सीट से उठा, उसकी नज़र सीधे मीरा पर थी, जो अपनी स्क्रीन पर झुकी थी, पर उसकी साँसें तेज हो रही थीं। “मीरा, कॉफी चलेगी?” रोहन की आवाज़ ने कमरे की शांति भंग की, पर उसमें एक अजीब सी गर्माहट थी। मीरा ने सिर उठाया, उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी जो रोहन को सीधे निमंत्रण दे रही थी। “हाँ, क्यों नहीं,” उसने फुसफुसाते हुए कहा, जैसे किसी गहरे राज़ को साझा कर रही हो।
कॉफी मशीन के पास पहुँचते ही, उनकी उंगलियाँ टकराईं। एक बिजली सी दौड़ी मीरा के बदन में, और उसने महसूस किया कि रोहन का स्पर्श सिर्फ एक संयोग नहीं था। उसने अपनी उंगली जानबूझकर मीरा की हथेली पर फैलाई, एक पल को वहाँ रुका, और मीरा ने अपनी आँखें बंद कर लीं। वह जानती थी कि अब पीछे हटने का कोई रास्ता नहीं था। रोहन ने कॉफी के कप उसे थमाए, पर उसकी उंगलियाँ मीरा की कलाइयों पर देर तक टिकी रहीं, जैसे कोई अप्रत्याशित वादा कर रही हों।
“मीरा, क्या हम कॉन्फ्रेंस रूम में बात कर सकते हैं? कुछ प्रोजेक्ट डिटेल्स डिस्कस करनी हैं,” रोहन ने कहा, उसकी आवाज़ में काम से ज्यादा कुछ और था। मीरा ने बिना किसी सवाल के सिर हिलाया। कॉन्फ्रेंस रूम की बत्तियाँ मद्धम थीं, और खिड़की से आती चाँदनी कमरे में एक रहस्यमय आभा बिखेर रही थी। जैसे ही दरवाजा बंद हुआ, रोहन ने मीरा को अपनी ओर खींच लिया।
“मीरा, मैं जानता हूँ यह गलत है, पर मैं तुम्हें अपनी आँखों से दूर नहीं रख सकता।” रोहन की आवाज़ कामोत्तेजना से भरी थी। मीरा ने उसके गले में अपनी बाहें डाल दीं, और उनके होंठ एक-दूसरे से ऐसे मिले, जैसे सदियों की प्यास बुझाने को बेताब हों। रोहन की जीभ ने मीरा के मुँह के हर कोने को टटोला, और मीरा की उंगलियाँ उसके बालों में उलझ गईं। उनकी साँसों की गरमाहट एक-दूसरे में घुल-मिल रही थी, और मीरा को लगा कि वह इस पल में पूरी तरह खो चुकी है।
रोहन के हाथ मीरा की साड़ी के पल्लू से होते हुए, उसके कमर पर जा ठहरे, और फिर धीरे-धीरे उसके गर्म पेट पर फिसलने लगे। मीरा के स्तन उसकी साँसों के साथ तेजी से ऊपर-नीचे हो रहे थे, उसके निप्पल सख्त होकर रोहन की कमीज से रगड़ रहे थे। रोहन ने उसके कान में फुसफुसाया, “तुम इतनी खूबसूरत हो, मीरा।” और फिर उसके कान की लौ को चूमने लगा। मीरा के मुँह से सिसकियाँ निकल रही थीं, जिन्हें वह दबाने की नाकाम कोशिश कर रही थी।
एक झटके में, रोहन ने मीरा की साड़ी को उसके कंधों से खिसका दिया, और वह फर्श पर जा गिरी। मीरा अब केवल एक पतले ब्लाउज और पेटीकोट में थी। रोहन की आँखें वासना से चमक रही थीं। उसने अपने हाथों से मीरा के ब्लाउज के बटन खोलने शुरू किए, एक-एक करके, हर बटन खुलने के साथ मीरा की बेचैनी बढ़ती जा रही थी। ब्लाउज उतारते ही, मीरा के भरे हुए स्तन रोहन की नज़रों के सामने आ गए। रोहन ने अपने होंठों से मीरा के गुलाबी निप्पलों को चूसना शुरू किया, और मीरा के मुँह से एक तीव्र आह निकली। उसके शरीर में एक मीठा दर्द और उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी।
फिर रोहन ने धीरे-धीरे मीरा का पेटीकोट भी उतार दिया, और अब मीरा पूरी तरह नग्न थी। उसकी योनि, जो अब तक गीली हो चुकी थी, रोहन को अपनी ओर खींच रही थी। रोहन ने अपनी जीभ से उसकी योनि के ऊपर एक रेखा खींची, और मीरा का बदन काँप उठा। “रोहन, प्लीज़…” मीरा मुश्किल से बोल पाई।
रोहन ने अपनी पैंट खोली और अपना लिंग बाहर निकाला, जो पूरी तरह से खड़ा था, मीरा की आँखों में वासना और अधिकार की चमक थी। रोहन ने मीरा को उठाया और उसे कॉन्फ्रेंस टेबल पर बिठा दिया। मीरा ने अपने पैर फैलाए, और रोहन ने एक गहरी साँस लेकर, उसे अपने भीतर पूरी तरह उतार लिया। मीरा के मुँह से एक तीव्र चीख निकली, जो उसने अपने होंठों को कस कर दबाकर दबाने की कोशिश की। हर धक्के के साथ, उनकी वासना की आग और भड़कती गई। टेबल की खामोश सतह पर उनके बदन की रगड़ और सिसकियों का शोर गूँज रहा था। आज रात, इस बंद कमरे में, उनकी यह **ऑफिस में चोरी छिपे इश्क की दास्तान** अपने चरम पर पहुँच रही थी।
रोहन की साँसें तेज हो चुकी थीं, और मीरा अपने नाखूनों से उसकी पीठ को नोच रही थी, हर धक्के के साथ वह और गहरा उतरती जा रही थी। कुछ देर बाद, दोनों एक ही समय पर चरम पर पहुँचे। मीरा के बदन में एक तीव्र कंपकंपी दौड़ी और वह रोहन के कंधे पर ढह गई, उसकी योनि से गर्म रस बह रहा था। रोहन ने भी अपनी सारी वासना मीरा के भीतर उड़ेल दी।
उनकी साँसें जब सामान्य हुईं, तो वे कुछ देर तक वैसे ही पड़े रहे, एक-दूसरे की गरमाहट में लिपटे हुए। मीरा ने रोहन की आँखों में देखा, और एक मीठी मुस्कान उसके होंठों पर फैल गई। यह सिर्फ एक रात नहीं थी, यह उनके **ऑफिस में चोरी छिपे इश्क की दास्तान** की एक और गरमाहट भरी सुबह थी, जिसका अंत अभी दूर था। वे जानते थे कि अगली रात, या शायद अगली ही दोपहर, दफ्तर की दीवारें एक बार फिर उनकी वासना की कहानियों की गवाह बनेंगी।
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